हमारी पोथी

भाग-5

'पाठ्य पुस्तक लेखन एवं संम्पादन समिति

बिस्मिल्लाहिरहमानिरहीम अल्लाह के नाम से जो बेइंतिहा मेंहरबान और रहम फ़रमानेवाला है।

हु दो शब्द

मर्कज़ी दर्सगाह रामपुर के भूतपूर्व नाज़िम (व्यवस्थापक) जनाब अफ़ज़ल हुसैन साहब ने गभग आधी शताब्दी पहले भारतीय मुसलमानों की नई पीढ़ी हेतु आरम्भिक कक्षाओं के लिए व्यपुस्तकों की एक अत्यन्त उपयोगी श्रृंखला तैयार की थी जिसमें बच्चों के मनोविज्ञान, नसिक स्तर, उम्र, रुचि और सामाजिक अपेक्षाओं का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया था। अल्लाह की पा से ये पुस्तकें पूरे देश में लोकप्रिय हुई और इन पुस्तकों ने छात्र-छात्राओं के मन-मस्तिष्क गैर विचारों को इस्लामी रंग में रंगने का बहुत ही उल्लेखनीय कार्य किया। वर्तमान श्रृंखला में नके द्वारा निर्दिष्ट पथ पर चलने का पूरा-पूरा प्रयास किया ग़या है। अल्लाह तआला मरहूम नाब अफ़ज़ल हुसैन साहब की सेवा को स्वीकार करके उनपर अपनी कृपा-वर्षा करे। आमीन!

पाठ्य पुस्तकों का पुनरीक्षण, संशोधन और नवीनीकरण एक सतत्‌, लाभदायक और निवार्य प्रक्रिया है। हमने भी अपनी. सभी पाठ्यपुस्तकों को_ और अधिक उप्रयोगी तथा मयानुकूल बनाने के लिए इन्हें नए सिरे से तैयार करने की योजना बनाई है।

भाषा बच्चों के व्यक्तित्व के विकास का एक महत्वपूर्ण साधन है। भाषा की पाठ्य स्तकों की तैयारी के दौरान हमने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि भाषा-बोध के लिए ऐसी ठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए जिससे बच्चों ,में भाषा की सभी आधारभूत कुशलताएँ - ज़ने, बोलने, पढ़ने, लिखने, चिन्दन-मनन और अध्ययन की क्षमताएँ - विकसित हो जाएँ तथा नमें अतिरिक्त अध्ययन के प्रति रुचि बढ़े। हमने यह प्रयास भी किया है कि जीवन के अनुकूल परषय-वस्तु प्रस्तुत की जाए जिससे छात्र-छात्राओं के अन्दर वांछित जीवन-मूल्यों, मानवीय सद्गुणों 5 बीज अंकुरित, पल्‍्लवित, पुष्पित और फलित हों और उनका सर्वागीण विकास सम्भव हो सके।

पाठ्य पुस्तकों की तैयारी के समय हमने बच्चों की उम्र, उनकी अपेक्षा तथा आवश्यकता, पभिरुचि! मनोविज्ञान और बौद्धिक क्षमता का भी पूरा-पूरा ध्यान रखा है।

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हमने अपनी पाठ्य पुस्तकों में ऐसी सामग्री प्रस्तुत करने की कोशिश की है जिससे ब्त को अपने परिवेश और वातावरण के प्रति सचेत तथा जागरूक बनाया जा सके, उनके अनर इससे सम्बन्धित ज्ञान प्राप्त करने के प्रति अभिरुचि उत्पन्न हो और उनके कार्य-कलापों यथोचित परिवर्तन हो साथ ही, ये चीज़ें उन्हें जीवन के विभिन्‍न क्षेत्रों से अवगत भी 'करा सकें।

प्रत्येक पाठ के अन्त में पर्याप्त अभ्यास दिए गए हैं जो छात्र-छात्राओं में केव भाषा-बोध, लेखन, पाठ्य सामग्री को समभने और स्मरण रखने में सहायक होंगे, बल्कि उन चिन्तन-मनन की क्षमता और व्यक्तिगत रूप से अध्ययन के प्रति रुचि उत्पन्न करेंगे। ये अभ्या बच्चों के ज्ञान में उत्तरोत्तर वृद्धि और विकास के साधन तो सिद्ध होंगे ही, उनकी मानसिक शैक्षणिक क्षमता के विकास में भी सहायक होंगे।

हम अपने उन सभी मित्रों और उन सभी महानुभावों के आभारी हैं, जिन्होंने पुस्तक तैयारी के क्रम में विभिन्‍न प्रकार से सहयोग दिया है। हम उन सज्जनों के भी आभारी हैं जिनव कविताएँ, लेख, निबन्ध और पहेलियाँ इत्यादि ज्यों-की-त्यों या कुछ परिवर्तन के साथ इस पुस्तः 'मैं सम्मिलित हैं। अल्लाह तआला की कृपा-छाया सदैव उन महानुभावों को सुख-शान्ति प्रदा करती रहे।

हमने इस पुस्तक को यथासम्भव अधिक- से-अधिक उपयोगी और लाभदायक बनाक सुन्दर और आकर्षक रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है। हम अपने प्रयास में किस हद तः सफल हो सके हैं, इसका वास्तविक मूल्यांकन तो शिक्षकगण, अभिभावकों और पढ़ने-पढ़ाने ' रुचि रखनेवाले ज्ञानीजनों के बहुमूल्य सुझावों, विचारों औरं टिप्पणियों से ही हो सकेगा।

27.04.2008 मुहम्मद अशफ़ाक़ अहमः दिल्ली निगराँ (निरीक्षक)

विषय-सूची

पाठ पृष्ठ

9 एज एरेएछए

दो शब्द 3 विनय (कविता) 7 प्यारे नबी (जीवनी) हि दुरूद-सलाम (कबिता) 35 ताजमहल की सैर (दर्शनीय स्थल) हि ]9 संकल्प (कहानी) 26 जाँच-पड़ताल (कविता) 30 अनमोल मोती (हदीस) शि हि 32 दो बैलों की कथा (कहानी) 35 पुस्तक मँगबाने के लिए प्रकाशक के नाम पत्र (पत्र) 40 70. बाल-कामना (कविता) ब2 4. बीबी फ़ातिमा ज़हर (आदर्श महिला) 45 42. न्याय (कहानी) 50 33. मेरा नया बचपन (कविता) 54 44. महान पक्षी विज्ञानी : सालिय अली 58 45. पवित्र क्कुआन (मार्गदर्शक ग्रंथ) 63 6. कबीर के दोहे (कविता) 69 7. चार यार (आवर्श शासक) ] 8. पर्यावरण की सुरक्षा (पर्यावरण) हि 9. मचा है क्यों जग में अंधेर? (कविता) ; 84 -20. प्योरे नबी (सल्ल.) का देश (देश-परिचय) हह। 24. नवियाँ (पर्यावरण एवं भूगोल) 93 22. नट्खट हाथी (कहानी) 98 23. सब हैं एक समान (कविता) 02 24... अंधी भिखारिन (कहानी) 05 25. जीवन के अंधियारे पथ में (कविता) न्‍ ]4] 26. हिमालय से परे (देश-परिचय) व43 27... मौलाना मुहम्मद अली जौहर (स्वतंत्रता सेनानी) 8

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पाठ -4

हे जगवीश्वर, है कर्तार। तू है करुणा का भण्डार॥

सृष्टि रची, आकाश बनाए, सूर्य-चन्द्र के दीप जलाए, भूतलत पर इनसान बसाए, तू है सबका सृजनहार।

हे जगदीश्वर, हे कर्तार॥

तू ही सब कुछ देनेवाला, कष्ट सभी हर लेनेवाला, जीवन नैया खेनेवाला, देता है सबको आहार।

- है जगदीश्वर, हे कर्तार॥

हमारी पोथी-5 (79

हे जगदीश्वर, शब्दार्थ और टिप्पणी जगदीश्वः < जगूत का ईश्वर, अल्लाह भूतल सृष्टि 5 दुनिया, कायनात, ख़ल्क़, विश्व हर लेना सृथनहार॒ < बनानेवाला, निर्माता आहार उपासक +८ उपासना करनेवाला त्रिभुवन कर्तार - करनेवाला, बनानेवाला, ईश्वर भण्डार 5 ख़ज़ाना विकासक अतुल 5 बेजोड़, अनुपम - अपरम्पार महिमा - बड़ाई सम्मान वरदान इनाम उद्धार

अभ्यास

(क) उत्तर लिखिए:

. प्रस्तुत कविता में ईश्वर के किन गुणों की ओर संकेत किया गया है ?

तू है स्वामी, तू है शासक, हम हैं केवल तेरे उपासक, त्रिभुवन के हे अतुल विकासक, महिमा -तेरी अपरम्पार।

है जगदीश्वर,

सत्य-धर्म का ज्ञान हमें दे, भूतल पर सम्मान हमें दे, जन्नत का वरदान हमें दे, हम सबका कर दे उद्धार]

2. जगदीश्वर ने कौन-कौन-सी चीज़ें बनाई हैं ?

है कर्तार॥

हे कर्तार॥

-संकलिः

धरती, संसार, पृथ्वी दूर करना

भोजन, खाना

तीनों लोक, (धरती, आकाश और पाताल)

- विकसित करनेबाला

असीम, बेहिसाब, बेहद इज़्ज़्त, आदर छुटकारा, मुक्ति, नजात

हमारी पोथी-5

3. 'ब्रिभुवन के है अतुल विकासक' पद में 'त्रिभुवन' शब्द का क्या अर्थ है? 4. हमारा स्वामी और शासक कौन है और हम किसकी उपासना करते हैं? 5. इस कविता की अन्तिम चार पंक्तियों में कवि ने ईश्वर से क्या प्रार्थना की है ?

ब्र) इन पंक्तियों को पूरा कीजिए :

महिमा. तेरी अपरम्पार। 2. स्त्य-धर्मका .................... ! मम सम्मान हमें दे जन्नत का ...................... | 2000 77722 कर दे उद्धार।

7) पढ़िए और लिखिए :

जगदीश्वर.. कर्तार सृजनहार भूतल सृष्टि अतुल त्रिभुवन सम्मान उद्धार अपराःपार

घ) जोड़े लगाइए :

उपासना करनेवाला 5 सृजनहार खेनेवाला -. दाता शासन करनेवाला 5. खिबैया देनेवाला -. उपासक सृजन करनेवाला <. शासक

हमारी पोधी-5 (9 >

भाषा-बोध

(क) नीचे के वाक्‍्यों को ध्यान से पढ़ो :

त्रिभुवन के हे अतुल विकासक सलीम चतुर लड़का है। मैदान में दस आदमी हैं। गिलास में थोड़ा दूध है।

इन वाक्यों में 'अतुल', 'चतुर', दस” और थोड़ा' शब्द क्रमश: विकासक, लड़का, आ< और दूध शब्द की विशेषता बता रहे हैं। अतः अतुल, चतुर, दस और थोड़ा शब्द विशेषण विशेषण के चार भेद हैं : गुणवाचक्र, परिमाणवाचक, संख्यावाचक और सार्वनामि विशेषण | यहाँ केवल गुणवाचक विशेषण के बारे में जानकारी दी जा रही है।

अकरम अच्छा लड़का . है। हरा तोता पेड़ पर बैठा है। मैदान में विशाल वृक्ष है। निर्धन छात्र की मदद करो। इन वाक्यों में अच्छा, हरा, विशाल और निर्धन शब्द गुणवाचक्त विशेषण हैं। ऐसे विशेषण: संज्ञा या सर्वनाम के गुण, रंग, आकार, दशा इत्यादि का बोध कराते हैं, गुणवाचक विशेषण कहल हैं। . अच्छा, बुरा, नीला, मोटा, पतला, छोटा, बड़ा, ऊँचा, नीचा, मीठा, भारतीय, नुकीर इत्यादि शब्द गुणवाचक विशेषण हैं। ऊपर लिखे गुणवाचक विशेषण शब्दों में से किन्हीं पाँच शब्दों से वाक्य बनाकर अपने 5 शिक्षक को दिखाइए।

कुछ और काम . इस कविता को याद करके कक्षा में सुनाइए।

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हमारी पोथी-5

"पाठ -.2

प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि सल्‍लम)

लगभग साढ़े चौदह सौ वर्ष पहले सारे संसार में जुल्म और अन्याय का घोर अंधकार छाया था। उस समय अरब देशं की भी हालत अत्यन्त ख़राब थी। लोग एक ईश्वर को छोड़कर अनेक ढुन्त देवी-देवताओं की पूजा करते और उनसे डरते थे। उनके थानों पर भेंट चढ़ाते तथा उन्हीं से यता माँगते थे। लूट-मार, मद्यपान, जुआ तथा लड़कियों को धरती में जीवित गाड़ने का सामान्य लन,था। संमाज के प्रमुख लोग अनाथों और विधवाओं का माल हड़प जाते थे। गुलामों के साथ ओं का-सा व्यवहार करते थे। कोई बुराई ऐसी थी, जो उनमें पाई जाती हो |

अल्लाह तआला को उनपर दया आई। उसने अपने बन्दे को सीधा मार्ग दिखाने के लिए रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि सल्‍लम) को रसूल बनाकर भेजा। आप (सल्ल.) ने यावालों को अल्लाह का सीधा और सत्य मार्ग दिखाया।

3४४7३] प्यारे नबी (सल्ल.) अरब के प्रसिद्ध नगर मक्का में 20 अप्रैल 57] ई. को सोमवार के दिन पैदा हुए। आपके पिता हज़रत अब्दुल्लाह की मृत्यु लए आपके जन्म से पहले ही हो गई-थी। जब आप छह <४3वर्ष के हुए तो आपकी माता हज़रत आमना का भी हि देहान्त हो गया। इसके बाद आपका पालन-पोषण आपके दादा अब्दुल मुत्तलिब ने किया। पस्न्तु

का अभी आप आठ वर्ष के ही थे कि आपके दादाजी चल बसे अब आपंके चाचा अबू तालिब आपके अभिभावक बने। उन्होंने पूरी ज़िम्मेदारी और यन्त लाड़-प्यार के साथ आप (सल्ल.) का लालन-पालन किया। अबू तालिब'की पत्नी फ़ातिमा ते-असद ने प्यारे रसूल के पालन-पोषण में पूरा सहयोग दिया। वे प्यारे रसूल (सल्ल.) का हर ध्यान रखतीं। स्वयं खातीं मगर आपको खिलातीं। अच्छे-अच्छे कपड़े पहनातीं। प्यारे रसूल ल्‍ल.) ने आपकी बड़ी प्रशंसा की है। हे

हमारी पोथी-5 (जज)

पचीस वर्ष की अवस्था में मक्का की एक प्रतिष्ठित विधवा महिला हज़रत ख़दीजा (रज़ि.) के साथ प्यारे रसूल का विवाह हुआ। हज़रत ख़दीजा अत्यन्त धनवान और दानशील महिला थीं। स्त्रियों में सबसे पहले वही ईमान लाईं। उन्होंने हर सुख-दुःख में प्यारे नबी (सलल.) का साथ दिया।': जब आप (सल्ल.) दुष्टों की बातों से दुखी होते तो | ये आपको ढाढ़स बँधातीं।

आप (सल्ल.) ने सदा सत्य का पालन» किया। जीवन में कभी भी आप झूठ नहीं बोले। इस बात को आपके शत्रुओं मे भी स्वीकार किया हे है। इसी कारण सब आपको 'सादिक़़' अर्थात्‌ 'सत्यवादी' कहते थे। लोग आपके पास अपना सा धरोहर के रूप में रखा करते थे, क्योंकि उन्हें विश्वास था कि उनका माल नष्ट नहीं होगा और वह ' समय पर सुरक्षित मिल जाएगा। आप उनकी धरोहर ज्यों-की-त्यों लौटा देते। इसलिए लोग आए “अमीन' कहकर पुकारा करते थे।

प्यारे नबी (सलल.) की अवस्था जब चालीस वर्ष की हुई तो अल्लाह ने आपको * बनाया और आपपर क्रुरआन उतारा। आपने लोगों तक अल्लाह का संदेश पहुँचाया। आपने लोगों संबोधित करते हुए कहा, लोगो ! अल्लाह के सिवा कोई पूज्य नहीं है। तुम केवल उसी की बन करो। किसी को उसका साझी बनाओ मैं अल्लाह का रसूल हूँ। मेरे आदेशों का पालन करो जिस काम से मैं रोकूँ, उससे रुक जाओ और जो मैं करूँ उसे अपनाओ। क़रियामत के दिन तुम्हें जीवित किया जाएगा और तुम लोग अपने रब के सामने उपस्थित किए जाओगे। तुममें से प्र व्यक्ति को अपने कर्मों का हिसाब देना होगा। उस दिन से डरो | उस दिन कोई किसी की सहार कर सकेगा, सिफ़ारिश। अल्लाह के बन्दों के साथ अच्छा व्यवहार करों। उनके हक़ और अधिर का आदर करो। तुम जहन्नम' की आग से बच जाओगे और “जन्नत' के अधिकारी होगे।””

प्यारे नबी (सल्ल.) का आहवान सुनकर कुछ लोग मान गए और कुछ ने इनकार किर

ब्रिधर्मी लोग आपके शत्नु हो गए। वे आप (सलल.) और आपके साथियों पर अत्याचार करने भले लोग मान गए और ईमान ले आए तथा इस्लाम पर चलने लगे। अल्लाह ईमान लानेवालों

हमारी पोथी- (329

प्रक हुआ। देखते-देखते विधर्मियों की शक्ति टूट गई और सम्पूर्ण अरब में इस्लाम का डंका बज मी

प्यारे नबी (सल्ल.) बच्चों से बहुत प्यार करते थे। बच्चे किसी के भी हों, सभी आपको थे। : च्योरे नबी (सल्ल.) से पहले दुनिया में बहुत-से नबी आए। आप (सल्ल.) अंतिम नबी हैं।

के बाद अब कोई नबी नहीं होगा। अतः अब इस्लाम के प्रचार एवं प्रसार की सारी ज़िम्मेदारी नमानों पर है। है

हम कुरआन पढ़ेंगे, इसपर अमल करेंगे और दुनियावालों तक अल्लाह का शुभ संदेश ग्राएँगे, यह हमारा प्रण है।

दुरूद हो प्यारे नबी पर सलाम हो प्यारे नबी पर।

दार्थ और टिप्पणी अत्यन्त < बेहद, निहायत अभिभावक - सरपरस्त मदह्यपान < शराब पीना प्रशंसा - तारीफ़ ढाढ़स 5: हिम्मत, तसल्ली धरोहर 5 अमानत विश्वास 5 यक़ीन संदेश > पैग़ाम्‌ सुरक्षित 5 महफ़ूज़ पुनः दोबारा, फिर से विधर्मी -<5 काफ़िर, अवज्ञाकारी नष्ट - बरबाद आह्वान < पुकार, सम्बोधन, दावत प्रण अहद, प्रतिज्ञा सहायक -< . मददगार अमीन - धरोहर-रक्षक

अभ्यास 3 उत्तर लिखिए:

]. प्यारे नबी (सलल.) कहाँ और कब पैदा हुए ? 2. प्यारे नबी के संसार में आने से पहले समाज में कैसी-कैसी बुराइयाँ फैली हुई थीं ? 3. आप (सल्ल.) ने किस उम्र में पहला विवाह किया और किनसे किया ?

हमारी पोधी-5 | (332

4. आप (सल्ल.) ने लोगों तक अल्लाह का क्या संदेश पहुँचाया ? 5, नबी (सल्ल.) को 'सादिक़' और 'अमीन' क्यों कहा जाता है? 6. इस्लाम के प्रति हमारी क्या ज़िम्मेदारी है ?

(ख) जोड़े लगाडेए : _ 4. मक्का - . अभिभावक बने। 2: नबी (सल्ल.) - अरब में डंका बज गया। 3. हज़रत ख़दीजा (रज़ि.). - सदा सत्य का पालन करते थे। 4.. इस्लाम का - प्रसिद्ध एवं पवित्र नगर है। 5 अबू तालिब . - सबसे पहले ईमान लाईं। भाषा-बोध (क) विलोम शब्द लिखिए : अंधकार, सीधा, शत्रु, सुख, जन्नत, सत्य, पतवित्र। (ख्र) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :

. बरतन में थोड़ा दूध है।

2. सारा देश ख़ुशी से झूम उठा।

3. पानी बहुत गर्म है।

4. जितना हो सके, दे दो |

इन वाक्यों में क्रमश: थोड़ा, सारा, बहुत और जितना शब्द परिमाणवाचक विशेषण ऐसे विशेषण जो संज्ञा या सर्वनाम की नाप, तौल या माप का बोध कराते हैं, परिमाणवाचक विशेः कहलाते हैं। कम, अधिक , इतना, उतना, कितना, पूरा इत्यादि परिमाणवाचक विशेषण हैं।

परिमाणवाचक विशेषण का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाकर अपने शिक्षक को दिखाइए

कुछ और काम

. प्यारे नबी (सल्ल.) बच्चों से बहुत प्यार करते थे। अपने शिक्षक से उन बच्चों में से किसी ( बच्चे के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए

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हमारी पोधी-5

पाठ-3

दुरूद-सलाम

- नबी जी का आए जब नाम। पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम जग़त्‌ में फैला था अज्ञान, न्‍ अरबवाले थे निपट निदान, हे छोड़कर ईश्वर-रचित _ विधान, हो गए थे मूरख, नादान, सिखाया उन्हें दीने-इस्लाम | पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम॥

नारियों का कंरते अपमान, गाड़ देते जीवित सनन्‍्तान, चूसते ख़ून, देते दान, सताते निर्धन को- धनवान,

कराए उनसे अच्छे काम। पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम।॥

हमारी पोथी-5 (359

बुराई फैलाते.. सर्वत्र, परिक्रमा करते हो निर्वस्त्र, पूजते चन्दा, सूर्य,- नक्षत्र, उठाते बात-बात पर शस्त्र,

डराया बतलाकर परिणाम! पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम॥

बहाते रक्त समझकर नीर, प्राण लेते दे-देकर पीर, डालकर डाके बनते वीर, देखते शगुन फेंककर तीर,

छुड़ाए उनसे ये सब काम। पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम॥

ईश्वर के हैं प्यारे आप, निछावर हों मेरे माँ-बाप, दि आपका देखा अतुल प्रताप, मिय जग का सारा संताप,

मुहम्मद आपंका है शुभ नाम।

पढ़ें हम नित्य . दुरूद-सलाम

गिनाएँ. कौन-कौन उपकार, रहेगा. आभारी संसार, अखिल विश्व के करुणाकार, अनाथों, दुखियों के आधार,

रिसालत उनपर हुई तमाम। पढ़ें हम नित्य दुरूद-सलाम॥

- संकलिः

हमारी पोथी-5 (36६०9

गब्दार्थ और टिप्पणी

निपट. -< एकदम, बिलकुल निदान < गया-गुज़रा, निकृष्ट विधान - क़ानून सर्वत्र < सब जगह, हर जगह परिक्रमा फेरा, चारों ओर घूमना निर्वस्त्र नंगा, नग्न रत. “- खून नीर 5. पानी पीर - दर्द वीर -< . बहादुर अतुल <- असीम, अपार, अनुपम प्रताप .5< . बड़ाई, पराक्रम संताप +> दुख आभारी ८< एहसानमन्द अखिल < सम्पूर्ण अनाथ 5. यतीम आधार -< अवलम्ब, सहारा

अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के संक्षिप्त उत्तर लिखिए : ।. प्योरे नबी (सल्ल.) द्वारा इस्लाम के प्रचार से पहले अरबवासियों में कौन-कौन से दोष थे ? 2. प्यारे नबी (सल्ल.) ने हमपर कौन-से उपकार किए ?

(ख) केवल एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

. नबी (सल्ल.) का जब नाम आए तब क्‍या कहना चाहिए 7 2. नबी (सल्ल.) ने किसे इस्लाम सिखाया ?

3. अरबवालें किसे जीवित गाड़ देते थे ?

4. अरबवाले शगुन कैसे देखते थे ?

5. रिसालत किस नबी पर समाप्त हुई ?

(ग) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए :

हमारी पोंथी-5 (79

5 अप मलिक समझ कर नीर।

मम कल 'के आधार। भाषा-बोध

(क) निम्नलिखित उदाहरणों को ध्यान से पढ़िए और उदाहरणों के अनुसार दिए गए शब्दों के रूप लिखिए:

सरल -<- सरलता समाज 5. सामाजिक

निर्ध 5. #.......------ ... स्वभाव 552 वर पक सुन्दर. राजनीति कब दर 8 50258 तीव्र झ् अर्थ #२. आर तार

(ख) नीचे लिखे वाक्यों को ध्यानं से पढ़िए और इनमें प्रयुक्त गुणवाचक और परिमाणवाचक विशेषणों को चुनकर अपनी कॉपी में लिखिए :

गुणवाचक परिमाणबवाचक

अच्छेबच्चे झगड़ा नहीं कर्ते॥ ... .............. . ............... काला हिरण दौड़ रहा है।

छोटा बालक दूध पीता है।

आज कम गर्मी है।

मजीद पढ़ने में तेज़ है।

बह सारा दिन पढ़ता रहा।

कितने पैसे लोगे?

'फलवाला हरे, लाल और पीले आम लाया।

१0282

हमारी पोधी-5 हे

पराठ- 4

ताजमहल की सैर

शाहिंद और इमरान घनिष्ठ मित्र हैं। दोनों एक ही कक्षा में पढ़ते हैं। वे कई दिनों के बाद मिले

॥हिद : अस्सलामु अलैकुम, इमरान भाई।

प्ररान : अलैकुमअस्सलाम | तुम सकुशल तो हो ? कई दिनों से दिखाई नहीं दिए?

॥हिद : अल्लाह का शुक्र है, सब ठीक है। मैं आगरा चला गया था। बहुत दिनों से ताजमहल देखने की बड़ी लालसा थी।

मरान : (ख़ुश होकर) बहुत अच्छा! फिर तो मैं तुमसे ताजमहल के विषय में विस्तार से जानना

चाहूँगा।

इमरान के अनुरोध पर शाहिद अपनी यात्रा का दृत्तांत सुनाने लगा -

हमारी पोथी-5 (9 2

शाहिद :

इमरान ;

शाहिद ;

इमरान ;

शाहिद ;

हमने दावत नगर, ओखला (नई दिल्ली) से कार द्वारा यात्रा शुरू की। मार्ग में रुकते, ठहः और यात्रा का आनन्द लेते हुए आगरा पहुँचे। हमारे साथ कई और लोग भी थे। मार्ग में शुरू हो गई। वर्षा से धुले वृक्ष, लहलहाते खेत, हरी-हरी घास से भरे मैदान तथा ठण्डी-ठण हवाएँ बड़ा आनन्द'दे रही थीं। मोरों के कूजने की आवाज़ें तो हमारी यात्रा को और * आनन्ददायक बना रही थीं। यकायक हमारी नज़र एक खेत की ओर गई। हमने देखा हिरणों का एक झुण्ड सड़क पार करने की प्रतीक्षा में है। मैंने पहली बार हिरण देखे थे। आः मैंने बड़ी उत्सुकता से उन्हें देखा |

हमारी कार काफ़ी तेज़ी से भागी जा रही थी। हम बातचीत में मग्न थे। ज्यों-ज्यों आगरा क़री रहा था, हमारी उत्सुकता बढ़ती जा रही थी। लगभग चार घण्टे की यात्रा के बाद ताजमहल के लाल पत्थर से बने विशाल प्रवेश द्वार पर खड़े थे। ताजमहल को देखकर

आत्म-विभोर हो उठा। मेरा मस्तिष्क इतिहास के पन्‍ने' पलटने लगा। शाही शान-शौकत रोब-दाब, रख-रखाव इत्यादि से संबंधित बातें मेरे मानस-पटल पर एक-एक करके लर्गीं।

इमरान भाई ! यह ठाठउ-बाट और शान-शौकत सदा रहमेवाली चीज़ नहीं है। उत्थान और पत इस जगत्‌ का नैसर्गिक नियम है।

शाहिद भाई ! यह तो बताओ कि ताजमहल किसने बनवाया और उसके दिल में ऐसी भठ था सुन्दरतम इमारत बनाने की बात कैसे सूझी ?

यु

इमरान भाई ! ताज को मुग़लवंश के एक महान बादशाह 'शाहजहाँ” ने बनवाया था। मुग़र काबुल से आए थे। मुग़लों ने भारत ही को अपना स्थायी वतन बना लिया। उनको इमारतों दे निर्माण के प्रति बड़ी रुचि थी। आगरा का ताजमहल, फतेहपुर सीकरी का क़िला, दिल्‍ली जामा मसजिद और लाल क़िला आदि अनेक इमारतें उन्होंने बनवाईं। उनके इस निर्माण-कार से देश की तत्कालीन बेरोज़गारी की समस्या भी हल हुई। « .

अच्छा, शाहिद भाई ! अब ज़रा ताजमहल के विषय में विस्तारपूर्वक बताओ। वाजमहल

जमहल संसार के बड़े आश्च्यों में प्रथम स्थान पर है। यह आगरा के पूर्वी-दक्षिणी भाग यमुना के तट पर स्थित है। अर्जुमन्द बानो शाहजहाँ की पत्नी थी। उसका उपनाम “मुमताड़ महल' था। बादशाह उससे बहुत प्रेम करता था। मुमताज़ महल ने अपनी मृत्यु से पहल शाहजहाँ से वचन लिया था कि उसकी याद में एक ऐसा मक़बरा बनवाया जाए जे

दा

हमारी पोथी-5

स्थापत्य-कला का अद्भुत नमूना हो। वचन को पूरा करने के लिए शाहजहाँ ने ही ताजमहल का निर्माण करवाया था।

लगभग साढ़े सतरह वर्ष अर्थात्‌ 763] ई. से 648 ई. तक बीस हज़ार कारीगरों ने निरन्तर काम किया। इन कारीगरों में हिन्दू और मुसलमान सभी सम्मिलित थे। विभिन्‍न प्रकार के क़ीमती पत्थर और हीरे मुख्यतः फ़ीरोज़ा, पुखराज, याक्रूत तथ्रा सीप इत्यादि भारत के अलाबा अरब, यमन, मिस्र तथा अफ़ग़ानिस्तान इत्यादि देशों से मँगबाए गए थे। संगमरमर मकरामा (राजस्थान) से लाया गया था। तीस गाँवों की लगान से ग्राप्त आय ताजमहल के निर्माण-कार्य हेतु आवंटित की गई थी।

गुंबद पर काले रंग की पह्टियाँ एक अनोखा दृश्य पेश करती हैं। अक्तूबर के महीने में चाँद की बारह तारीख़ से पंद्रह तारीख तक चन्द्रमा उनके ठीक सामने होता है जिसके कारण पट्टियों से सुन्दर और विभिन्‍न प्रकार की रंगीन किरणें निकलती हुई दिखाई पड़ती हैं। इन दिनों दर्शकों की अपार भीड़ होती है।

जब हम क़ब्रें देखने अन्दर गए तो देखा कि शाहजहाँ और मुमताज़ महल की क़ढ्नें पास-पास हैं! दोनों क़ब्रों पर रंगीन पत्थरों को काटकर फूल एवं पत्तियाँ इस अनोखे ढंग से जड़ी गई हैं कि उनमें कोई जोड़ नज़र नहीं आता। फूलों के बीच बने हीरों के 32 टुकड़ों का जोड़ कारीगरी का अदभुत नमूना है। पत्थरों पर बने पत्तों के चित्रों में नसें देखकर दक्ष कारीगरों के लिए प्रशंसा के शब्द मुँह से अपने आप निकल पड़ते हैं। हालाँकि ये क़ब्रें नकली हैं। असली क़्रें इनके नीचे हैं, जहाँ दिन में भी प्रकाश का प्रबन्ध करके जाना पड़ता है। ताजमहल की बाईं ओर एक विशाल मसजिद है। दाहिनी ओर उसी आकार का एक भवन पाठशाला के उ्देश्य से बना हुआ है

मूसा नामक पत्थर से कुरआन की सूरा-89 'अल-फ़ज्न' के शब्दों को इस प्रकार जड़ दिया गया है कि पढ़नेवाला जैसे-जैसे ऊपर की ओर पढ़ता जाता है बैसे-वैसे शब्द छोटे नहीं, बल्कि नीचे से ऊपर तंक शब्दों का आकार समान ही दिखाई देता है। संगतराशी के इस अद्भुत नमूने ने हमें चकित कर दिया। इसके अतिरिक्त अन्य दरवाज़ों और मेहराबों पर भी कुरआन की 'सूरतें' और 'आयतें” मूसा नामक पत्थर से जड़ दी गई हैं। प्रवेश-द्वार से ताजमहल की मूल इमारत के चबूतरे तक नहर के समान एक हौज़ है जिसके दोनों ओर प्रत्थर की सड़कें बनी हैं। इन सड़कों पर लोग आ-जा रहे थे। इनमें अनेक विदेशी पर्यटक भी थे जिनके हाथों में कैमरे थे और वे चारों ओर से ताजमहल के फ़ोटो ले रहे थे। इन सड़कों के पास में अष्टकोणाकार

हमारी पोथी-5 (29

इमरान :

शाहिद :

क्यारियाँ हैं, जिनमें घास उगी हुई है। उनमें सर्व के पंक्तिबद्ध वृक्ष बड़ा सुहावना दृश्य प्रर करते हैं। लम्बे हौज़ के बीचों-बीच संगमरमर का एक चौकोर हौज़ बनाया गया है, जिस ऊँचाई पाँच फुट है। दर्शक इस हौज़ पर बैठकर ताज का आनन्द लेते हैं। हौज़ में चौब॑ फ़ब्वारे लगे हुए हैं। अब वे फ़व्वारे बन्द पड़े हैं। संगमरमर के इस श्वेत हौज़ में रंग-बिः मछलियों तथा ताज के मनोहर ग्रतिबिम्ब को देखकर दर्शक मुग्ध हुए बिना नहीं रहते।

(बात काटते हुए) अब ये फ़ब्वारे क्यों नहीं-चलते हैं ?

मुग़लकाल में यमुना नदी से उनमें पानी आता था और वे दबाव की तकनीक द्वारा निर- चलते रहते थे। उन फ़व्वारों में दबाव की तकनीक वास्तव में चकित कर देनेवाली मुग़लकाल में और उसके बाद भारत की जहाँ अन्य सम्पत्तियों को अंग्रेज़ों ने नुक़स

* पहुँचाया, वहीं उन आतताइयों ने दबाव की उस तकनीक को भी ख़राब कर दिया, तभी से

इमरान ;

शाहिद :

इमरान :

शाहिद :

बेकार पड़े हैं।

हम मूल इमारत की ओर बढ़े और जूते उतारकर चबूतरे पर पहुँचे। यभुना के किनारे उँ चबूतरे पर गगनचुम्बी, चारमीनारों के बीच गोलाकार संगमरमर द्वारा निर्मित गुम्बद देखते

बनता है ! ताजमहल के अनुपम सौन्दर्य पर हम मुग्ध हो गए।

क्या उस समय भी इतने कुशल इंजीनियर मौजूद थे जिनकी निगरानी में इतना उत्तर निर्माण-कार्य हो सकता था? रे

हाँ, क्यों नहीं! उस समय भी कुशल इंजीनियर होते थे। ताजमहल के निर्माण-कार्य देख-रेख शाही निर्माण-विभाग के वरिष्ठ और प्रसिद्ध इंजीनियर मुकर्रम ख़ाँ तथा मीर अब्दु करीम को सौंपी गई थी।

नक़्शानवीस रोम और समरक़ंद से बुलाएं गए थे। पच्चीकार, ख़ुशनवीस, गुलतराश गुंबदसाज़ तथा अन्य कारीगर भारत के विभिन्‍न प्रान्तों से तो आए ही थे; अरब, ईरान, बल्ए बुख़ारा, इराक़ एवं 'सीरिया इत्यादि देशों से भी वेतन पर बुलाए गए, थे। उन कारीगरों शिल्प-कला में अपनी अनुपम दक्षता एवं निपुणता सिद्ध की।

ताजमहल देखकर तुम्हें क्या शिक्षा मिली ?

ताजमहल देखकर ईश्वर की महानता के सामने मस्तक झुक जाता है। उसने इनसान

कितनी योग्यता, कुशलता और दक्षता एवं कैसी अदभुत निर्माण-कला प्रदान की है! ताः

हमारी पोधी-5 (3229

यद्यपि मुग़लों के सौन्दर्य-प्रेम का परिचायक है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि समस्त प्राणियों का जीवन क्षणभंगुर है। एकमात्र सर्वशक्तिमान अल्लाह ही शाश्वत है। सचमुच सुन्दर-से- सुन्दर फूल भी खिलते हैं मुझझाने के लिए। इसलिए एक दिन सम्पूर्ण सृष्टि विनष्ट हो जाएगी।

ताजमहल -की यादें अपने सीने में छुपाए शाम को हम अपने घर लौटे। इमरान : अच्छा भई, आपको बहुत-बहुत धन्यवाद! आपने ताजमहल के विषय में हमें इतमी अच्छी

और विस्तृत जानकारी दी शब्दार्थ और टिम्पणी उत्सुकता + प्रबल इच्छा, बेचैनी अनुरोध. - आग्रह, गुज़ारिश मानस-पटल +> मन रूपी तख़्ती अद्भुत < विचित्र, अनोखा वृत्तांत - हाल, समाचार पच्चीकार +> पत्थर या धातु के दो टुकड़ों में जोड़ आत्म-विभोर - अपने में मस्त लगाकर नक़्शो-निगार बनानेवाला ख़ुशनवीस 5 सुलेखक गुलतराश + फूलों की काट-छाँट करनेवाला शिल्प-कला 5 कारीगरी, दस्तकारी दक्षता + महारत, कुशलता आवंखरित - ख़ास कर देना, सौंप देना अपार - बेहद, ज़्यादा, अधिक चिरसथाई + देर तक टिकनेवाला पर्यटक < सैलानी, घुमक्कड़ भावुकता < संवेदनशीलता अनुपम < अनोखा, अनुठा मुग्ध मोहित . . नैसर्गिक < कुदरती चकित + हैरान आततायी < दुष्ट, उपद्रबी, अत्याचारी अभ्यास (क) उत्तर लिखिए :

. ताजमहल कहाँ पर स्थित है ? 2. आगरा पहुँचने से पहले रास्ते में शाहिद ने क्या-क्या देखा?

हमारी पोथी-5 (339

3. ताजमहल किसने और क्‍यों बनवाया था ? 4. अक्तूबर में ताजमहल को देखने के लिए पर्यटकों की अपार भीड़ क्यों होती है ? 5. ताजमहल देखकर हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

(ख) उचित शब्द लिखकर वाक्य पूरे कीजिए :

(मस्तक, यमुना, नैसर्गिक, काबुल, प्रेम)

4. मुग़लवंश................... से आए थे।

2. उत्थान और पतन इस जगतू का .......................... नियम है।

3. ताजमहल .............. :---»-« के तट पर स्थित है।

4. शाहजहाँ अपनी बेगम मुमताज़ महल से बहुत .................. करता था, 5. ताजमहल देखकर ईश्वर की महानता के सामने ................ झुक जाता है।

भाषा-बोध

(क) नीचे लिखे वाक्यों को ध्यान से पढ़िए :

यह किताब किसकी है ?

वह लड़का क्या कर रहा है ?

कोई आदमी खड़ा है।

क्या बात है?

इन वाक्यों में क्रमशः यह, वह, कोई और क्‍या सार्वनामिक विशेषण हैं। जब सार्वनामिक शब्द संज्ञा के स्थान पर अकेले आते है तब सर्वनाम होते हैं और जब ये शब्द संज्ञा शब्द के पहले आते हैं तब ये सार्वनामिक विशेषण' कहलाते हैं। इनको 'संकेतवाचक विशेषण' भी कहते हैं। सार्वनामिक विशेषण के भी चार भेद हैं : है

. निश्वयवाचक (वह लड़का, यह किताब, वे लोग)

2. अनिश्चयवाचक (कोई लड़की, कुछ बात, कई उपाय)

3. प्रश्वाचक (कौन आदमी, क्या बात) और

4. संबंधवाचक (जो लोग, जो व्यक्ति)

नीचे लिखे वाक्यों में से निश्वयवाचक, प्रश्ववाचक, अनिश्चयवाचक और संबंधवाचक सार्वनामिक विशेषण चुनकर अपनी कॉपी पर लिखिए और अपने शिक्षक को दिखाइए -

हमारी पोथी-5 (34)

वे लोग घर गए। जो लोग बाहर बैठे हैं, उन्हें बुलाओ। कौन लड़का बात कर रहा है ? कुछ उपाय करो | यह किताब मेरी है। कोई लड़का इधर आया। जो किताब तुम्हारी हो, ले लो। कौन-सा काम करोगे ? कोई काम भी कर लूँगा।

निम्नलिखित उदाहरणों के अनुसार क्रिया से विशेषण बनाइए :

टिकना £ टिकाऊ पढ़ना 5 पढ़ाकू

कमाना कि... 23४४४४ लड़ना, ५४६२६

बिकना ८5: ....-- पालना - ........ और काम :

अपने राज्य के किसी दर्शनीय स्थल को देखकर उसका वर्णन करते हुए अपने मित्र को एक पत्र लिखिए।

१0024

हमारी पोथी-5 (252

पाठ - 5 संकल्प अमन दौड़ते हुए अपने घर के अन्दर घुसा। उसके हाथ में अख़बार था। वह जल्दी-से- अपनी माँ को.वह ख़ुशख़बरी सुना देना चाहता था जो अख़बार में छपी थी। “बेटे, क्या हुआ ? इतनी तेज़ी से क्यों दौड़े रहे हो? '' “ैज़ल्ट गया माँ | आपकी दुआ से मैं पूरे राज्य में फ़र्स्ट आया हूँ।'' “जियो मेरे लाल, मुझे यही उम्मीद थी!” अमन की पीठ थपथपाते हुए उसकी

भाव-विभोर होकर कहा और वे दोनों अतीत में खो गए। मैट्रिक का फ़ॉर्म भरने से एक दिन पह बातें उन्हें एक-एक करके याद आने लगीं।

'उस दिन अमन बड़ी बेचैनी से अपनी माँ का इन्तिज़ार कर रहा था। माँ देर से आई। : चेहरा उतरा हुआ था।

उसे देखते ही अमन ने पूछा, ' पैसे मिले माँ ?''

“नहीं बेटे, फूटी कौड़ी भी नहीं मिली। मैं उन सबके यहाँ गई जहाँ पैसे मिलने की उम्मी किसी ने भी नहीं दिए।''

“चौधरी साहब ने भी नहीं ?

“नहीं, चौधरी साहब ने भी नहीं। मैंने उनसे बहुत विनती की। कहा कि मेरा बड़ पन्द्रह-बीस दिन पहले दिल्‍ली से मनीऑर्डर कर चुका है। डाक बाबू कहते हैं कि दो-चार दिनों ' जाएँगे। लेकिन चौधरी साहब ख़ुद ही अपना दुखड़ा सुनाने लगे। कहने लगे कि अबकी सुखाड़ में सब कुछ बह-दह गया | हम ख़ुद ही मुसीबत में हैं। तुम्हें पैसे कहाँ से दें ?

“अब क्या होगा, माँ? फ़ॉर्म नहीं भर फने के कारण परीक्षा में नहीं बैठ पाऊँगा, मैट्रिव नहीं कर सकूँगा। फिर तो चौधरी साहब के बेटे रफ़ीक़ चौधरी की बात सच हो जाएगी | रफ़ीक़ दोस्त से कह रहे थे कि अमन मैट्रिक पास नहीं कर सकेगा। पूरे गाँव में आज तक किसी ने मैट्रिब किया है क्या ? मैं ख़ुद तीन बार परीक्षा में बैठ चुका हूँ, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। तो अमः

हमारी पोथी-5 (269

पास कर लेगा? उसे तो ठीक से दो जून की रोटी भी नसीब नहीं होती। अमन अगर मैट्रिक पास 3१9

लेगा तो मैं अपनी हथेली पर बाल जमा दूँगा। मेरे लिए कुछ कीजिए माँ !

“कुछ कुछ तो ज़रूर करूँगी, बेटा। घबराओ नहीं; धीरज रुखो। मेरा बेटा पढ़ेगा,. पढ़- बकर बड़ा आदमी बनेगा, इंशा-अल्लाह !!' माँ ने अमन के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

माँ बहुत देर तक इस सोच में डूबी रही कि पैसे की व्यवस्था कैसे की जाए। अचानक उसके एग़ में एक विचार कौंधा और उसका चेहरा खिल उठा। वह घर के अन्दर गई और अपने टूटे-फूटे ने बक्से में कुछ खोचने लगी। खोजते-खोजते उसे एक छोटी-सी पोटली मिली | उसने उसे खोला। में उसकी शादी में मिले सोने के कुछ गहने थे। उन गहनों को निकालती हुई वह बोली, ' बड़ी-बड़ी ैबतें झेलीं, लेकिन मैंने इन गहनों को नहीं बेचा। मैं आज इन गहनों को गिरबी रखकर या बेचकर लाऊँगी। तेरा फ़ॉर्म भरवाऊँगी, तुझे पढ़ाऊँगी, लिखाऊँगी, बड़ा आदमी बनाऊँगी, इंशा तलाह | इल्म हासिल करना हर इनसान पर फ़र्ज़ है, बेटा !'' अमन अपनी माँ से लिपट गया। उसका दिल माँ की ममता का अनुपम अवलम्ब पाकर

प्रयाबी की ऊँची-से-ऊँची मंज़िल तक पहुँचने को मचल उठा। वह बोला, “आप बहुत महान हैं मैं आगे भी आपकी उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करता रहूँगा।

- मुहम्मद इलियास हुसैन च्दार्थ और टिप्पणी : व-विभोर होना - जज़्बात से मचल उठना, संकल्प पुख़्ता इरादा, दृढ़ निश्चय भावना से ओत-प्रोत होना अवलम्ब - सहारा तीत > बीता हुआ समय जून -< समय, बेला स्जि 5 सब्र हथेली पर बाल चुप - अनोखा, बेजोड़ उगाना < असंभव काम करना धा 5 चमका

हमारी पोथी-5 (279

अभ्यास (क) इन प्रश्नों के उत्तर लिखिए :

- अमन अपनी माँ को कौन-सी ख़ुशख़बरी सुनाना चाहता था ? . अमन बेचैनी से अपनी माँ का इन्तिज़ार क्‍यों कर रहा था ?

- अमन ने रफ़ीक़ चौधरी की बात को कैसे ग़लत साबित किया ? अमन की माँ ने फ़ीस का इन्तिज़ाम कैसे किया ?

- अमन अपनी माँ की उम्मीदों पर कैसे खरा उतरा ?

. अमन ने क्या संकल्प किया?

(ख) ख़ाली जगहों को उचित शब्दों से भरिए : - (उम्मीदों, फूटी कौड़ी, अतीत, बेचकर, बाढ़-सुखाड़)

को ५0 #े ७४ >> -+--

6 वे दोनो 648. % कह 79:2 में खो गए।

2. नहीं बेटे, .............. भी नहीं मिली।

3. अबकी ............... में सब कुछ बह-दह गया

4. मैं आज इन गहनों को गिरवी रखकर या ........... :. पैसे लाऊँगी।

5. मैं आगे भी आपकी ........... पर खरा उतरने की कोशिश करता रहूँगा। भाषा-बोध

(क) नीचे दिए गए मुहावरों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए : दुखड़ा सुनाना, चेहरा उतरना, दो जून की रोटी नसीब होना,

हथेली पर बाल जमाना, चेहरा खिल उठना, उम्मीदों पर खरा उतरना।

हमारी पोथी-5

:) नीचे लिखे वाकक्‍्यों को ध्यान से पढ़िए :

सीमा बड़ी चतुर है।

बहुत छोटा कमरा नहीं चाहिए।

समस्या अत्यन्त गंभीर है।

देखा तुमने, कितने सुन्दर फूल हैं !

इतने कम पर गुज़ारा नहीं होगा।

इन वाक्यों में 'बड़ी', 'बहुत', 'अत्यन्त', कितने" और इतने” प्रविशेषण हैं, जो क्रमशः [एं, छोटा', गंभीर, सुन्दर और “कर्म शब्दों की विशेषता बता रहे हैं जो स्वयं विशेषण हैं। विशेषण जो संज्ञा की बजाय विशेषण की विशेषता बताएँ प्रविशेषण कहलाते हैं। प्रविशेषण गन्‍्यत: विशेषण के गुणों में वृद्धि करते हैं। बहुत, अत्यन्त, अति, बड़ा, अतीव, घोर, बेहद, महा दि शब्द प्रविशेषण के रूप में प्रयुक्त होते हैं।

आप भी प्रविशेषणवाले पाँच वाक्य अपनी कॉपी में लिखकर अपने शिक्षक को दिखलाइए।

$ और काम इल्म के महत्त्व पर दो हदीसें अपने शिक्षक या अभिभावक से पूछकर अपनी कॉपी में लिखिए।

१0 2624

हमारी पोथी-5 (29 2

पाठ - 6

जाँच-पड़ताल_

हाथों से दो काम किए, एक अच्छा और एक बुरा , पैरों से दो .मार्ग चले, एक अच्छा और एकबुरा, यह भी जाँचा जाएगा, वह भी परखा जाएगा। अपने-अपने कर्मों का हर मुष्य फल प्राएगाँ॥ क्या-क्या देखीं आँखों से चीज़ें, अच्छी और बुरी , और सुनी क्‍या कानों से बातें, अच्छी और बुरी,

जो कुछ देखा और सुना, देखा-भाला जाएगा। अपने-अपने कर्मों का हर मनुष्य फल पाएगां॥

किसी से सदूव्यवहार किया, दिया किसी को धोखा भी , दुष्टें का भी साथ दिया, बुरे काम 'से रोका भी,

यह और वह हर एक क्रदम, नापा-तौला जाएगा। अपने-अपने कर्मों का हर मनुष्य फल पाएगा॥

भोजन क्‍या स्वादिष्ट किए, खाया रूखा-फीका भी, रेशम-मख़मल भी पहने, पहना खादी-गाढ़ा भी,

एक समय खाया-पिया, माइल आगे आएगा। अपने-अपने: कर्मों का. हर मनुष्य फल पाएगा॥

-- माइल ख़ैराबाद

हमारी पोथी-5 (3३०

रथ और टिप्पणी रखना < जाँचना सद्व्यवहार < अच्छा बरताव

रुचिकर, मज़ेदार, ज़ाइक्रेदार

ष्ट - बुरा, परेशान करनेवाला स्वादिष्ट अभ्यास

उत्तर लिखिए;

. हाथों और पैरों से लोग कैसे-कैसे काम लेते हैं ?

2. हमारे किन-किन कार्यों की जाँच-पड़ताल होगी ?

3, कवि इस कविता के द्वारा कौन-सी बात दिल में बिठाना चाहता है ? 4. न्याय-दिवस की पकड़ से बचने के लिए हमें क्या करना चाहिए ?

“बोध

मीचे लिखे वाक्‍्यों को ध्यान से पढ़िए :

मेरा कमरा आपके कमरे से छोटा है।

मेरा कमरा आपके कमरे की अपेक्षा छोटा है।

यह कमरा उस कमरे की तुलना में अच्छा है।

मेरा कमरा इन सब कमरों के मुक़ाबले में बड़ा है।

इन वाक्यों में दो या दो से अधिक विशेष्यों के गुणों की तुलना की गई है। इसे विशेषणों की एबस्था कहते हैं। दो या दो से अधिक विशेष्यों की तुलना करने के लिए सामान्यतः से' का किया जाता है, परन्तु कभी-कभी “की अपेक्षा' “की तुलना में', के मुक़ाबले में' “तर और

(जैसे, उच्च-उच्चतर-उच्चतम, निम्न-निम्नतर-निम्नतम) का प्रयोग किया जाता है। यहाँ इस

को ध्यान में रखना ज़रूरी है कि 'तरां और तम' का प्रयोग केवल तत्सम (संस्कृत) शर्ब्दों के ही किया जाता है। प्‌

-विशेषणों की तुलनावस्था' को दिखानेवाले पाँच वाक्य अपनी कॉपी में लिखकर अपगे को दिखाइए |

हट अर ;र

हमारी पोथी-5 (39

पाठ - 7

अनमोल मोती

स्वर्ग माँ के पैरों तले है।

निरक्षर से निर्धन अच्छा, वित्त से बुद्धि भली।

अज्ञानी से बढ़कर कोई कंगाल नहीं।

ज्ञान से बढ़कर कोई सम्पत्ति नहीं।

विद्योपार्जन प्रत्येक मुस्लिम नर-नारी का कर्त्तव्य है।

जो तुम्हें रचिकर लगे, वही दूसरों के लिए रुचिकर समझो।

पेट सारे रोगों का घर है। परहेज़ वास्तविक उपचार है।

सच बोलो, चाहे अपनी ही हानि हो जाए।

बड़ों का सत्कार तथा छोटों से प्यार करो, जो ऐसा करे वह हममें से नहीं।. 0.. पीड़ित के श्राप से बचो।

. कुकर्म से बचना ही महापुण्य है।

2. क्षमा कर दिया करो, तुम्हें अल्लाह क्षमा करेगा।

3. सबसे अधिक पाप उस व्यक्ति के कर्मपत्र में होंगे जो बहुत अधिक बातें करता है। ]4. दया किया करो, तुमपर अल्लाह दया करेगा।

5. नेकी पर उभारना स्वयं नेकी करना है, बदी पर उकसाना स्वयं बदी करना है।

वो, जय हो; आशा # - पक फऊे परत

ये हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि सल्‍लम) की प्यारी बातें हैं। आप (सल्ल.) अल्लाह ने हमारे मार्गदर्शन के लिए नबी बनाकर भेजा! आप (सल्ल. ) ने हमें अल्लाह की बताई, स्वयं उसके आदेशों पर चलकर दिखाया। आपने जो कुछ कहा, जिस काम से रोका, जिस की आज्ञा दी, उन सबको आप (सल्ल.) के प्यारे साथियों मे याद कर लिया। यही स्मृतियाँ “हर कहलाती हैं। ये हमारे लिए बहुत महत्त्व रखती हैं। नीचे लिखी कुछ और हदीसें याद कर लो।

प्यारे नबी (सल्ल.) ने फ़रमाया, ' मेरें रब ने मुझे नौ बातों का आदेश दिया है -

. . खुले-छिपे हर हाल में अल्लाह से डरता रहूँ। 2... सुख हो अथवा दुख, प्रत्येक अवस्था में न्याय की बात कहूँ। 3. भले दिन हों या बुरे, किसी दशा में सीमा का उल्लंघन करूँ।

हमारी पोथी-5 (329

के

0 ०० +3 ०७

जो मुझसे कटे, मैं उससे जुड़ूँ।

जो मुझे दे, मैं उसे दूँ।

जो मुझपर अत्याचार करे, मैं उसे क्षमा कर दूँ।

चुप बैठूँ तो कुछ सोच-विचार किया करूँ।

बात करूँ तो अल्लाह की बात करूँ।

कुछ देखूँ तो उससे केवल शिक्षा लूँ और भलाई का आदेश दूँ।

देखा तुमने, कितने अच्छे आदेश हैं !

दार्थ और टिप्पणी

" प्रह

निरक्ष.. 5 अनपढ़ वित्त धन, मुद्रा स्मृतियाँ . 5 यादकी हुई चीज़ें विद्योपार्ज < इल्म हासिल करना रुचिकक + पसन्दीदा उपचार -5 इलाज

श्राप

-< बददुआ अवस्था >>. दशा

महापुण्य - बड़ा सवाब

अभ्यास

) उत्तर दीजिए

॥|

0 0 न्‍नय एप + (०७

स्वर्ग किसके पैरों तले है ?

सबसे बड़ी सम्पत्ति कौन-सी है ?

प्रत्येक मुस्लिम नर-नारी का क्या कर्तव्य है ? महापुण्य क्या है ?

अल्लाह हम पर कब दया करेगा ?

हदीस किसे कहते हैं ?

पेट के रोगों का वास्तविक उपचार क्‍या है ? नेकी पर उभारना कैसा है ?

इस पाठ से हमें क्या शिक्षा मिलती है?

हमारी पोथी-5 (339

(ख) ख़ाली जगहों को भरिए :

3. अज्ञानी से बढ़कर कोई ................... नहीं। 9... कटनी 0, मं जत से बढ़कर कोई सम्पत्ति नहीं। 3. सच बोलो, चाहे अपनी ही 4... दया किया करो, तुमपर ............ 55. 072 हर हाल में अल्लाह से डरता रहूँ। 6. जो मुझसे कटे, मैं उससे ...................... भाषा-बोध (क) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़िए : स्वर्ग माँ के पैरों तले है। ज्ञान से बढ़कर कोई सम्पत्ति नहीं। पीड़ित के श्राप से बचो। परहेज़ वास्तविक उपचार है।

, उपर्युक्त वाक्यों के अन्त में एक चिह्न (।) लगाया गया है। इस चिह्न को 'पूर्णविराम' हैं। सामान्य कथनवाले सभी प्रकार के वाक्यों के अन्त में पूर्णविराम का प्रयोग किया जाता है। वि का शान्दिक अर्थ है - ठहराव। के

नीचे लिखे वाक्यों में पूर्णविराम लगाइए ;

मैं घर जाऊँगा वह मेरा भाई है उसका नाम अनवर है बह पाँचवीं कक्षा में पढ़ता है शीला सुशील लड़की है वह पढ़ती रहती है वह अपनी कक्षा में प्रथम आती है

(ख) दिए गए उदाहरण के अनुसार संज्ञा से विशेषण बनाइए :

कृपा 5 कृपालु परिवार - पारिवारिक 327 आम शरीर ०0 : 4220 22 :6 दयी। * (० 5४. 77रम०+ समाज 5८ ........« कुछ और काम प्रस्तुत पाठ की हदीसों को याद करके उनपर अमल कीजिए। १8824

हमारी पोथी-5

पाठ - 8

दो बैलों की कथा

झूरी के पास दो बैल थे - हीरा और मोती दोनों में बहुत प्यार था। वे नाँद में. एक साथ मुँह वते और एक ही साथ हटाते। झूरी उनके चारे-पानी का बहुत ध्यान रखता था। वह कभी भूलकर उन्हें मारता-पीटता नहीं था। पशु भी प्यार का भूखा होता है। वे भी झूरी को बहुत चाहते थे।

झूरी की पत्नी का भाई “गया' एक बार हीरा और मोती को कुछ दिन के लिए अपने गाँव ले ) लगा। बैलों को बड़ा आश्चर्य हुआ कि वह उन्हें क्यों और कहाँ लिए जा रहा है। रास्ते में उन्होंने बहुत दंग किया। मोती बाएँ भागता, हीरा दाएँ। इस पर गया ने उन्हें बहुत पीटा। घर पहुँचकर उसने के सामने रूखा-सूखा भूसा डाल दिया। लेकिन उन्होंने उसे सूँघा तक नहीं।

रात होने पर दोनों बैलों ने वहाँ से भाग जाने का निश्चय किया। उन्होंने ज़ोर लगाकर रस्सियाँ डुडालीं और भाग निकले | सुबह होने पर जब झूरी मे उन्हें थान पर खड़े देखा तो वह सब कुछ समझ

हमारी. पोथी-5 (352

गया और प्यार से उनपर हाथ फेरने लगा। परन्तु झूरी की पत्नी उन्हें देखकर जल-भुन गई। उसने उन सामने रूखा-सूखा भूसा डाल दिया, फिर भी वे ख़ुश थे।

अगले दिन गया फिर आया। इस बार वह उन्हें गाड़ी में जोतकर ले चला। रास्ते में मोती चाहा कि गाड़ी गड्ढे में धकेल दे। मगर हीरा समझदार था। उसने.गाड़ी संभाल ली। जैसे-तैसे गया * पहुँचा।

अब गया ने उनसे बड़ा सख़्त काम लेना शुरू किया। वह उन्हें दिनभर हल में जोतत जब-तब उन्हें मारता-पींटता | शाम को घर लाकर मोटे-मोटे रस्सों से बाँधकर उनके सामने रूखा-सूर भूसा डाल देता। वे लाचार निगाहों से एक-दूसरे को देखते रहते!

गया के घर में एक छोटी-सी लड़की रहती थी। बह बैलों की दुर्दशा देखती तो उसे बु लगता। वह रात को चुपके से. उन्हें रोटी खिलाती। दोनों बैल उसके प्यार के सामने अपनी मार अं अपमान भूल जाते। एक दिन मोती रस्से को चबाकर तोड़ने की कोशिश कर रहा था, वह लड़की और उसने दोनों बैलों को खोल दिया। दोनों वहाँ से भाग निकले। थोड़ी देर बाद जब “गया' को पः चला तो वह भी उनके पीछे दौड़ा, लेकिन उन्हें पकड़ सका।

अब हीरा और मोती आज़ाद थे। रास्ते में उन्हें एक साँड मिला। वह उनकी ओर लपका हीरा-मोती के होश उड़ गए। भागना बेकार था इसलिए दोनों ने साहस से काम लिया। साँड़ ने आव हीरा पर वार किया तो मोती ने उसपर पीछे से सींगों से चोट की साँड़ घबराया। मिलकर काम करने ' बल है। दोनों ने मिलकर साँड़ को भगा दिया। मोती कुछ दूर उसके पीछे दौड़ा, मगर हीरा ने उसे तक जाने दिया।

दोनों अब बड़े प्रसन्‍न थे। आगे चले तो रास्ते में मटर का खेत दिखाई दिया। भूख तो लग रही थी। हरे-हरे मटर देखकर उनकी भूख और भी तेज़ हो गई। वे खेत में घुस गए और लगे मटर खाने अभी पेट भरा भी था कि खेत के रखवालों ने उन्हें देख लिया। उन्होंने उन दोनों को चारों ओर + घेरकर पकड़ लिया और कांजीहाउस में बंद करवा दिया। हीरा और मोती ने देखा कि कांजीहाउस : और भी कई जानवर थे - भैंसें, घोड़े, घोड़ियाँ, गधे - सब के सब कमज़ोर और दुबले-पतले। वह किसी के लिए चारे का प्रबंध था पानी का। यहाँ कहाँ फँसे ?' उन्होंने सोचा।

रात हुई। मोती ने हीरा से कहा कि अगर दीवार तोड़ दी जाए तो बाहर निकला जा सकता है मोती ने सींगों से दीवार गिराने का प्रयत्न किया। दो-चांर चोटों में ही थोड़ी-सी दीवार गिंर गई। उत्सा बढ़ा तो उसने और ज़ोर से चोटें लगानी शुरू कीं।

हमारी पोधी-5 (362

दीवार में रास्ता बनते ही पहले तो घोड़ियाँ भागी, फिर भैंसें और बकरियाँ। मोती भे गधों को * सींग मार-मारकर भगा दिया। उसने हीरा से भी भाग चलने को कहा, लेकिन हीरा ने मना कर या। -

सुबह होने पर कांजीहाउसवालों ने देखा तो उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने हीरा और मोती नीलाम कर दिया। नीलामी में सबसे ऊँची बोली बोलकर एक व्यापारी ने उन्हें ख़रीद लिया। वह नों को लेकर अपने गाँव की ओर चला। मार खाते-खाते और भूख सहते-सहते हीरा-मोती बहुत मज़ोर हो गए थे। उनकी हड्डियाँ निकल आई थीं। भूख-प्यास से व्याकुल बैलों में कुछ भी दम क़ी नहीं रहा था। वे चुपचाप व्यापारी के साथ चलने लगे। रास्ता उन्हें जाना-पहचाना लगा तो ने कहाँ से दम गया। वे दोनों तेज़ी से भागे। आगे-आगे दोनों बैल, पीछे-पीछे व्यापारी | मगर प्र तक वह उन्हें पकड़े, तब तक दोनों बैल अपने घर पहुँच चुके थे।

बैलों को देखकर झूरी को बड़ी ख़ुशी हुई। वह उनसे लिपट गया। इतने में व्यापारी भी वहाँ ँचा और उन्हें माँगने लगा। मोती ने आव देखा ताव, व्यापारी पर झपटा। व्यापारी जान बचाकर हूँ से भागा। झूरी की पत्नी भी भीतर से दौड़ी-दौड़ी आई। उसने दोनों बैलों के माथे चूम लिए।

- प्रेमचन्द ब्दार्थ और टिप्पणी : नाँद - पशुओं को चारा डालने का लकड़ी, सीमेंट तथा कंकड़ या लोहे का बना बड़ा टब आश्चर्य -< . ताज्जुब, हैरत दुर्दशा -< बुरी हालत थान -< .. पशुओं को बाँधने का स्थान कांजीहाउस 5 जहाँ लावारिस पशुओं को पकड़कर रखा जाता है नीलाम करना बोली लगाकर बेचना व्याकुल -.. बेचैन दम -. जान

हमारी पोथी-5 (379

अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए :

. झूरी की पत्नी के भाई का क्या नाम था ?

2. झूरी के दोनों बैलों के क्या नाम थे ?

3. मिलकर काम करने से क्या होता है ?

4. कांजीहाउसवालों ने हीरा और मोती के साथ क्या बर्ताव किया ? 5. इस कहानी के लेखक का नाम लिखिए ?

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाकक्‍्यों में लिखिए :

]. हीरा और मोती गया के घर में क्यों नहीं रहना चाहते थे ?

2. दोनों बैलों ने साँड़ को कैसे भगा दिया ?

3. हीरा और मोती के स्वभाव में क्या अन्तर था ?

4. हीरा और मोती अपने मालिक के घर किस तरह वापस आए ? 5. बैलों को देखकर झूरी और उसकी पत्नी ने क्या किया ?

(ग) ख़ाली जगहों को भरिए :

(प्यार, झूरी, चारे-पानी, कहाँ, मिलकर) 3. झूरी उनके

भाषा-बोध (क) इन मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

होश उड़ जाना, साहस से काम लेना, आव देखा ताव, जान बचाकर भाग जाना

हमारी पोथी-5

ब) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़िए :

झूरी हल चलाता है। बैल वहाँसे भाग आए। ., मोती ने दीवार तोड़ दी। झूरी बैलों से लिपट गया। , ऊपर प्रत्येक वाक्य में कोई काम करनेवाला है। काम करनेवाला कर्ता कहलाता है। इस 7नी को पढ़िए और दस कर्ता शब्द ढूँढकर लिखिए। ।) दिए गए उदाहरण के अनुसार प्रत्येक शब्द के सामने नए शब्द लिखिए : . उदाहरण: अपना - अपनत्व दुबला -दुबलापन अपना - लड़का - बच्चा - पीली ४०००९ सूरग गीला ४-5 ८४०७४ ४३२६

और काम “जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए।' इस संबंध में एक हदीस अपने शिक्षक या भिभावक से पूछकर लिखिए और उसे अपनी कक्षा में सुनाइए |

है 2024

हमारी पोथी-5

पाठ - 9 * पुस्तक मँगवाने के लिए प्रकाशक के नाम पत्र

मर्कज़ी दर्सगाह इस्लामी, राम ॥॒ दिनांक : 0 मार्च, 20 सेवा में, श्रीयुत्‌ व्यवस्थापक महोदय, | मर्कज़ी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स, नई दिल्‍ली-25

विषय : वी.पी.पी द्वारा पुस्तक मँगवाने हेतु; महोदय, अस्सलामु-अलैकुम |

मुझे अभी-अभी आपके प्रकाशन का वृहत्‌ सूचीपत्र प्राप्त हुआ। यह जानकर अत्यन्त प्रसन्‍न हुई कि आप के यहाँ से उर्दू, हिन्दी और अंग्रेज़ी में पाठ्यपुस्तकों के अतिरिक्त और भी बहुत- ज्ञानवर्द्धछ और रोचक पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं। मैं निम्नलिखित पुस्तकें मँगाना चाहता हूँ -

. सच्चा दीन, भाग-] (हिन्दी) अफ़ज़ल हुसैन ] प्रति 2. ज़बान की हिफ़ाज़त (हिन्दी) बिन्तुल इस्लाम. 2 प्रतियाँ 3. बिसमिल्लाह की बरकत (हिन्दी) . माइल ख़ैराबादी 4 प्रतियाँ

कृपया उपर्युक्त पुस्तकें वी. पी. पी. (मूल्यदायिका) द्वारा यथाशीघ्र नीचे लिखे पते ' भिजवाने का वष्ट करें| इंशा अल्लाह, मैं उसे तुरन्त छुड़ा लूँगा।

धन्यवाद ! प्रतिष्ठार्थ, भवदीय, श्रीयुत व्यवस्थापक महोदय जमील अख़्तर इलियासी मर्कज़ी मक्तबा इस्लामी पब्लिशर्स, वर्ग-पाँच डी-307, दावत नगर, अबुल फ़ज़्ल इंक्लेव, मर्कज़ी दर्सगाह इस्लामी, दोमहला रोड, ' जामिआ नगर, नई दिल्‍ली-0025 रामपुर, (यू. पी.) पिन कोड - 24490]

हमारी पोधी-5 (409

देश : विषय-शिक्षक छात्र-छात्राओं को विभिन्‍न प्रकार के पत्र लिखवाने का ख़ूब अभ्यास करवाएँ और उन्हें संबोधन-शब्द (प्रिय मित्र, आदरणीय पिताजी, आदरणीय माताजी इत्यादि), अभिवादन- शब्द (अस्सलामु-अलैकुम, आदाब वगैरह); पत्र का विषय, पत्र की समाप्ति, पानेवाले का पता इत्यादि के बारे में बताएँ।

अभ्यास

. फ़ीस माफ़ करवाने के लिए अपने विद्यालय के प्रधानाध्यापक के नाम एक आवेदनपत्र लिखिए।

2. अपनी अस्वस्थता के कारण तीन दिन की छुट्टी के लिए अपने स्कूल की ग्रधानाध्यापिका को एक आवेदनपत्र लिखिए।

और काम

. अपने स्कूल के पुस्तकालय से एक पत्र-संग्रह हासिल कीजिए और उसे पढ़िए।

१0:02

हमारी पोथी-5

पाठ- 0

बाल-कामना

है ईश्वर! हे दयानिधान! मैं बालक निर्बल अज्ञान। बल-विद्या कीजे प्रदान॥

तेरा शुभ सुन्दर सन्देश, नगर-नगर अरु देश-विदेश। स्वामी ! सहकर कष्ट-क्लेश, फैलाना है लक्ष्य महान॥, मैं बालक निर्बल अज्ञान। बल-विद्या कीजे प्रदान शूद्र, ब्राह्मण, मुग़ल, पठान; क्षीण, बली, निर्धन, धनवान। सब हैं आदम की सन्‍्तान, सबको समझूँ एक समान॥

में बालक निर्बल अज्ञाना| बल-विद्या कीजे प्रदान॥

हमारी पोथी-5 (429

सत्कर्मों का हो संचार, मिटे जगत्‌ से अत्याचार। सारे रोगों का उपचार, ईश्वस्वाद चढ़े परवान

मैं बालक निर्बल अज्ञान। बल-विद्या कीजे प्रदान ॥।

- संकलित

ब्दार्थ और टिप्पणी

दयानिधान_ 5 दयालु निर्बल 5 शक्तिहीन, कमज़ोर

सन्देश - पैग़ाम विद्या 5८ इल्म

शुभ 5 पाक, अच्छा अरु और

कष्ट - तकलीफ़, पीड़ा क्लेश दुख, क्रोध

लक्ष्य मक़सद, उद्देश.. शूद्र - नीच, हीन

क्षीण < कमज़ोर, दुर्बल. सत्कर्म + अच्छे काम, नेक काम

संचार - फैलाव जगत्‌. 5 दुनिया

अभ्यास

त्तर लिखिए :

क) ।. बालक ईश-सन्देश कहाँ-कहाँ फैलाना चाहता है ? 2. बालक अपने आपको कैसा पाता है ? 3. सरे रोगों का उपचार क्‍या है ? 4. ईश्वर का व्यक्तिवाचक नाम तो केवल एक है - अल्लाह, परन्तु अपने गुणों के कारण उसे बहुत-से नामों से पुकारा जाता है। आप उसके कौन-कौन से नाम जानते हैं ? लिखिए। 5. इस कविता में बालक की कामना क्या है ?

ख) वाक्य पूरे कीजिए :

हमारी पोथी-5 (439

भाषां-बोध

(ग) पढ़िए, समझिए और लिखिए :

देश-विदेश कष्ट-क्लेश माता-पिता घर-आँगन गाँव-शहर

देश और विदेश कष्ट और क्लेश माता और पिता घर और आँगन गाँव और शहर

यहाँ देश-विदेश, कष्ट-क्लेश, माता-पिता, घर-आँगन, गाँव-शहर की जगह क्रमश: हे और विदेश, कष्ट और क्लेश और माता और पिता, घर और आँगन, गाँव और शहर लिखा गया है।

इन शब्दों के बीच योजक-चिहन (-) का प्रयोग, जिसके बारे में आप पढ़ चुके हैं, किया है। योजक का अर्थ होता है जोड़नेवाला। इस चिहन का प्रयोग सामासिक पदों या पुनरुक्त और यु

शब्दों के बीच किया जाता है।

उपर्युक्त उदाहरणों के आधार पर पाँच शब्द-युग्म लिखकर अपने शिक्षक को -दिखाइए। (संकेत - सुख-दुख, यश-अपयश, जीवन-मरण, हानि-लाभ, भाई-बहन)

हट फट अर

हमारी पोथी-5 (449

पाठ >-१|

बीबी फ़ातिमा ज़हरा (रज़ियल्लाहु अन्हा)

बीबी फ़ातिमा (रज़ि.) प्यारे नबी (सल्ल.) की सबसे छोटी और चहेती सुपुत्री थीं। आपका नाम फ़ातिमा ज़हरा था। आपकी माता का नाम हज़रत ख़दीजा (रज़ि.) था। आपका जन्म आपके हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) की नुबूवत (ईशदूतत्त्व) से लगभग पाँच वर्ष पहले हुआ था। उस समय के लोग काबा का नवनिर्माण कर रहे थे।

प्यारे रसूल (सल्ल.) को नन्‍्ही फ़ातिमा से बहुत प्यार था| जब आप (सल्ल.) घर आते तो ब्राज़े पर आकर सलाम करते। आपकी आवाज़ सुनते ही फ़ातिमा दौड़कर आती और आपकी उँगली डुकर आपको अन्दर ले जातीं। आप नन्‍्ही फ़ातिमा को अच्छी-अच्छी बातें सिखाते। फ़ातिमा भी ने माता-पिता से बड़े अनोखे प्रश्न करती थीं, जिससे छोटी बच्ची की प्रतिभा और बुद्धिमत्ता का त्री-भाँति अंदाज़ा किया जा सकता है। एक बार उन्होंने अपनी अम्मी जान से पूछा, ' अम्मी जान! प्त अल्लाह ने हर चीज़ को पैदा किया है, क्या उसे हम देख सकते हैं ?

अम्मी जान ने समझाया, “बेटी ! अगर हम किसी को अल्लाह का साझी बनाएँ, केवल की इबादत करें और उसके बन्दों पर दया करें तो क्रियामत के दिन हम अल्लाह के दर्शन करेंगे।''

कभी-कभी अम्मी जान पूछतीं, “आज तुमने अब्बू जान से क्या-क्या सीखा ?'' नन्‍ही तिमा तुरन्त सब कुछ बता देती घर में माता-पिता की बातचीत को ध्यानपूर्वक सुन्ती और (-तरीक़ों को गौर से देखती रहती और स्वयं भी उसी को अपनाने की कोशिश करती। जो बात एक ( सुन लेतीं कभी भूलर्ती।

बीबी फ़ातिमा बचपन से ही शान्त स्वभाव की और एकांतप्रिय थीं। बचपन में भी घर से क़लना आपको पसन्द था। दिखावे की बातों से आपको नफ़रत थी। एक बार किसी के विवाह में म्मेलित होने के लिए अम्मी जान ने अच्छे कपड़े और गहने दिए, लेकिन आपने पहनने से इनकार दिया और साधारण कपड़े ही पहनकर गईं।

जब आपके पिता हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) को अल्लाह ने रसूल (ईशदूत) बनाया तो उनपर धर्मियों द्वारा तरह-तरह के अत्याचार किए जाने लगे। इससे आप बहुत दुःखी होतीं और आपकी , खों से आँसू छलक पड़ते। प्यारे रसूल (सलल.) आपको ढाढ़स बँधाते।

हमारी पोथी-5

एक बार प्यारे नबी (सल्ल.) काबा में नमाज़ पढ़ रहे थे। जब आप सजदे में गए, दुष्टें ने : की ओझड़ी आपकी गरदन पर डाल दी। उसके बोझ से नबी (सल्ल.) दब गए। दुष्ट और शरारती देख-देखकर ठहाके मारने लगे। किंसी ने घर पर सूचना दी, तो फ़ातिमा दौड़ी-दौड़ी आईं और मुश्किल से अब्बू जान के ऊपर से ओझड़ी हटाती हुई बोलीं, “दुष्टो | अल्लाह तुम्हें सज़ा देगा।''

हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) लगभग बीस वर्ष की अवस्था में हज़रत अली (रज्ि.) इब्ने-अ तालिब के साथ आपका विवाह सन्‌ 2 हिजरी में हुआ। दाम्पत्य जीवन प्रेमपूर्वक बीता | बीबी फ़ाति (रज़ि.) के पाँच बच्चे हुए, जिनमें तीन पुत्र-हज़रत हसन (रज़ि.), हज़रत हुसैन (रज़ि.) और हज़ मुहसिन (रज़ि.) थे और दो बेटियाँ-हज़रत ज़ैनब (रज़ि.) और हज़रत उम्मे-कुलसूम (रज़ि.) हज़रत मुहसिन की बचपन ही में मृत्यु हो गई थी। हज़रत ज़ैनब (रज़ि.) की शादी हज़रत अब्दुल्ल बिन जाफ़र इब्ने-अबी तालिब से हुई और हज़रत उम्मे-कुलसूम (रज़ि.) की शादी हज़रत उमर फ़ारू से हुई थी। मगर हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) की नस्ल सिर्फ़ हज़रत हसन (रज़ि.) और हज़रत हर (रज़ि.) के द्वारा दुनिया में बाक़ी रही।

हज़रत फ़ातिमा ज़हरा बड़ी मेहनती थीं। घर के काम-काज में किसी से सहायता लेती चक्की पीसते-पीसते हाथों में गट्टे पड़ गए थे। इसी प्रकार पानी की मश्क उठाते-उठाते कन्धे और स॑ पर निशान पड़ गए थे। हर समय काम-काज में व्यस्त रहने से कपड़े मैले हो जाते थे। फिर भी वे कहा करतीं, “मैं अल्लाह और उसके रसूल से इस हाल में राज़ी और संतुष्ट हूँ।”' राज़ी होने के . विशिष्ट गुण के कारण लोग उनको 'रज़िया' कहते थे।

एक बार हज़रत अली (रज़ि.) ने हज़रत फ़ातिमा के बारे में कहा कि वे जन्नत का सुगंध फूल थीं जिसके मुरझा जाने के बाद भी उसकी ख़ुशबू अब तक वातावरण में बसी हुई है। इसी हि आपको “अज़-ज़हरा' (ताज़ा फूल) कहा जाता है।

एक बार आप बीमार पड़ गईं। प्यारे रसूल (सल्‍ल.) देखने आए तो बोलीं, “दर्द से बेचैन और भूख से निढाल | घर में खाने को कुछ भी नहीं है।'' *

प्यारे रसूल (सल्ल.) ने फ़रमाया, “बेटी ! दुनिया की कठिनाई से घबराओ, तुम जन्नत महिलाओं की सरदार हो |”

हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) ने अपनी संतान का पालन-पोषण और शिक्षा-दीक्षा बड़ी सूझ-ब एवं अत्यन्त प्रेम से की। एक बार आपकी बेटी हज़रत ज़ैनब (रज़ि.) कुरआन का पाठ कर रही थ्थ अनजाने में उनकी ओढ़नी सिर से गिर गई। प्यारी अम्मी जान ने तुरन्त ओढ़नी सिर पर डाल दी अं कहा, बेटी! अल्लाह की किताब का पाठ नंगे सिर नहीं करते ।”'

हमारी पोधी-5 (462

एक बार हज़रत हुसैन (रज़ि.) और हज़रत ज़ैनब (रज़ि.) में झगड़ा हो गया। प्यारी अम्मी जान दोनों बच्चों को कुरआन की आयतें पढ़कर सुनाई और फ़रमाया, "बच्चो! अल्लाह तआला ड़ाई-झगड़े से नाराज़-हो जाता है।'' उसके बाद बच्चे फिर कभी नहीं लड़े।

हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) अल्लाह की याद और इबादत में हर समय लीन रहतीं। खाना बनाते यय और चक्की पीसते हुए या तो क्ुरुआन की आयतें पढ़ती रहतीं या अल्लाह का ज़िक्र करती तीं। कभी पूरी-पूरी रात इबादत में बिता देतीं। घर का काम-काज करते हुए भी वे अल्लाह की ज्वी बन्दी बनकर रहीं। इसी लिए आपको “बतूलं॑' (दुनिया से कटकर ईशप्रेम में एकाग्रचित मेबाली) भी कहा जाता है।

हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) अत्यन्त दानशील और त्यागप्रिय थीं। हज़रत हसन (रज़ि.) कहते हैं 5 एक बार हमें एक वक़्त के फ़ाक़े के बाद खाना मिला। अब्बू जान, मैं और हुसैन खाना खा चुके अम्मी जान ने रोटी हाथ में ली ही थी कि एक भूखे व्यक्ति ने आवाज़ लगाई, ' रसूल की पुत्री ! दो वक़्त से भूखा हूँ, मेरा पेट भर दो।'' अम्मी जान ने मुझसे कहा, "खाना इस (भूखे) को दे दो। जे तो एक ही वक़्त का फ़ाक़ा है, जब कि इस व्यक्ति को दो वक़्त से खाना नहीं मिला है।

एक बार प्यारे रसूल (सल्ल.) ने पूछा, “बेटी ! स्त्रियों का सबसे उत्तम गुण कौन-सा है ? 7प बोलीं, “स्त्रियों का सबसे उत्तम गुण यह है कि वह किसी गैर मर्द को देखे और रर मर्द उसे १)

प्यारे रसूल (सल्ल.) का स्वर्गवास होने से आपको अत्यंत आघात पहुँचा। आप हर समय 'ैकाकुल और दुखी रहने लगीं। अपने पिता के दुनिया से जाने के बाद आप केवल छह माह जीवित है। इस बीच किसी मे आपको हँसते हुए नहीं देखा। आप नारी के सभी उत्तम गुणों से विभूषित थीं।

आपकां देहान्त 3 रमज़ान सन्‌ ] हिजरी में मंगलवार की रात को हो गया।

“अल्लाह आपसे प्रसन्‍न हो !'

- सलीम अहमद सिद्दीक़ी ब्दार्थ और टिप्पणी हे बुद्धिमत्ता < अक़्लमन्दी, होशियारी, प्रतिभा परिश्रमी < मेहनती सूचना ख़बर व्यस्त - मसरूफ़ संतुष्ट - मुतमइन लीन. 5 मम्न, डूबा हुआ

हमारी पोथी-5 (479

शिक्षा-दीक्षा < तालीम तरबियत नव निर्माण < नई तामीर दर्शन करना < देखना, मुलाक़ात करना स्वयं - ख़ुद एकान्तप्रिय < तनहाईपसन्द सुगंधित - ख़ुशबूबवाला फ़ाक़ा - अनाहार, भूखे रहना शोकाकुल < दुखी, शोक से व्याकुर विभूषित - अलंकृत, शोभित अभ्यास (क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए : . बीबी फ़ातिमा ज़हरा (रज़ि. ) कौन थीं ?

2. “क्या हम अल्लाह को देख सकते हैं ?”' नन्‍ही फ़ातिमा के इंस सवाल का उनकी अम

जान ने क्या जवाब दिया ? 3. हज़रत फ़ातिमा (रज्रि.) का विवाह किसके साथ हुआ? 4. बीबी फ़ातिमा (रज़ि.) को रज़िया' और “अज़-ज़हरा' क्यों कहा जाता है ? 5. बीबी फ़ातिमा (रज़ि.) ने स्त्रियों का सबसे उत्तम गुण क्या बताया ?

(ख) सही वाक्य के आगे (४) और ग़लत वाक्य के आगे (3८) निशान लगाइए :

. बीबी फ़ातिमा (रज़ि.) प्यारे नबी (सल्ल.) की सबसे बड़ी बेटी थीं। (्‌ 2. क्रियामत के दिन हम अल्लाह के दर्शन करेंगे। (्‌ 3. हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) को दिखावे की बातों से नंफ़रत थी। (्‌ 4. हज़रत फ़ातिमा (रज़ि.) बहुत कम दानशील और त्यागप्रिय थीं। ( 5. अपने पिता के निधन के बाद हज़रत फ़ातिमा केवल एक साल जीवित रहीं। . (

भाषा-बोध

; ) ) ) )

(क) इस पाठ में एकान्तप्रिय' शब्द का प्रयोग-हुआ है। इसी तरह जनप्रिय, लोकप्रिय, शान्तिप्रिः

शब्द बनते हैं। यहाँ प्रिय' शब्द का प्रत्यय के रूप में प्रयोग हुआ है।

जो शब्दांश मूल शब्द के अन्त में लगकर नए शब्द बनाते हैं, उन्हें प्रत्यय कहा जात है। ता' और इक' भी प्रत्यय हैं। जैसे : सरल से सरलता, समाज से सामाजिक शब्द बनर

हैं।

हमारी पोथी-5

“ता! और “इक प्रत्ययों को शब्दों के अन्त में जोड़कर प्रत्येक प्रत्यय से तीन-तीन नए

शब्द बनाइए | ब्र) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यान से पढ़ो :

“ुष्टो | अल्लाह तुम्हें सज़ा देगा।

“बच्चो ! अल्लाह तआला लड़ाई-झगड़े से नाराज़ हो जाता है।

“ब्रेटी ! अल्लाह की किताब का पाठ नंगे सिर नहीं करते।

शाबाश ! सारे रिकार्ड तोड़ दिए |

हे ईश्वर ! रक्षा कर।

हाय अल्लाह ! यह क्‍या हुआ?

इन वाक्यों में आश्चर्यवोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया गया है। इसे आश्चर्यसूचक थवा विस्मयादिबो धक चिहन भी कहा जाता है। विस्मय, शोक, आनन्द, उत्साह, घृणा, प्रोधन, सम्मान, शुभकामना इत्यादि भावों को प्रकट करने के लिए आश्चर्यबोधक चिहन का प्रयोग या जाता है।

आप इस पाठ्य पुस्तक (हमारी पोथी, भाग-5) से आश्चर्यबोधक चिहनवाले दस वाक्य नकर अपनी कॉपी में लिखिए और अपने शिक्षक को दिखाइए।

१2020 24

हमारी पोथी-5 (49)

पाठ-42 न्याय

अरब के रेगिस्तानी इलाक़े में दो यात्री एक साथ यात्रा कर रहे थे | चलते-चलते जब दोपहर गई तो दोनों एक पेड़ की छाया में आराम करने के लिए ठहर गए। उन्हें भूख लगी थी। दोनों ने विच किया कि हम लोग यहीं भोजन कर लें। वे अपने-अपने थैले से रोटियाँ और सालन निकालकर खा के लिए बैठ गए। पहले यात्री के पास तीन रोटियाँ थीं और दूसरे यात्री के पास पाँच रोटियाँ |

इतने में एक तीसरा यात्री भी वहाँ आकर उहरा। उसके पास खाना नहीं था। बह उन दोनों यात्रियों से आग्रह करके कुछ क्रीमत के बदले उन्हीं के खाने में शामिल हो गया। जब तीनों भोजन कर चुके तो तीसरे यात्री ने अपने भोजन के बदले उन्हें आठ दिरहम अदा किए। पैसे अदा करके वह चला गया। अब दोनों यात्रियों में दिरहम के बँटवारे पर विवाद हो गया। पहले यात्री ने कहा कि हम तीनों ने मिलकर भोजन किया है। खाना दो आदमियों के पास था। इसलिए चार-चार दिरहम दोनों बाँट लें दोनों का हिसाब बराबर हो जाएगा। दूसरे यात्री ने कहा, “तुम्हारे पास सिर्फ़ तीन रोटियाँ थीं और में पास पाँच रोटियाँ। इसलिए तुम्हें तीन दिरहम ही दूँगा। बाक़ी पाँच दिरहम मैं लूँगा।'” पहला यात्र उसकी बात मानने को तैयार हुआ।

झगड़े का फ़ैसला कराने के लिए दोनों यात्री शहर के क्राज़ी के पास पहुँचे। क़ाज़ी ने दोनों क॑ बातें ख़ूब ध्यान से सुनीं। सोच-विचार करने के बाद उसने यह फ़ैसला सुनाया, “जिस यात्री के पार तीन रोटियाँ थीं, उसे सिर्फ़ एक दिरहम मिलेगा।''

यह फ़ैसला सुनकर पहला यात्री अवाक्‌ रह गया। उसने कहा, “जब मुझे तीन दिरहम मिल सं थे तब तो मैंने स्वीकार नहीं किए। चार दिरहम पाने के लिए अदालत में अपना मुक़्द्दमा पेश किया यह कैसा न्याय हुआ कि अब तीन दिरहम से घटकर सिर्फ़ एक दिरहम मेरे हिस्से में आया।'” उसक मन संतुष्ट नहीं हो रहा था। लेकिन अदालत के फ़ैसले को मानना भी ज़रूरी था। उसने क़ाज़ी से विनर्त

हमारी पोथी-5 (509

कि फ़ैसला तो हमें मंज़ूर है, लेकिन हमारी संतुष्टि के लिए ज़रा हमें समझा दीजिए कि यह फ़ैसला बत कैसे है? इस न्याय पर अन्य लोगों को भी आश्चर्य हुआ, क्योंकि अधिकतर लोग ठीक हिसाब गए बिना अपनी अटकल और अपने अनुमान से दोनों पक्षों में से किसी एक को उचित समझ रहे थे।

क़ाज़ी साहब ने अपने फ़ैसले को युक्तिपूर्ण सिद्ध करने के लिए एक तक़रीर की। सब लोग भाव से उनकी बातें सुनने लगे। उन्होंने कहा --

'तीन व्यक्तियों ने बराबर-बराबर खाना खाया। अत: प्रत्येक रोटी के तीन बराबर-बराबर डे किए गए तीन रोटियों के नौ टुकड़े और पाँच रोटियों के पन्द्रह टुकड़े हुए। कुल चौबीस टुकड़े ; तीनों यात्रियों ने आठ-आठ टुकड़े खाए। जब बाद में आनेवाले तीसरे यात्री ने आठ दिरहम दिए, उसने एक टुकड़े की क़ीमत एक दिरहम अदा की। तुमने अपने नौ टुकड़ों में से आठ ख़ुद खा लिए तुम्हारा सिर्फ़ एक टुकड़ा उस तीसरे यात्री ने खाया। इस प्रकार दूसरे यात्री के पन्द्रह टुकड़ों में से उठ तो उसने ख़ुद खाए और शेष उसके सात टुकड़े उम्र तीसरे यात्री ने खाए। इसलिए तुम्हें सिर्फ़ एक हम और दूसरे साथी को सात दिरहम मिलेंगे।

यह विवरण सुनकर संब दंग रह गए और बहुत ख़ुश हुए। एक दिरहम पानेवाले यात्री की समझ भी बात गई। दोनों ने अपने हिस्से की रक़म लेकर अपनी राह ली। ऐसे ही अवसर के लिए यह ग़वत प्रचलित है- चौबे गए छब्बे बनने, दुबे बनकर आए।

अधिक लालच करनेवाला घाटे में रहता है। अत: कहा भी गया है - लालच बुरी बला है।

ब्दार्थ और टिप्पणी आग्रह ८. इसरार, हठ विवाद -<... झगड़ा अवाक्‌ 5. चकित संतुष्ट 5८5. मुत्मइन सिद्धकरना 5 साबित करना युक्तिपूर्ण न. बुद्धिसंगत क़ाज़ी न्यायाधीश, जज शांत भावसे 5 ख़ामोशी से विवरण -. बयान बला - .. विपत्ति, आफ़त दिरहम < चाँदी का सिक्का जो अनेक

अरब देशों में प्रचलित है

हमारी पोथी-5 (59 है

अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए :

. दूसरे यात्री के पास कितनी रोटियाँ थीं ?

2. तीसरे यात्री ने भोजन के बदले कितने दिरहम अदा किए ?

3. झगड़े का फ़ैसला कराने के लिए दोनों यात्री किसके पास पहुँचे ? 4. न्याय के पश्चात्‌ पहले यात्री को कितने दिरहम मिले ?

5. क्राज़ी ने एक रोटी के कितने टुकड़े करने के लिए कहा ?

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए :

. दोनों यात्रियों में किस बात पर विवाद हुआ ?

2. पहले यात्री ने आठ दिरहम को किस प्रकार बाँटना चाहा ?

3. दूसरे यात्री ने आठ दिरहम का बँटवारा किस प्रकार करना चाहा ? 4. क़ाज़ी ने न्याय किस प्रकार किया ?

5. क़ाज़ी के न्याय से लोगों को आश्चर्य क्यों हुआ ?

6. पहले यात्री को लालच करने का क्या फल मिला ?

(ग) सही उत्तर पर सही (४) का निशान लगाइए :

०» किसने कहा ? . “तुम्हें तीन दिरहम ही दूँगा।'” (पहले यात्री ने/ दूसरे यात्री ने/ क़ाज़ी ने) जब मुझे तीन दिरहम मिल रहे थे तब तो मैंने स्वीकार नहीं किए।'' (पहले यांत्री ने/ दूसरे यात्री ने/ तीसरे यात्री ने तुमने अपने नौ टुकड़ों में से आठ टुकड़े ख़ुद खा लिए।”” (पहले यात्री ने/ दूसरे यात्री ने/ क़ाज़ी ने

3

5]

भाषा-बोध (क) निम्नलिखित शब्दों के बहुवबचन रूप लिखिए :

शब्द - बहुवचन रोटी - रोटियाँ रोटियों

हमारी पोधी-5 (522

नदी +० | नर, 8१३5 बकरी हल, (३ कट नर वट 52 फ़ैसला टुकड़ा - झगड़ा - बात - घात -

ख) नीचे लिखे वाक्‍्यों को ध्यान से पढ़िए :

पवित्र कुरआन में एक सौ चौदह सूर्तें हैं। पाँच वक़्त नमाज़ पढ़ना फ़र्ज़ है।

एक दर्जन केले लाओ।

कक्षा में सोलह विद्यार्थी हैं।

दस लड़कियाँ खेल रही हैं।

इन वाक्यों में क्रमशः एक सौ चौदह, पाँच, एक दर्जन, सोलह और दस “संख्यावाचक विशेषण'

है| ;। याद रखिए : ऐसे विशेषण जो संज्ञा की संख्या का बोध कराएँ, 'संख्यावाचक विशेषण' #हलाते है। आप इस पाठ में आए संख्यावाचक विशेषणों को चुनकर अपनी कॉपी में लिखिए

१7६2९2६

हमारी पोथी-5 (532

पाठ - 3 मेरा नया बचपन

बार-बार आती है मुझको, मधुर याद बचपन तेरी गया ले गया तू जीवन की, सबसे मस्त ख़ुशी मेरी॥

चिन्ता-रहित खेलना-खाना, वह फिरना निर्भय स्वच्छन्द कैसे भूला जा सकता है, बचपन का अतुलित आनन्द॥ ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, छुआछूत किसने जानी बनी हुई थी अहा! झोंपड़ी और चीथड़ों में रानी॥ किए दूध के कुल्ले मैंने, चूस अंगूठा सुधा पिया किलकारी कल्‍लोल मचाकर, सूना घर आबाद किया। रोना और मचल जाना भी, क्‍या आनन्द दिखाते थे। बड़े-बड़े मोती से आँसू, जयमाला पहमाते थे॥ मैं रोई, माँ काम छोड़कर आई, मुझको उठा लिया झाड़-पोंछकर, चूम-चूम, गीले गालों को सुखा दिया॥ जा बचपन एक बार फिर, दे दे अपनी निर्मल शांति। व्याकुल व्यथा मिटानेवाली, वह अपनी प्राकृत विश्रांति॥ मैं बचपन को बुला रही थी, बोल उठी बिटिया मेरी। नन्‍्दन वन-सी फूल उठी, यह छोटी-सी कुटिया मेरी॥ 'मँ ओ! कहकर बुला रही थी, मिट्टी खाकर आई थी। कुछ मुँह में कुछ लिए हाथ में, मुझे खिलाने आई थी॥

मैंने पूछा, 'यह क्‍या लाई', बोल उठी वह, 'माँ काओ। हुआ प्रफुल्लित हृदय ख़ुशी से, मैंने कहा, 'तुम्हीं खाओ'॥ पाया मैंने बचपन फिर से, बचपन बेटी बन आया। उसकी मंजुल मूर्ति देखकर, मुझमें नव जीवन आया॥

हमारी पोधी-5 (559

मैं भी उसके साथ खेलती, खाती हूँ, तुतलाती हूँ। मिलकर उसके साथ स्वयं, मैं भी बच्ची बन जाती हूँ॥

जिसे खोजती थी वर्षों से, अब जाकर उसको पाया। भाग गया था मुझे छोड़कर, वह बचपन फिर से आया॥

- सुभब्रा कुमारी चौहान गब्दार्थ और टिप्पणी

मधुर < मीठा निर्भय - भय-मुक्त, बेख़ौफ़ अतुलित - बेमिसाल कल्लोल - शोर, हंगामा जयमाला 5 जीत की माला व्यथा + दुख-दर्द, पीड़ा मंजुल मूर्ति > सुन्दर मूर्ति चिन्दा-रहित < बेफ़िक्र सुधा + अमृत, आबे-हयात . प्रफुल्लित. + खुश नव जीवन < नई ज़िन्दगी स्वच्छ्न्द < आज़ाद, मनमाना निर्मल - साफ़, मैल-रहित व्याकुल बेचैन प्राकृत्त -< असली, छुदरती विश्रांति - शान्ति, चैन नन्‍्दन वन - कृष्ण जिस बाग में खेलते

थे वह नन्द का बाग था।

यहाँ उसी से तुलना है।

अभ्यास

(क) एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

. कवयित्री को बार-बार किसकी याद आती है ?

2. बचपन के अतुलित आनन्द क्या हैं?

3. बच्ची ने सूना घर किस प्रकार आबाद किया ?

4. कवयित्री बचपन में जब रोती थी तो उसकी माँ क्या करती थी ?

हमारी पोथी-5 (559

(रत्र) संक्षेप में उत्तर लिखिए : . बड़े होने पर बचपन क्यों बार-बार याद आता है ? 2. लड़की किस हाल में माँ के पास आई थी ? 3. माँ को पुन: अपना नया जीवन कैसे मिला ? 4. माँएँ अपने नन्हे बच्चों से किस प्रकार बातें करती हैं ?

(ग) रिक्त स्थानों की पूर्त्ति कीजिए :

!. बार-बार आती है मुझको, मधुर याद ............ तेरी। गया ले गया तू ........... की, सबसे मस्त ख़ुशी मेरी 2. ऊँच-नीच का ज्ञान नहीं था, ............ किसने जानी। बनी हुईं थी अहा ! झोपड़ी और चीथड़ों में ............ 3. मैंरोई, माँ .......... छोड़कर आई, मुझको उठा लिया। झाड़-पोंछकर, चूम-चूम, गीले ........ को सुखा दिया 4. जिसे खोजती थी वर्षों से, अब जाकर ........... पाया। भाग गया था मुझे छोड़कर, वह ......... फिर से आया॥ भाषा-बोध

(क) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए

“पवित्र क़्ुरआन' पूरी मानव-जाति के मार्गदर्शन के लिए आया है। “हमारी पोथी' को पाठकों ने बहुत पसन्द किया है।

“कान्ति' एक प्रतिष्ठित पत्रिका है।

रामधारी सिंह “दिनकर” हिन्दी के प्रतिष्ठित कवि हैं।

इन वार्क्यों में ' चिह्न का ग्रयोग किया गया है। इस चिहन को इकहरा उद्धरण चिह्न कहते हैं। लेखक का उपनाम, पुस्तक का नाम, समाचारपत्र, निबंध, कविता इत्यादि के शीर्षक का हवाला देते समय इकहरे उद्धरण चिह्न का ग्रयोग किया जाता है।

हमारी पोधी-5 (569

नलिखित वाक्यों में उचित स्थान पर इकहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग कीजिए :

हरिऔध सचमुच महाकवि थे।

'तफ़हीमुल-क्ुरआन बीसवीं शताब्दी की सर्वोत्तम कृति है।

दावत एक लोकप्रिय अख़बार है।

हदीस सौरभ मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ाँ की मशहूर कृति है।

अख़लाक़ी कहानियाँ बच्चों के लिए बहुत ही रोचक कहानी-संग्रह है।

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न्तत्फ्ल््ज्ज्--त्त....मेढ हमारी पोथी-5 (579

पाठ - 44

महान पक्षी-विज्ञानी सालिम अली

“अंकल मिलार्ड! मैंने कभी स्वप्न में भी सोचा था कि पक्षी इतने प्रकार के होते हैं।'” ये अचरज भरे शब्द थे उस नौ वर्षीय बालक सालिम अली के जिसने मुम्बई नेचुरल « हिस्ट्री सोसाइटी के पक्षी-संग्रहालय में मरे हुए सैकड़ों पक्षियों ' के नमूनों को देखकर कहे थे। वह एक मृत गौरैया से संबंधित जिज्ञासा मिटाने पक्षी-संग्रहालय आया था। परन्तु यहाँ पक्षियों के विशाल संग्रह को देखकर वह अवाक्‌ू रह गया... और उसकी जिज्ञासा और भड़क उठी। वह प्रति दिन: संग्रहालय आकर पक्षियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने लगा।

उस बालक का नाम मुज़ुद्दीन अब्दुल अली था, जो के आगे चलकर पक्षी-विज्ञानी सालिम अली के नाम से विख्यात हुआ। सालिम अली को पक्षियों चलता-फिरता विश्वकोश' कहा जाता है।

सालिम अली की यह दिनचर्या बन गई कि वह जहाँ कहीं भी जाता, आकाश में उड़ते पर को देखता, पेड़ों पर बैठे या आस-पास उड़ते पक्षियों को निहारता, बाग़-बगीचे में इन्हें तलाश कर नदी-नालों के किनारे-घूमता-फिरता, पक्षियों के पीछे भागता रहता | वह अपने भाई के साथ बर्मा ( म्यांमार) के जंगलों में कारोबार करने गया। वहाँ भी पक्षियों के विषय में अधिक से अधिक जानः प्राप्त करमे की जिज्ञासा प्रबल रही, बल्कि प्रबलतम होती गई। इस प्रकार वह निरन्तर अपना पक्षी- बढ़ाता रहा।

समय बीतता रहा, यहाँ तक कि वह कॉलेज पहुँच गया। वहाँ फ़ादर ब्लेटर उन्हें प्राणीश पढ़ाते थे। उन्होंने सालिम अली की अंभिरुचि को देखते हुए उसे मुम्बई नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के 7 संग्रहालय में गाइड का काम दिलवा दिया। अब सालिम अली वहाँ आनेवाले लोगों को विभिन्‍न प्र के मरे हुए पक्षियों के बारे में बताने लगे। परन्तु प्राय: यह होता था कि वे बहुत-से लोगों के कई प्र

हमारी पोथी-5

उत्तर नहीं दे पाते थे। उन्होंने सोचा कि इसके बारे में सही और विस्तृत ज्ञान प्राप्त करना आवश्यक यही सोचकर वे उच्च शिक्षा के लिए बर्लिन रवाना हो गए।

जब वे बर्लिन से पक्षी-विज्ञान में ट्रेनिंग लेकर «£ उस आए तो उनकी नौकरी समाप्त हो चुकी थी। वे नई हरी की तलाश में इधर-उधर भटकने लगे। कड़े संघर्ष | बावजूद उन्हें कोई नौकरी नहीं मिली, इसलिए उनके ५7 प्रमे आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया। पत्नी की सलाह पर अपने पैत्रिक घर में चले आए,। संयोगवश, उनके घर के: प्रने एक पेड़ पर 'बया' नामक पक्षी ने अपना घोंसला हद ना शुरू किया, जो सालिम अली की नज़रों से छिपा नः सका वे सारा दिन एक नोटबुक और क़लम पढढ़े बैठे ते और चिड़िया के घोंसला बनाने के काम को ध्यान से ब्रते रहते और उसके बारे में लिखते जाते। उनके इस पैक्षण से पता चला कि घोंसले के निर्माण में केवल नर

हिस्सा होता है। जब घोंसला आधा बन जाता है तो

दा आकर उसे देखती है और फिर आगे का काम भी उसी की पसन्द के अनुसार नर ही अंजाम देता फिर मादा उसमें अंडे देती है और जब तक बच्चे बड़े होते है, तब तक नर एक दूसरा घोंसला तैयार ( लेता है और इसी तरह ये पक्षी अपना पुराना घर छोड़कर नए घर में जाते हैं। ये सारी बातें बड़ी लचस्प थीं। इन बातों को सालिम अली ने अपने पहले शोध-प्रबंध में लिखा। इस निबंध का शीर्षक , बया के स्वभाव और क्रिया-कलापों का वर्णन

इस शोध-प्रबंध के छपते ही सालिम अली पक्षी-विज्ञानी के रूप में पहचाने जाने लगे। फिर वे क्षेयों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के काम में ऐसे खोए कि स्वयं को भूल बैठे। वे आजीवन पक्षियों पीछे भागते रहे। इसी सिलसिले में उन्होंने देश-विदेश की अनेकानेक यात्राएँ कीं। हिमालय की फली चोटियाँ हों या आग बरसाता रेगिस्तान, हर जगह सालिम अली उत्साह और लगन से काम पते रहे। ॥॒

सालिम अली नें कच्छ के जंगलों की भी यात्रा की थी। यह यात्रा सबसे कठिन और ख़तरनाक ;। वे वहाँ हंसों की बस्ती की तलाश में गए थे। इस यात्रा में उन्हें दस-दस घंटे तक ऊँट की पीठ पर

हमारी पोथी-5

सवार रहना पड़ता था। अनेक कटिनाइयों के बाद वे उस जगह को तलाश करने में सफल हो गए, < हंसिनी अंडे देती थी। वहाँ उन्होंने जो कुछ देखा, उसे अपने एक निबंध में लिखा।

सालिम अली ने अपने इस निबंध में बताया कि हंसिनी के अंडे देने और उन्हें सेने किन-किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने 84 वर्ष की उम्र में लद्दाख़ की यात्रा की < वहाँ काली गर्दनवाली सारस की तलाश में ठंडी हवाओं के थपेड़े सहते हुए उसके बारे में बहुत- जानकारियाँ एकत्र कीं, जो आज भी ऐतिहासिक तथा अत्यन्त महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ की हैसियत रख हैं। फिर वह 87 वर्ष की उम्र में हिमालय की गोद में एक विशेष प्रकार की बटेर की खोज में निव पड़े। बटेर की उस प्रजाति को खोज निकाला और उसके बारे में विस्तृत जानकारी दी। अपने जीवन आखिरी वर्ष में भी वे अपने हाथों में दूरनीन लिए और कंधों पर कैमरा लटकाए दिन-दिन भर ख़ छानते रहे और रंग-बिरंगे पक्षियों के बारे में नई और अजीबो-ग़रीब जानकारियाँ देते रहे। सारि अली जब तक जीवित रहे, बस काम ही करते रहे। उन्होंने कठोर परिश्रम करके निजी अनुभव ज्ञान के आधार पर पक्षियों के रूप-रंग, क्रिया-कलाप, आदतों, प्रजनन-क्रिया, खान-पान, आव इत्यादि के बारे में विस्तार से लिखा। 'भारतीय पक्षी', 'कच्छ के पक्षी' “भारत के पहाड़ी पर्क्ष 'ट्राबंकोर और कोचीन के पक्षी', भारत और पाकिस्तान के पक्षी' इत्यादि उनकी प्रसिद्ध पुस्तकें सालिम अली को पक्षियों के जीवन पर शोधपूर्ण पुस्तकें लिखने के कारण देश-विदेश से अरे पुरस्कार प्राप्त हुए। उन्हें देश के महत्त्वपूर्ण पुरस्कार पद्म विभूषण' से भी सम्मानित किया गया।

सालिम अली जब तक जीवित रहे, पक्षियों के जीवन और व्यवहार पर शोध-कार्य करते यह शोध-कार्य अभी जारी ही था कि मुम्बई में नवम्बर 892 ई. को जन्मे इस महान पक्षी-विज्ञ का देहान्त 20 'जून 987 ई. को हो गया। आकाश में उड़ते हुए अनगिनत पक्षी हमें सदा इस पक विज्ञानी की याद दिलाते रहेंगे।

शब्दार्थ और टिप्पणी विख्यात. मशहूर दिनचर्या - रोज़ाना का काम निरन्तर -+ लगातार संयोगवश - इत्तिफ़ाक़ से निरीक्षण. « जाँच, गौर से देखना आजीवन - ज़िन्दगी भर अवाक्‌ - आश्चर्य चकित अभिरुचि - दिलचस्पी

हमारी पोधी-5 (609

संघर्ष - कड़ी मेहनत, जिद्दोजुहद परिश्रम 5 मेहनत विश्वकोश - बृहद जानकारी का कोश, प्राणीशास्त्र._ + जीव-विज्ञान इंसाइक्लोपीडिया प्रजनम-क्रिया < जन्म लेने की क्रिया आर्थिक - धन से सम्बन्धित प्रकृति स्वभाव, फ़ितरत पैत्रिक - पुश्वैनी अभ्यास 5) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए : -

). सालिम अली का पूरा नाम क्‍या था ?

2. सालिम अली ने उच्च शिक्षा कहाँ से प्राप्त की ?

3. बया नामक पक्षी की प्रजाति में घोंसला बनाने का काम कौन करता है ?

4. सालिम अली पक्षी-विज्ञानी के रूप में कब पहचाने गए ?

5. सालिम अली की कौन-सी यात्रा सबसे कठिन थी ?

6. सालिम अली को भरत देश में कौन-से महत्त्वपूर्ण पुरस्कार प्राप्त हुए ?

7. सलिम अली की दो पुस्तकों के नाम लिखो।

ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए :

।... सालिम अली क्यों विख्यात हुए?

2. मुम्बई के पक्षी संग्रहालय में सालिम अली को नौकरी कैसे मिली ?

3... सालिम अली की लगन, जिज्ञासा और कड़ी मेहनत से हमें क्या शिक्षा मिलती है ?

4... महान पक्षी-बिज्ञानी सांलिम अली का देंहान्त कब, कहाँ और किस आयु में हुआ ? फ्या-बोध

क) संबंध और एकत्र में इत लगाने पर क्रमश: संबंधित और एकत्रित शब्द बनते हैं|

नीचे लिखे शब्दों में इत लगाकर शब्द बनाइए :

हमारी पोधी-5 (69

-कथ के .0२४६७५४०+४#इ> 5 पठ देडे, - हनन डंडे 2बज रे >र८ 3 (ख) निम्नलिखित वाक्‍्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :

सलीम पाठशाला गया।

अकपमल पढ़ रहा है।

तनवीर स्कूल जाएगा।

यहाँ पहले वाक्य में क्रिया हो चुकी, दूसरे में हो रही है और तीसरे में होगी। पहला वाब भूतकाल का, दूसरा वाक्य वर्तमानकाल का और तीसरा वाक्य भविष्यत्‌क्ाल का है। भूतकाः क्रिया का वह रूप है जिससे बीते हुए समय में क्रिया के होने का ज्ञान होता है। इसी तरह वर्तमानकाः क्रिया का वह रूप है जिससे वर्तमान में क्रिया के होने का ज्ञान होता है और जिस काल से भविष्य होनेवाली क्रिया की काल-संबंधी सामान्य अवस्था का ज्ञान हो, उसे भविष्यतूकाल कहते हैं।

अब आप कोछ्ठक में निम्नलिखित वाक्यों के काल का नाम लिखिए :

मैं जाऊँगा। ( ) बह गया। ( रहीम खाता है। ( वह पढ़ेगी। (्‌ करीम स्कूल जाता है। ( उसने खाना खा लिया। ( सीमा खेलती है। ( हलीमा खाना पका चुकी | ( असलम कुश्आान पढ़ता है।. ( अजय कल आएगा। (

की मी है नल मी अजय

हमारी पोथी-5

प्राठ- 45 पवित्र क़्ुरआन

विश्व के स्रष्टा अल्लाह ने आरंभ से ही के मार्गदर्शन के लिए अपने दूत (नबी) उनपर अपनी किताब अवतरित की। उन €# पबों में ईश्वर के आदेश होते थे। मनुष्य के." बिताने के नियम होते थे, उन नियमों के ग्रार पर समाज का गठन होता था। बुराइयाँ : अत्याचार मिटाए जाते थे।

परन्तु मनुष्य कालान्तर में अपनी, बुरी ग्रआं का अनुसरण करके फिर बुराई के | पर चलने लगते। वे ईश्वरीय किताबों में मनमाना परिवर्तन कर डालते। इस प्रकार संसार में कोई रीय ग्रंथ सुरक्षित रहा। चारों ओर अंधकार और अंधविश्वास-का साम्राज्य छा गया। अल्लाह मानव पर दया आई। प्यारे मबी हज़रत 'मुहम्मद' (सल्लल्लाहु अलैहि सललम) को उसने ना अंतिम नबी बनाया। उनपर क्कुरआन अवतरित किया और धर्म को पूर्ण किया। उसने अपनी से कुरआन की सुरक्षा की भी व्यवस्था कर दी। अब कुरआन सारी मानवता के लिए पथप्रदर्शक कुरआन आप (सल्ल.) के मक्का और मदीना के निवास-काल में 23 वर्ष तक थोड़ा-थोड़ा तरित होता रहा। इसकी भाषा अरबी है। यह लिखित किताब के रूप में अवतरित नहीं होता था। के प्यारे नबी (सलल.) को जिबरील (अलैहि.), जो कि एक प्रतिष्ठित फ़रिशता थे, स्पष्ट शब्दों में आन का कुछ अंश सुनाते | वे जो कुछ सुनाते वह एक प्रभावशाली भाषण के रूप में होता था। प्यारे उसे याद कर लेते और उसी क्षण लिपिक (लिखनेवाले व्यक्ति) को बुलाकर उसे लिखवा देते। आन लिखने के लिए एक दर्जन से अधिक लिपिक निर्धारित किए गए थे। उनमें से कुछ लोग अपना निश्चित करके हमेशा प्यारे नबी (सल्ल.) के साथ रहते थे। अवतरित अंशों को भाषण के रूप यारे नबी (सल्ल.) लोगों को सुनाते। भाषण में लोगों से सत्य मार्ग पर चलने का आहवान होता सत्य और. असत्य को तर्कों और प्रमाणों द्वारा खोल-खोलकर समझाया जाता था। बुद्धि और ब्रेक से काम लेने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाता था। लिपिक कुरआन के अबतरित अंशों की

हमारी पोथी-5

कई-कई प्रतियाँ तैयार करते और उन्हें मुसलमानों में फैलाते। वे उन्हें याद कर लेते | कुरआन विभिन्न अंश प्रतिदिन नमाज़ों में कई बार दोहराए जाते इस भाषण की सत्यता, शैली और मोहकत लोग बहुत अधिक प्रभावित होते थे। इसी कारण विरोधियों ने आपको जादूगर और शायर विरोधियों के आरोपों का खंडन भी कुरआन ने सशक्त ढंग से किया। क्ररआन के पठन-पाठन प्रचलन बहुत तेज़ी से हुआ। इस प्रकार कुरआन के पूर्ण होते-होते सारे अंशों को अधिकांश मुसलम ने कंठस्थ कर लिया। ऐसे लोग कुरआन के हाफ़िज़ एवं क़ारी कहलाते प्यारे नबी (सल्ल. )को पूरा कुरआन याद था। नमाज़ों और भाषणों के अतिर्क्ति समयों में भी वे कुरआन की तिलावत (पा करते और मुसलमानों को भी इसपर उभारते | कुरआन के पढ़ने और समझने में जो सबसे श्रेष्ठ होता उच्च पद और प्रतिष्ठा पाता। प्यारे नबी के जीवन के अंतिम दिनों में पूरा कुरआन लिखित रूप में हज़ारों व्यक्तियों के कंठस्थ रूप में सुरक्षित हो चुका था। तब से आज तक उसके पढ़ने और याद का क्रम जारी है। मुद्रण-कला का आविष्कार होने से पहले भी क्ुरआन की हस्तलिखित लाखों प्रति हर युग में तैयार की जाती रहीं। उनमें से बहुत-सी उत्तम प्रतियाँ विश्व के विभिन्‍न संग्रहालयों पुस्तकालयों में सुरक्षित हैं। आज भी क्कुरआन ही संसार में सबसे अधिक पढ़ी जानेवाली और प्रकार होनेवाली पुस्तक है।

कुरआन का संकलन प्यारे नबी (सल्ल.) के संरक्षण और उनकी देख-रेख में हुआ। (सलल.) अलग-अलग समय में अवतरित होनेवाले अंशों को ईश्वर के आदेशानुसार निश्चित स्थ पर रखवाया। कुरआन के अन्दर मात्र ईश्वर की वाणी है। उसमें प्यारे नबी या किसी अन्य व्यक्ति: एक शब्द भी नहीं है। प्यारे नबी (सल्ल.) के उपदेशों, आदेशों और शिक्षाओं को अलग से संकलि किया गया है जिन्हें हम हदीस' कहते हैं।

कुरआन के वाक्य अथवा वाक्यांश को “आयत' कहते हैं। आयत कभी तो एक पूरा वार होता है और कभी वाक्यांश, और कभी दो या तीन आयतों को मिलाने से एक वाक्य पूरा होता आयतें कहीं बहुत छोटी एक-दो अक्षरों की और कहीं बहुत बड़ी, एक या आधे पृष्ठ पर फैली होती कई आयतों के समूह को सूरा (सूरत) कहा जाता है। हर सूरा एक पूर्ण इकाई होती है अर्थात्‌ अप् कथन और उद्देश्य को पूर्ण करती है। कुरआन में कुल 4 सूरतें (अध्याय) हैं। इनमें कुछ छोटी अं कुछ बड़ी सूरतें हैं। सबसे छोटी सूरा अल-कौसर' तीन आयतों की और सबसे बड़ी सूरा अल बक़रा' 286 आयतों की है।

बाद के समय में विद्वानों ने तिलावत (पाठ) की सुविधा के लिए क्रुरआन को तीस भागों विभाजित किया है। हर एक भाग 'पारा' (खण्ड) कहलाता है। तीस भागों में होने के कारण

हमारी पोथी-5

पपारा' भी कहा जाता है, क्योंकि फ़ारसी में 'सी' का अर्थ तीस' और 'पारा' का अर्थ टुकड़ा या ण्ड' होता है। इससे यह सुविधा होती है कि प्रतिदिन एक-एक पारा तिलावत करके एक माह में पूरा आन समाप्त-कर लिया जाता है। क्कुरआन को प्रतिदिन तिलावत करने और एक माह में यूरा कुरआन त्म करने की ताकीद प्यारे नबी (सल्ल.) ने की है। इसके अतिरिक्त क्कुरआन में एक*और भाजन-चिह्दन है जिसे रुकूअ' कहते हैं। नमाज़ों में तिलावत की सुविधा के लिए ये चिहन डाले गए ' नमाज़ में एक रिकअत पूरी करके घुटनों पर हाथ रखकर झुकने को 'रुकूअ' कहते हैं। कुरआन में 7अ का चिह्न इसलिए है कि नमाज़ी उतने अंश पढ़कर रुकूअ करे। हर रुकूअ के अन्दर कुछ आयवतें ती हैं।

आयत और सूरा का विभाजन अपना स्थायी महत्त्व रखते हैं। पारा और रुकूअ चूँकि प्यारे नबी ल्‍ल.) के बाद सुविधा के लिए अपनाए गए हैं, अत: इनका विशेष महत्त्व नहीं है। इसलिए क्कुरआन कुछ प्रतियों में उन्हें नहीं दर्शाया जाता है।

कुरआन की शैली अत्यंत मनोरम है। इसमें अत्यन्त सम्मोहक शैली में किसी बात का वर्णन 'के लोगों की बुद्धि और विवेक को उद्वेलित किया गया है। कहीं प्रचंड शैली में भयंकर स्थिति का नि किया गया है, ताकि अचेत लोग सतर्क हो जाएँ, अपने अंतिम परिणामों के प्रति सजग हो जाएँ। ; इतना प्रभावकारी है कि कठोर हृदय भी काँपने लगता है। कहीं प्यार और स्नेह की ऐसी वर्षा होती कि पाठक ऐसा महसूस करता है कि वह दयानिधि की गोद में बैठा है। थपकियाँ देकर उसे समझाया ' रहा है। उसका हृदय भाव-विभोर हो जाता है। इस प्रकार मानव की विभिन्‍न मनःस्थितियों को र्श करता हुआ कुरआन उसके हृदय में उतर जाता है। मानव यह सोचने पर विवश हो जाता है कि एआन जो कुछ कहता है, हमारे हित के लिए ही कहता है।

क्षुरआन मूल रूप से न्याय की स्थापना चाहता है। वह ईश्वर की पहचान और उसके प्रति नव के कर्तव्य को स्पष्ट करता है। कुरआन समाज में माता-पिता, परिवार, पड़ोस, राज्य और पूरी नवता के प्रति मनुष्य के कर्त्तव्यों की व्याख्या करता है। यह मानव-जीवन का उद्देश्य बताता है और गय-स्थापना की प्रक्रिया में अंतिम परिणामों की आवश्यकता से हमें अवगत कराता है। क्रुरआन की क्षाओं के अनुकूल एक लम्बीं अवधि तक संसार के बड़े भागों में शासन-व्यवस्था चलाई गई। - त्रकी सफलता और समाज के विकास का इतिहास मौजूद है। कुरआन की शिक्षाओं द्वारा ब-शांति, विश्व-भ्रातृत्व, न्याय, सहानुभूति और मानव-सेवा का वातावरण संसार में' उत्पन्न होना तेहास की अविस्मरणीय घटना है।

. हमारी पोथी-5 (659

शब्दार्थ और टिप्पणी

अवतरित < नाज़िल, उतरा हुआ कंठस्थ - हिफ़्ज़, याद संरक्षण. 5 हिफ़ाज़त विभाजन 5 तक़सीम, बँटवारा सतर्क < सावधान, होशियार अविस्मरणीय < भूलने योग्य, यादगार प्रभावित < मुतास्सिर वातावरण - माहौल प्रक्रिया . < काम की विधि या क्रम अवगत. < आगाह होना, जानना अनुकूल: < मुताबिक़, मुवाफ़िक़ भ्रातृतत. < भाईचारा अनुसरण < पीछे-पीछे चलना अंश + टुकड़ा, भाग लिपिक .. 5 लिखनेवाला आह्वान < पुकार, सम्बोधन तर्क - दलील, प्रमाण विवेक 5 शऊर, समझ प्रेरित < प्रेरणा-प्राप्त, उत्साहित मोहक - मोह लेनेवाला व्याख्या < वक्स्तृत वर्णन सशक्त < मज़बूत, ताक़तवर संकलन -< एकत्र करना, संग्रह वाणी - बोल, कथन उपदेश. 5 नसीहत सीपारा 5 तीसहुकड़े विवरण _- बयान प्रतियाँ . 5 जिल्दें मनोरम £ मन को रमानेवाल, मनपसन्द प्रचंड - अति उग्र, भयंकर अचेत - बेहोश,बेख़बर सजग < होशियार, जगा हुआ स्नेह > प्रेम दयानिधि - दया का भंडार मन:स्थिति 5 मन की हालत मुद्रण-कला < छपाई की कला अभ्यास (क) नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर एक वाक्य में लिखिए : कुरआन मजीद किसपर्‌ अवतरित हुआ ?

3. 4 5

- पूर्ण कुरआन कितने वर्षों में अवतरित हुआ ?

संसार में सबसे अधिक कौन-सी पुस्तक पढ़ी जाती है ? क्षुरआन मजीद किसकी वाणी है ?

. -हदीस' किसे कहते हैं ?

हमारी पोधी-5 (669

6. सीपारा का अर्थ समझाइए 7. कुरआन मजीद के अंशों को नबी (सल्ल.) तक लानेवाले प्रतिष्ठित फ़रिश्ते का क्या नाम है?

(ग) उचित शब्द लिखकर वाक्य पूरा कीजिए :

. कुरआन मजीद की भाषा .......... है। * “(फ़ारसी, अरबी) 2. मुहम्मद (सल्ल.) को अल्लाह ने .......... नबी बनाया। (प्रथम, अंतिम) 3. क्कुरआन मजीद की शैली अत्यंत .......... है। '(मनोरम, नीरस) 4. क्कुसआन मजीद में कुल .......... सूरतें हैं। (4, 4) 5. “कुरआन मजीद मूल रूप से .......... की स्थापना चाहता है। (न्याय, मनोरंजन)

ब्र) उत्तर संक्षेप में लिखिए

अल्लाह ने हर ज़माने में अपने दूत (पैग़म्बर) किस लिए भेजे ? कुरआन मजीदं में कुल कितनी सूर्तें हैं ?

सबसे छोटी सूरा कौन-सी है और उसमें कितनी आयर्ते हैं ? सबसे बड़ी सूरा का नाम बताओ उसमें कितनी आयतें हैं ? क्रुरआन मजीद में कुल कितने पारे हैं ?

रुकूअ किसे कहते हैं ?

षा-बोध #) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :

()) प्यारे मबी (सल्ल.) के उपदेशों, आदेशों और उनकी शिक्षाओं को हदीस कहते हैं।

() पवित्र कुरआन माता-पिता, संतान, परिवार, पड़ोस, समाज, राज्य और पूरी मानव-जाति के कर्तव्यों की व्याख्या करता है|

(॥॥) रुको, मत जाओ।

(५) रुको मत, जाओ।

हमारी पोथी-5

उपर्युक्त वाक्यों में ,' का प्रयोग अनेक स्थानों पर किया गया है। इस चिहन (,) अल्पविराम (८०॥००) कहते हैं। अल्पविराम का अर्थ है थोड़ी देर के लिए ठहराव | यह ठहराव उत ही देर के लिए वांछित है जितनी देर 'एक' के उच्चारण में लगती है।

निम्नलिखित वाक्‍यों में अल्पविराम (,) का प्रयोग कीजिए :

सलीम अकरम तनवीर और ताहिर मुम्बई गए।

नहाओ खाओ आराम करो फिर पढ़ने जाना |

नहीं-नहीं मैं ऐसा नहीं करूँगा।

भाइयो और बहनो मुझे आपसे कुछ ज़रूरी बातें कहनी हैं। खाओ मत उठो (खाने से रोकने के अर्थ में)।

खाओ मत उठो (खाने का आदेश देने के अर्थ में)।

पढ़ना है तो पढ़ो नहीं तो सो जाओ।

१202024

हमारी पोथी-5 (68)

पाठ - 6

कबीर के दोहे

साईं इतना दीजिए, जामें कुट्ुम समाय।

मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु भूखा जाय॥

साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप , जाके हृदय साँच है, ताके हृदय आप

दया दिल में राखिए तू क्‍यों. निरदय होय !

साईं के सब जीव हैं कीड़ी कुंजर दोय ॥.

जहाँ दया. वहाँ धर्म है, जहाँ लोभ तहाँ पाप। जहाँ क्रोध तहाँ काल है, जहाँ क्षमा तहँ आप

कबीरा गर्व कीजिए काल गहे कल केस ना जानौ कित मारिहै क्‍या घर क्‍या परदेस

सज्जन जग में कौन है, किसको माना जाय जो चाहे सबका भला, सज्जन वही कहाय

बड़ा हुआ तो क्‍या हुआ, जैसे पेड़ खजूर पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर

दुख में सुमिसन सब करें, सुख में करे कोय जो सुख में सुमिर्न करें, दुख काहे को होय

कुटिल वचन सबसे बुरा, जारि करे तन छार।

साधु वचन जल रूप है, बरसे अमृत धार ॥.

>;ु

(6)

हमारी पोधी-5

शब्दार्थ और टिप्पणी

साईं समाय क्रोध दया जीव

. कुंजर गहै कित सीतल तन बानी पंथी कुटिल वचन

|] ॥|॥ |

का ॥॥ा

मालिक, स्वामी,.ईश्वर- जामें *

समा जाए काल कोप, गुस्सा - निरदय . कृपा, रहमः कीड़ी जीवधारी, प्राणी . गर्ब हाथी केस पकड़े मारिहै - कहाँ सज्जन शीतल, ठंडा - अमृत धार शरीर आपा वचन, बोली . .. सुमिस्न राही, रास्ता चलनेवाला छार टेढ़ी बात कुदुम अभ्यास

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षेप में लिखिए

छ9. # ४० ७-+

संत कबीर ने ईश्वर से कितना माँगा है और क्‍यों ? जहाँ दया, लोभ, क्रोध, क्षमा है वहाँ क्या-क्या होते हैं ? सुख में ईश्वर को याद करने से क्या होता है? कवि के अनुसार सज्जन कौन कहलाता है ?,

खजूर के पेड़ की क्या विशेषता है ? कुटिल व्यक्ति और सज्जन व्यक्ति के वचन में क्या अन्तर है ?

जिसमें

मृत्यु, मौत, कल निष्ठुर, कठोर चींटी

अभिमान

बाल

मारेगा

भला आदमी अमृत की धारा, आबे-हयाः अपनी बड़ाई याद, उपासना राख, भस्म. पंरिवार

हमारी पोथी-5

ब) ख़ाली जगह पूरी कसे :

. . दया दिल में राखिए तूक्‍यों......... 'होय। साईं के सब जीव हैं.कीड़ी कुंजर दोय

2. . कबीरा गर्व कीजिए काल गहे -कल केस ना जानौ कित मारिहै क्‍्या...... क्या परदेस

और काम कबीर के.पाँच दोहे याद करके अपनी कक्षा में सुनाओ।

है: 0282

_ हमारी पोथी-5 (कऊछ>

पाठ - 7 चार यार

इस्लामी राज्य के प्रमुख अधिकारी को “ख़लीफ़ा' कहते हैं। ख़लीफ़ा का अर्थ है नायब : प्रतिनिधि | आम मुसलमानों की सहमति से अपने में से सबसे उत्तम व्यक्ति को ख़लीफ़ा चुना जाता हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि सल्‍लम) के पश्चात्‌ इस्लामी राज्य के चार प्रमुख ख़लीफ़ा ह्‌ हैं- [. हज़रत अबू बक्र (रज़ि.), 2. हज़रत उमर (रज़ि.), 3. हज़रंत उस्मान (रज़ि.) और 4. हज़ः अली (रज़ि.)। इन महापुरुषों ने इस्लामी राज्य का ऐसा आदर्श और कुशल प्रबन्ध किया कि सैकड़ों वर्ष बीतने पर भी दुनिया उन्हें याद करती है। ये अल्लाह के बन्दे तथा हज़रत मुहम्मद (सल्ल के सच्चे अनुयायी और घनिष्ठ मित्र थे। अत: उन्हें 'चार यार' कहा जाता है।

हज़रत अबू बक्र (रज़ि.) : मर्दों में सबसे पहले आपने ही इस्लाम क़बूल किया अँ अल्लाह के आख़री रसूल हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) के परलोक सिधारने के बाद आप ही को सब पहला ख़लीफ़ा नियुक्त किया गया। हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने अपनी बीमारी के दिनों में हज़रत बक्र (रज़ि.) ही को नमाज़ पढ़ाने के लिए इमाम नियुक्त किया | अत: प्यारे रसूल (सलल.) के बा आप ही को सर्वसम्मति से ख़लीफ़ा चुना गया। आप सादा जीवन बिताते | जनता की सुख-सुविधा बड़ा ध्यान रखते | आपको इस्लाम के प्रचार-प्रसार की बड़ी चिन्ता रहती। ख़लीफ़ा होने से पहले कपड़े का कारोबार करते थे। शासन का दायित्त्व जाने के बाद सहाबा ने आपको कारोबार करने: रोक दिया और बैतुलमाल' (सरकारी-कोष) से भरण-पोषण के लिए बज़ीफ़ा निर्धारित कर दिया आप पूरी-पूरी रात इबादत करते और क्कुरआन पढ़ते। दिन में प्राय: रोज़ा रखते। आपका शासनकाः मात्र सवा दो वर्ष (2 रबीउल-अव्वल, सन्‌ ] हिजरी से 23 जुमादल-उख़रा, सन्‌ 3 हिजरी तक

है। *

हज़रत उमर (रज़ि.) : हज़रत अबू बक्र (रज़ि.) के देहान्त के पश्चात्‌ हज़रत उमर (रज़ि. ख़लीफ़ा हुए। हज़रत उमर (रज़ि.) दस वर्ष छह महीना चार दिन (23 जुमादल-उख़रा सन्‌ 3 हिजर से एक मुहर्रम सन्‌ 24 हिजरी तक) ख़लीफ़ा रहे! आप की ख़िलाफ़त उत्तम शासन-व्यवस्था के लि। प्रसिद्ध है। गैर-मुसलिम विद्वान भी इसे इतिहास का आदर्शकाल मानते हैं। हज़रत उमर (रज़ि.) कुरै३ क़बीले के अत्यन्त वीर तथा निडर सरदारों में से थे। अरबवासियों पर आपका बड़ा दबदबा था। कुश्त॑

हमारी पोथी-5 (729

ने, चीर चलाने तथा घुड़सवारी में आप बहुत दक्ष थे। आप चुराई से बहुत घृणा करते थे।

ख़िलाफ़त का भार सँभालने के पश्चात्‌ आपने दुआ की, “'ऐ अल्लाह ! मैं कठोर स्वभाव का मुझे कोमल स्वभाववाला बना दे और मुझे कुरआन की समझ प्रदान कर।'' आप रात-रात भर वेश /लकर आबादियों में गश्त लगाते और जनता के दुखों और कष्टों के बारे में जानकारी प्राप्त करते। हैं आराम पहुँचाने का तुरन्त उपाय करते। आपके राज्य में जनता बड़ी सुखी थी। आस-पास के गा और नरेश तक आपका नाम सुनकर घबरा जाते। थोड़े ही समय में. अनेक देश जैसे- सीरिया, क़, मिस्र, ईरान तथा ख़ुरासान इत्यादि इस्लामी राज्य के अंग बन गए।

हज़रत उमर (रज़ि.) ने न्यायालय, सेना तथा पुलिस के बिभाग स्थापित किए। क़िलों का माण करवाया। अनाथों , बिधवाओं तथा बेसहारा लोगों के भरण-पोषण का प्रबन्ध किया। ठशालाएँ खुलवाई। सड़कों के किनारे तालाब, नहरें तथा कुएँ ख़ुदवाए और मुसाफ़िरखाने बनवाए। लामी ख़लीफ़ा के लिए आपने “अमीरूल मोमीनीन' की उपाधि पसन्द की )

आपका जीवन बड़ा पाकीज़ा तथा सादा था। कुरआन का पाठ कपते समय इतना रोते कि खें सूज जाती )

हज़रत उस्मान (रज़ि.) : हज़रत उमर के पश्चात्‌ हज़रत उस्मान (रज़ि. ) को ख़लीफ़ा चुना आ। आप बड़े विनम्र और लज्ञाशील स्वभाव के थे। प्यारे नबी (सल्ल,) की सुपुत्री हज़रत रुक़्ैया ज़ि.) के साथ आपका विवाह हुआ था, परन्तु कुछ ही दिनों के पश्चातू उनका देहांत हो गया तो गरव मुहम्मद (सल्ल.) ने अपनी दूसरी सुपुत्री उम्मे-कुलसूम (रज़ि.) का विवाह हज़रत उस्मान के 'थ कर दिया। इसी लिए आपको “ज्ुन-नूैन'” अर्थात्‌ दो नूरवाला कहा जाता है। आप अत्यन्त गर, नेक और दानशील थे। आप अरब के सुप्रसिद्ध व्यापारी तंथा धनवान व्यक्ति थे। बड़े ठाट-बाट जीवन बिताते थे, परन्तु ईमान लाने के पश्चात्‌ सारा ऐश आराम त्याग दिया और अपनी दौलत लाम की सेवा में लगा दी। हे

मुसलमानों की आबादी जब अधिक हो गई तो आपने मसूजिदे-नबवी के आस-पास के कान और ज़मीने ख़रीदकर मसूजिद का विस्तार करवाया। आपने सड़कों » पुलों और मुसाफ़िर्खानों निर्माण करवाया। सरकारी काम-काज के लिए इमारतें बनवाईं। खैबर की ओर से बाढ़ की शशंका को दूर करने के लिए एक मज़बूत बांध बनवाया। कुरआन का प्रचार-प्रसार करने का उत्तम ब्रंध किया |

हमारी पोथी-5 (532

आप अपने घर में कुरआन का पाठ कर रहे थे, उसी समय कुछ विद्रोही घर में घुस आए आपको शहीद कर दिया। आपका शासनकाल बारह वर्ष (4 मुहरम सन्‌ 24 हिजरी से ज़िलहिज्जा सन्‌ 35 हिजरी तक) था।

हज़रत अली (रज़ि.) : हज़रत अली (रज़ि.) को इस्लामी राज्य का चौथा ख़लीफ़ा गया। हज़रत अली का विवाह हमारे रसूल (सल्ल.) की सबसे छोटी बेटी हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (रा) से हुआ था। हज़रत हसन (रज़ि.) और हुसैन (रज़ि.) आप ही के सुपुत्र थे। जब अल्लाह के रर्‌ (सल्ल,) तबूक की लड़ाई के लिए जाने लगे तो हज़रत अली (रज़ि.) को घरवालों की देख-रेख लिए मदीना में छोड़ दिया और फ़रमाया, “अली ! तुम मेरे लिए ऐसे हो जैसे हारून मूसा के लिए थे प्यारे रसूल फ़रमाते थे, “जिसने अली को मित्र बनाया उसने मुझे मित्र बनाया और जिसमे मुझे बनाया उसने अल्लाह को मित्र बनाया।”'

हज़रत अली (रज़ि.) पाँच वर्ष (2] ज़िलहिज्जा सन्‌ 35 हिजरी से 20 रमज़ान सन्‌ हिजरी तक) ख़ंलीफ़ा रहे आपको भी एक अभागे ने शहीद कर दिया।

इस प्रकार इन चारों महापुरुषों ने शासन-प्रबंध जिस कुशलता और बुद्धिमत्ता के साथ किय इतिहास में ऐसे आदर्श शासन का उदाहरण नहीं मिलता। इन चारों ख़ुलफ़ा (ख़लीफ़ाओं) के बाद शासन-कार्य ख़िलाफ़त के नाम से ही चलता रहा, लेकिन बाद के शासक शासन-प्रशासन के माम में अपनी योग्यता और आदर्श चरित्र प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसके कारण वे आदर्श ख़लीफ़ा रहे। भौतिकवादी बादशाहों और राजाओं का रंग-ढंग अपनाते चले गए। इस्लामी शासन-प्रणाली ख़लीफ़ा का चयन जनता द्वारा होता था, परन्तु कालान्तर में बादशाहों का वंशानुगत शासन आरंभ: गया। राज्य-कोष (बैतुलमाल) आम जनता की सम्पत्ति होकर बादशाह की व्यक्तिगत सम्पत्ति

गई।

शासन-तंत्र में बहुत-सी ख़राबियाँ जाने के बावजूद इन बादशाहों में भी अनेक लो : उदार, विद्वान और जनहित के लिए सर्वस्व निछावर करनेवाले हुए।

शब्दार्थ और टिप्पणी ख़लीफ़ा.. + प्रतिनिधि... कुशल - माहिर घनिष्ट मित्र - गहरा दोस्त अनुयायी - उम्मती, पैरवी करनेवाला निर्माण. - तामीर प्रबंध - इन्तिज़ाम *

हमारी पोथी-5 (749

शासन-तंत्र < हुकूमत सर्वस्व -< सब कुछ

निछावर < कुरान - घृणा - नफ़रत दायित्त्व - ज़िम्मेदारी आदर्श <. मिसाली कक्ष - माहिर नरेश - राजा, सरदार उदार खुलेदिलका . आशंका + डर, सन्देह विद्रोही बागी तत्पश्वाता >> इसके बाद सुचारू अत्यन्त सुन्दर

अभ्यास

ऋ्र) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए:

७6 (७ + ०० [७ ७५

. ख़लीफ़ा किसे कहते हैं ?

- ख़लीफ़ा का चुनाव कैसे होता है ?

. चार यार कौन थे ? उनको इस नाम से क्यों पुकारा जाता है ?

, सबसे पहले ख़लीफ़ा का नाम बताओ ? उन्होंने कितने वर्ष ख़िलाफ़त की ? . हज़रत उमर (रज़ि.) की ख़िलाफ़त के ज़माने की चार विशेषताएँ बताइए।

. हज़रत उस्मान (रज़रि.) को ज़ुन-नूरैन (दो नूर॒वाला) क्यों कहा जाता है ?

. प्यारे नबी (सल्ल.) ने हज़रत अली (रज़ि.) के विषय में क्या फ़रमाया ?

ख) ख़ाली जगहों को भरिए :

6०0 न्‍य ०७४५ (४ + ४० (७ --

. हज़रत अबू बक्र (रज़ि.) ...........---- के आराम का बड़ा ध्यान रखते थे। : ख़लीफ़ा होने से पहले अबू बक्र (रज़ि.)............- का कारोबार करते थे। , हज़रत उमर (रज्ि.) ..... «००३६० रूस००बबस्व>- हलितिन- वर्ष ख़लीफ़ा रहे। . हज़रत उमर (रज़ि.) की ख़िलाफ़त ..........-- व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है| . हज़रत उमर (रज्ि.) के राज्य में जनता बड़ी ..........-..५५००--०--+-*« थी। . हज़रत उस्मान (रज़ि.) अत्यन्त उदार, नेक और .................-०--*- थे। . हज़रत उस्मान (रज़ि.) ने मस॒ूजिदे-नबवी का

. हज़रत अली (रज़ि.) ................-----०--००-०-०--- वर्ष ख़लीफ़ा रहे। .

हमारी पोथी-5 (759

. (ग) नीचे कुछ कथन दिए गए हैं। कथन के सामने कहनेवाले का नाम लिखिए :

. “मुझे कुरआन की समझ प्रदान कर दे।” ( ) 2. “अली! तुम मेरे लिए ऐसे हो, जैसे हारून मूसा के लिए थे।' ( ) 3. “जिसने मुझे मित्र बनाया, उसने अल्लाह को मित्र बनाया!” ( ) 4. मुझे कोमल स्वभाववाला बना दे।”” (्‌ )

भाषा-बोध

(क) निम्नलिक्ति वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए : असलम धीरे-धीरे बोला। रहीम पढ़ते -पढ़ते सो गया।

- घोड़ा तेज़ दौड़ता है। वे हँसते-खेलते जा रहे थे।

उपर्युक्त वाक्यों में क्रमशः “धीरे-धीरे” 'पढ़ते-पढ़ते', तेज़' और “हँसते-खेलते' शब्द क्रिर की विशेषताओं को बता रहे हैं कि क्रिया किस प्रकार हो रही है। क्रिया की विशेष बतलानेवाले शब्दों को क्रिया-विशेषण कहते हैं। क्रिया-विशेषणवाले पाँच वाक्य लिखकर अपने शिक्षक को दिखाइए।

(ख) यदि एक वचन शब्द के अन्त में दीर्घ (बड़ा) “ऊ' (,) हो तो उसके बहुबच रूप में हस्व (छोटा) उ' (.) हो जाता है। जैसे : ताऊ --ताउओं, टापू - टापु३ आदि।

इसी प्रकार निम्नलिखित शब्दों के बहुअचन रूप लिखिए :

जुगू ४८. कन्‍चन्‍-न्‍---- आँसू «८. न्‍न्‍---++--- झाड़ू ८5८ चनययण चोक़ू 3. « नर" ललेट2त++ भालू बन्‍चचजजजन-5 प्याऊ ८. --+--“>++--- कुछ और काम

चार यार अर्थात्‌ चारों ख़लीफ़ाओं से सम्बन्धित और अंधिक जानकारी अपने शिक्षक माता-पिता या किसी पुस्तक से प्राप्त कीजिए।

१7 82024

हमारी पोथी-5

पराठ-8

पर्यावरण की सुरक्षा

हमारी धरती के चारों ओर वायु की एक मोटी परत है। उसे वायुमंडल या वातावरण कहते हैं। ग़रे जीव-जन्तु और पेड़-पौधे इसी वायुमंडल में जीवित रहते हैं। अल्लाह ने जीवन के सभी साधन ग़तावरण से जोड़ दिए हैं। हवा, पानी, धरती, जीव-जन्तु, पेड़-पौधे इत्यादि हमारे जीवन के साधन |। इन साधनों में परस्पर गहरा सम्बन्ध है। इनसे वातावरण में संतुलन बना हुआ है। यह संतुलन हमारे जीवन के लिए उपयोगी है।

इनमें से कोई चीज़ हमारे लिए बेकार नहीं-है। इनमें प्रत्येक चीज़ के बीच परस्पर अन्योन्याश्रित तंबंध है। इनके इस संबंध को अगर क्षति पहुँचाई जाती है या इनमें से किसी को नष्ट कर दिया जाता है गे सारा संतुलन बिगड़ जाता है। केवल मनुष्य ही नहीं, पशु-पक्षी, कीड़े-मकोड़े तथा वनस्पति के. जीवन के लिए भी संकट उत्पन्न हो जाता है। धरती के आस-पास उपस्थित से प्राकृतिक साधनों को

हमारी पोथी-5 (772

पर्यावरण कहा जाता है। उसकी सुरक्षा करना जीव-जन्तुओं की अस्तित्व-रक्षा के लिए अनिवार्य है।

मानव अपना स्वार्थ साधने के लिए विभिन्‍न प्रकार से पर्यावरण के संतुलन को बिगाड़ता और पर्यावरण को प्रदूषित या क्षतिग्रस्त करके अपने जीवन के लिए संकट उत्पन्न कर लेता है। उसके अपने हाथों की कमाई है, जिससे जल और थल में बिगाड़ और फ़साद फैल गया है।

पर्यावरण के प्रदूषित होने के अनेक कारण हैं। एक ओर घरेलू सतह पर अशिक्षा और अज्ञाना की प्रमुख भूमिका है तो दूसरी ओर शिक्षित लोगों की स्वार्थपरता और उत्तरदायित्वहीनता भी इस5 कारण है। हम सावधानी बरतकर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। प्राय: हम देखते हैं लोग अपने घरों के आसपास कूड़ा-कचरा डाल देते हैं। फलों के छिलके, सब्ज़ी के डंडल और उपयो में आनेवाले अन्य पदार्थों के सड़ जाने के कारण उनमें दुर्गध पैदा होती है और कीड़े पड़ जाते है उनपर मक्खियाँ बैठती हैं। वही मक्खियाँ हमारे घरों में आती हैं। उनके साथ रोगाणु हमारे घरों भोजन की वस्तुओं तक पहुँच जाते हैं। इससे तरह-तरह के रोग फैलते हैं। दुर्गध से हवा प्रदूषित होः है। उसी प्रदूषित हवा को हम साँस के द्वारा अपने शरीर के अन्दर ले जाते हैं। इससे हमारा स्वास्थ बिगड़ जांता है। हम नालियों में गन्दगी बहा देते हैं जो प्राय: खुले होते हैं। कुछ लोग उसी में मल-मृ भी डाल देते हैं। इससे भी हमारे पास-पड़ोस में गन्दगी फैलती है। '

कूड़ा-कचरा फेंकने और नालियों की सफ़ाई की समुचित व्यवस्था की जानी चाहिए। जह सरकार की ओर से कूड़ेदान, पक्की नालियाँ और सफ़ाई की व्यवस्था नहीं है, वहाँ स्थानीय निवासिर को पारस्परिक सहयोग से इन चीज़ों की व्यवस्था करनी चाहिए। जनसाधारण को भी सफ़ाई प्रशिक्षण देकर उनको जागरूक बनाना चाहिए, ताकि वे अपनी.असावधानी से गन्दगी फैलाएँ।

कल-कारख़ाने, मोटर गाड़ियाँ, रेल गाड़ियाँ, हवाई जहाज़ इत्यादि के धुएँ और उन आवाज़ों से भी प्रदूषण फैलता है। उनसे निकलनेवाली आवाज़ों से वायु में तीव्र कम्पन उत्पन्न होता है इसी प्रकार लाउड स्पीकर और तरह-तरह के बाजे, ढोल-धमाके, पटाख़े इत्यादि से भी बातावरण ध्वनि प्रदूषण फैलता है। धुएँ और रासायनिक ईंधनों से उत्पन्न विषैली गैसें हवा को दूषित करती हैं। सारी चीज़ें मनुष्यों, अन्य जीव-जन्तुओं तथा वनस्पतियों के लिए भी हानिकारक होती है। इसके कारए अनेक प्रकार के जीव-जन्तुओं की नस्‍्लें समाप्त होने के कगार पर हैं और कोमल पेड़-पौधे कुम्हला रा हैं। वायु-प्रदूषण के कारण श्वास-रोग, हृदय रोग, दृश्हीनता इत्यादि-होते हैं।

कल-कारखानों के रासायनिक कचरों को नालियों द्वारा नदियों में बहा दिया जाता है। इसर नदियों का जल विषाक्त हो जाता है। वह मनुष्य के उपयोग के लायक़ नहीं रहता। मछलियाँ और अन्र

हमारी पोथी-5

नीय जीव मर जाते हैं। विषाक्त जल पेड़-पौधों के लिए भी हानिकारक होता है। अत: कल- रख़ानों को आबादी से दूर स्थापित करने और उनसे उत्पन्न कचरों को नदियों के बजाय दूसरी जगह लने का उपाय किया जाना चाहिए। विश्व स्वास्थ्य संगठन (५४प्र0) की रिर्पोट के अनुसार, मनुष्य में जनेवाले 90 प्रतिशत रोगों का कारण जल-प्रदूषण ही होता है। पेट की बीमारियाँ, रक्तचाप, रोग, आँख, गले और छाती के अधिकतर रोग प्रदूषित जल के कारण ही होते हैं।

जंगलों का क्षेत्रफल दिन-प्रतिदिन कम होता जा रहा है, क्योंकि कृषि-भूमि, गृह-निर्माण और के लिए पेड़-पौधे काटे जा रहे हैं। इस कारण वायु में कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक़ त्रों का अनुपात बढ़ रहा है। धूप और गरमी में वृद्धि तथा वर्षा में कमी हो रही है | जंगली जानवरों अनेक प्रजातियों का विनाश हो रहा है। इससे धरती के सारे जीव-जन्तुओं पर बुरा प्रभाव पड़ रहा धरती की उर्वरा-शक्ति क्षीण हो रही है। उपजाऊ भूमि के बंजर और रेगिस्तान बन जाने का ख़तरा है गया है। फलत: वातावरण में असंतुलन उत्पन्न हो गया है।

अत; नए जंगल आबाद करने तथा ज़्यादा से ज़्यादा पेड़-पौधे लगाए जाने चाहिएँ प्षारोपण-अभियान में हम सबको शामिल होना चाहिए। यह हर्ष का विषय है कि वृक्षारोपण के प्रति 7 जागरूंक हो गए हैं। हर वर्ष सामाजिक संस्थाओं और सरकारी योजनाओं के अन्तर्गत बड़े पैमाने : वक्षारोपण-अभियान चलाया जाता है। हमें भी आगे बढ़कर उसमें भाग लेना चाहिए। जीव- सुओं की नस्‍्लों की सुरक्षा के भी उपाय किए जा रहे हैं। धनवानों की विलासितापूर्ण ज़िन्दगी भी विरण को क्षति पहुँचाती है। वातानुकूलित कमरों और होटलों की अनावश्यक वृद्धि से जल-संपदा कमी होती है। एक कमरे को ठण्डा करने के लिए जितने पानी का उपयोग होता है उतने पानी से कड़ों लोगों की प्यास बुझ सकती है। सारा पानी धरती के अन्दर से निकाला जाता है। इसलिए धरती अन्दर पानी की सतह नीची हो रही है। कुएँ सूख रहे हैं। मनुष्य और पशुओं के लिए जल-आपूर्त्ति समस्या विकराल रूप धारण कर रही है।

विकसित देशों ने अपने आणविक परीक्षणों और आयुधों की तैयारी के कार्यक्रम से महासागरों वायुमंडलीय ओज़ोन परतों को भारी क्षति पहुँचाई है। सूर्य की विषैली किरणों के रिसाव के कारण का जल दूषित हो रहा है और धरती के जीव-जन्तु और मिट्टी तथा वनस्पतियाँ रुणण और मृतप्राय रही हैं। विश्व के वैज्ञानिकों की चीख़-पुकार के बावजूद इस प्राणघाती आपदा को टालने की कोई रगर व्यवस्था नहीं हो पा रही है। महाशक्तियाँ अपना वर्चस्व बनाए रखने के लिए लगातार अपनी 'माणु शक्तियों में दिन दूनी रात चौगुनी वृद्धि कर रही हैं। इससे आणबिक ताप के बिकिरण में वृद्धि हो है है। स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है। अपंग शिशुओं के जन्म में वृद्धि आदि इसी के दुष्परिणाम

हमारी पोथी-5 (79)

को

जब तक मानव के अन्दर अपने रब के प्रति उत्तरदायित्व की भावना उत्पन्न नहीं होगी, ; तक मनुष्य अपने स्वार्थ और हानिकारक क्रिया-कलापों का त्याग नहीं कर सकता। बाहरी उपायों साथ-साथ मानव के मन की भावना को बदलमे की भी आवश्यकता है।

विश्व के साधनों का मालिक मनुष्य नहीं बल्कि अल्लाह है। लेकिन अज्ञानतावश मनुष्य रू को मालिक समझकर अपनी इच्छा से बिना रोक-टोक उसका दुरुपयोग करता है। इससे प्रकृति असंतुलन उत्पन्न होता है और विभिन्‍न प्रकार की विकृतियाँ फैलती हैं। अल्लाह की बनाई-सँवारी' इस दुनिया को इनसान अपने हाथों से बिगाड़ रहा है। दुनिया का मालिक इसे पसन्द नहीं करता है * उसकी दुनिया में फ़लाद और बिगाड़ फैले।

अत: प्रकृति में गड़बड़ी पैदा करने और प्राकृतिक साधनों का अनुचित उपयोग करने आखिरी पैग़म्बर और मानव-जाति के शुभचिन्तक हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने लोगों को रोका : साधनों को सुरक्षित रखने, उनके विकास में योगदान देने और उनसे सबको लाभ पहुँचाने की शिक्षा - है। ऐसा करने पर हम उन संपदाओं से स्वयं भी लाभ उठाएँगे और दूसरों को भी लाभ उठाने का अबः देंगे, क्योंकि रब की पैदा की हुई हर चीज़ पर सबका समान अधिकार है। सिर्फ़ अपने हित के लिए दूसरों का अधिकार नहीं छीनेंगे। जब यह भावना मनुष्य में पैदा होगी तभी दुनिया में सुख-चैन स्थापना हो सकती है, पर्यावरण में फैल रहे प्रदूषण पर नियंत्रण किया जा सकता है।

आज पर्यावरण के प्रदूषण का मुख्य कारण सिर्फ़ अशिक्षा और अज्ञानता है, बल्कि ज़्यादा ज़्यादा धन कमाने की होड़ में प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन भी है।

शब्दार्थ और टिप्पणी

* संतुलन + ठीक तालमेल, ठीक हालत में संकट. + मुसीबत

कीठाणु -< जरासीम, अत्यन्त सूक्ष्म कीड़े प्रदूषण - गन्दगी, आलूदगी तीब्र - तेज़ दृष्छिनता < अन्धापन

विषाक्त + ज़हरीला आणविक - एटमी, जौहरी आयुध - लड़ाई के औज़ार, हथियार र्ग्ण - रोगी, बीमार मृतप्राय - मरे हुए जैसा अपंग - विकलांग, अपाहिज प्रजनन < पैदाइश उत्तरदायित्व - ज़िम्मेदारी

* योगदान - मदद, सहायता अन्योन्याश्रित < एक दूसरे पर आश्रित

हमारी पोथी-5 (80 >

स्तेत्व-रक्षा रर्थपरता स्परिक - लासितापूर्ण दा

पदा युमण्डल

स्पति गविरण गणु गरूक

प-रोग

5४) एक वाक्य में उत्तर लिखिए:

. वायुमंडल किसे कहते हैं ? . पर्यावरण की सुरक्षा से क्या तात्पर्य है ?

बुजूद की हिफ़ाज़त क्षतिग्रस्त . खुदार्ज़ी समुचित आपसी क्षीण ऐश-मस्ती से भरपूर वातानुकूलित - दौलत विकराल मुसीबत, संकट विकिरण पृथ्वी के चारों ओर फैली वायु वातावरण की परत उर्वरा-शक्ति पेड़-पौधे भूमिका वातावरण, परिस्थिति... उत्तरदायित्वहीनता रोग के किटाणु प्रशिक्षण सजग, जाग्रत रक्त-चाप , चमड़े की बीमारी प्रजातियाँ अभ्यास

. हमारे पास-पड़ोस में गन्दगी कैसे फैलती है ?

] 2 3. वायु-प्रदूषण क्या है ? 4 5

.. वृक्षारोपण-अभियान क्यों चलाया जाता है ?

वर) संक्षेप में उत्तर लिखिए : . जल-प्रदूषण से कौन-कौन से रोग फैलते हैं ? 2. ध्वनि-प्रदूषण कैसे फैलता है ? 3. जंगल तेज़ी से क्यों समाप्त हो रहे हैं ? 4

नुक़सान पहुँचाया हुआ मुनासिब ,

कमज़ोर

माहौल के.मुताबिक़ बहुत बड़ा, ख़ौफ़नाक ताप

पृथ्वी के चारों ओर की वायु उपज-शक्ति, उपजाऊपन हिस्सा, योगदान

गैर ज़िम्मेदारी

तरबियत, ट्रेनिंग

ब्लड प्रेशर

नस्लें

. जंगली जानवरों की अनेक प्रजातियों का विनाश क्यों हो रहा है ?

हमारी पोथी-5

5. वातावरण का संतुलन किन-किन साधनों पर निर्भर करता है ? 6. वातावरण का संतुलन किन कारणों से बिगड़ रहा है ? 7. पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति हमारा क्या दायित्व है?

(ग) ख़ाली जगहों को भरो : %-7 हमे. ७६०३० बरतकर पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं। 28587 ७०२ १३४६ जल पेड़-पौधों के लिए भी हानिकारक होता है। 3. रब की पैदा की हुई हर चीज़ पर सबका समान ................ है।

4. पर्यावरण में फैल रहे .............. पर नियंत्रण किया जा सकता है। 5. इस दुनिया को अपने हाथों से बिगाड़ रहा है।

भाषा-बोध

(क) किसी शब्द के अन्त में कुछ वर्ण, शब्दांश या शब्द जोड़कर एक नया शब्द बनाया जाता है अन्त में जोड़े जानेवाले शब्दांश को प्रत्यय कहते हैं, जैसे: संसार + इक - सांसारिक।

निम्नलिखित शब्दों में 'इक' प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाएँ। ध्यान रहे कि इक प्रत्यय लग से शब्द के प्रथम अक्षर में 'आ' की मात्रा बढ़ जाती है।

व्यहहार +. इक - . व्यावहारिक परस्पप +. इक नव मर्म + इक घ् धर्म +.. इक कल्पना + इक * लक्षण + ड्क ञ्ः

अणु + इक

हमारी पोथी-5 (829)

$ और काम

]. अपने शिक्षक की सहायता से पर्यावरण की सुरक्षा से सम्बंधित प्यारे स्मूल (स्लल.) की शिक्षाओं को अपनी कॉपी में संकलित कीजिए।

2. विश्व के स्रष्ट ने पर्यावरण को संतुलित बनाया है, लेकिन मनुष्यों ने उसमें असंतुलन पैदा कर दिया है। संतुलित पर्यावरण से होनेवाले दो लाभों को एक तालिका में और असंतुलित पर्यावरण से होनेवाली दो हानियों को दूसरी तालिका में लिखिए

3. पर्यावरण के सम्बन्ध में प्यारे रसूल (सलल.) की कुछ हदीसें अपने शिक्षक से पूछकर कॉपी में लिखिए।

१३ :92॥

हमारी पोथी-5

पाठ - 9

मचा है क्‍यों जग में अंधेर?

गया है फैल अनीश्वरवाद, भेड़िये फिरते हैं आज़ाद। . छोड़कर एकेश्वरवाद, गढ़ लिए नए बहुत-से बाद॥ भा गए सबको खट्टे बेर। इसी कारण है यह अंधेर॥ सिखाता है नवीन विज्ञान, सताएँ निर्बल को बलवान। बने हैं जग-नेता अज्ञान, चलाते हैं मनगढ़ंत विधान॥ देवता बने हैं धनी कुबेर। मचा है इस कारण अंधेर॥, जमगत्‌-जन हैं इतने अनभिज्ञ, धूर्त को कहते हैं नीतिज्ञ। छल-कपट पर निर्भर वाणिज्य, छली का नाम निपुण और विज्ञ लोमड़ी कहलाती है शेर।. तभी तो मचा है यह अंधेर॥ कामना है मेरी भगवान, सुनाऊँ मैं सबक़ो क्रुरआन। जगतू में फैले सच्चा ज्ञान, विधाता तेरा चले विधान॥ प्रभु! संयमियों के दिन फेर। मिटे दुनिया का सब < अंधेर॥

-- संकलि

हमारी पोथी-5

च्दार्थ और टिप्पणी

अनीश्वरवाद > नास्तिकता अनभिज्ञ - बेख़बर, अनजान छ्ली - धोखेबाज़ संयमी < मुक्तक़ी, परहेज़गार कामना - इच्छा, तमन्ना निर्भर -< आश्रित विधान नियम वाद - मत, विचारधारा कुबेर - धन के देवता हे धूर्त - मकक़ार, फ़रेबी नीतिज्ञ + नीति (अख़लाक़) का जाननेवाला वाणिज्य + व्यापार, तिजारत निषुण - माहिर, दक्ष विज्ञ - बहुत ज्ञानी एकेश्वरवाद < तौहीद, यह मत कि जगत्‌ का विधाता < बनानेवाला स्रष्टा और संहारक एक ही है अभ्यास

5) एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

. भेड़िये आज़ाद क्यों फिरते हैं ?

2. विज्ञान क्या सिखाता है?

3. छल-कपट पर कौन-कौन-सी बातें आश्रित हो गई हैं ?

4. कवि की क्‍या कामना है ?

5. कवि ने दुनिया का अंधेर मिटाने के लिए अपने प्रभु से क्या प्रार्थना की है ?

ज्र) निम्नलिखित वाक्यों में से सही वाक्यों के सामने सही (४ ) का निशान और ग़लत वाक्‍्यों के सामने गलत (»८) का निशान लगाइए :

. अनीश्वरवाद के फैलने से भेड़िये आज़ाद फिरते हैं

. सबको खट्टे बेर भा गए, इसी कारण अंधेर फैला है।

. नवीन विज्ञान बलवानों को यह नहीं सिखाता कि निर्बलों को सताएँ। . जगत्‌ के नेता ज्ञानी लोग ही बने हैं।

« सारे कारोबार छल-कपट पर निर्भर हैं।

पा + ++

हा ल्‍ि5 ल्‍ 5 “5 “5 ले डी अल >> >>

हमारी पोथी-५ (859

(ग) निम्नलिखित पंक्तियों के रिक्त स्थानों में उच्चित शब्द लिखिए :

(7) छल-कपट पर निर्भर वाणिज्य, छली का नाम .......... और विज्ञ॥ (2) जगत्‌ में फैले ....... हा ज्ञान, विधाता तेरा चले विधान॥ (3) . प्रभु! संयमियों के दिन फेर, मिटे दुनिया का सब ............

भाषा-बोध

(क) नीचे कुछ शब्द और उनके विलोम दिए गए हैं। इन्हें ख़ूब अच्छी तरह पढ़िए 3 समझिए तथा इसी तरह के पाँच नए शब्द लिखकर उनके विलोम शब्द लिखिए अं

अपने शिक्षक को दिखाइए

उदाहरण :

निर्बल < बलवान . अनभिज्ञ 5. भिज्ञ उचित +- अनुचित आशा -. निशशा उदय £८: अस्त . अज्ञान - ज्ञान

(ख) स्तम्भ क' के शब्दों के समानार्थी शब्द स्तम्भ ख' में दिए गए हैं। सही जो

लगाइए : | स्तम्भ का स्तम्भ ख'

निर्बल चन्द्रिका कामना विश्व जगत्‌ फूल

पुष्प कमज़ोर चाँदनी ड्च्छा

0:09: 0:28

हमारी पोथी-5 (5869

पराठ- 20 प्यारे नबी (सल्ल.) का देश

हमारे देश के पश्चिम में अरब देश है। इसी देश के 'मक्का' नगर में मानवता के उद्धारक, तिम ईशदूत हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि सल्‍लम) पैदा हुए। उनके द्वारा लाई हुई ईश्वरीय योति के द्वारा संपूर्ण संसार से अज्ञानता का अंधकार दूर हुआ। इसी नगर में ईश्वरोपासना का पहला 'काबा' है, जिसकी ओर मुँह करके सारे संसार के मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं। हर वर्ष 'हज' करने सार के कोने-कोने से लाखों नर-नारियाँ वहाँ जाते हैं और अपने प्रभु के प्रति अपनी अपार श्रद्धा और क्ति दशति हैं।

अरब संसार का सबसे बड़ा प्रायद्वीप है। इसका क्षेत्रफल लगभग 8,65,000 वर्गमील है। सके उत्तर में कुबैत, इराक़ और जॉर्डन हैं, दक्षिण में यमन गणराज्य और ओमान हैं; पूर्व में संगुक्त परब इमारात, क़तर और बहरैन हैं और पश्चिम में लाल सागर लहराता है। "

अरब के अधिकतर भाग में रेत के बड़े-बड़े मैदान है। रेत के इन मैदानों को रेगिस्तान या मरुभूमि' कहते हैं। उत्तर-दक्षिण में पर्वत श्रृंखला है, जिससे जगह-जगह झरने और जलम्रोत फूटते हैं। झरनों के आस-पास गाँव बस गए हैं। यहाँ खजूर के पेड़ और हरियाली पाई जाती है। रेगिस्तान का भाग “नख़लिस्तान' या “मरुद्यान' कहलाता है। कर्क रेखा अरब के मध्य भाग से गुज़रती है। अतः हाँ अप्रैल से जुलाई तक बहुत तेज़ गर्मी पड़ती है। रेगिस्तान में बड़े-बड़े तूफान आते हैं। वर्षा होने पर गिस्तान के बड़े भाग में घास उग आती है। इन मैदानों में वहाँ के देहाती बहू अपने मवेशियों को चराते १।

अरब के लगभग सभी भागों की जलवायु शुष्क है। अतः वहाँ गर्मियों में तेज़ गर्मी और जाड़े में फ़ड़ाके की सर्दी पड़ती है। दिन और रात के तापमान में भी काफ़ी अन्तर होता है। ऐसी जलवायु में इरी-भरी खेतियाँ संभव नहीं। वहाँ तो दूर-दूर तक हरे-भरे पेड़-पौधों का नामो-निशान नहीं मिलता। $टीली झाड़ियाँ और लम्बी घास पाई जाती हैं। जिन क्षेत्रों में वर्षा होती है या कुओं और जलाशयों से संचाई की जाती है, वहाँ हरियाली पाई जाती है। फलों के बाग़ हैं, लेकिन अरबवासियों का मुख्य धन्धा नख़लिस्तानों में खेती करना, चरागाहों में भेड़, बकरी, ऊँट, ख़च्चर आदि का पालना और व्यवसाय रहा है।

यहाँ ऊँट का बड़ा महत्त्व है क्योंकि वह बिना चारे और पानी के कई दिनों तक ताज़ा दम रह प्कता है। अपने पैरों की विशिष्ट बनाबट के कारण वह बालू पर सरलता से तेज़ चलता है। रेगिस्तानी

हमारी पोथी-5 (872

हि सऊदी अरब #& मदीना

रिवाज़ «*

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सनआ है]

| सबियाँ ०... 2नजरान स्ले /०*-- सह ५,

3... देक्षिण यमन

क्षेत्रों में यात्रा करने और सामान ढोने में वह बड़ा सहायक है। इसी कारण उसे रेगिस्तान का जहाज़ कहा जाता है। घोड़ा, गधा और ख़च्चर भी वहाँ पाले जाते हैं। अरब का घोड़ा अत्यन्त सुन्दर होता और स्वामी-भक्ति के लिए संसार भर में प्रसिद्ध है। पक्षियों में गरूड़, गिद्ध, शिकड़े, हुदहुद, कबूत और कौए मुख्य रूप से पाए जाते हैं। रेगिस्तानी इलाक़ों में टिड्डियाँ बहुत होती हैं। कुछ भागों में तेंदुआ भेड़िया, लोमड़ी, गोह और विभिन्‍न प्रकार के विषैले सर्प भी पाए जाते हैं। अरब अत्यंत प्राचीन और महत्त्वपूर्ण देश है। विश्व के मानचित्र में अरब का स्थान आबार्द वाले बड़े भू-भागों के मध्य में है। प्राचीन काल से ही संसार की सबसे घनी आबादी इसी वे आस-पास रही है। ऐसा माना जाता है कि आरंभिक मानव की आबादी इसी के आस-पास के क्षेत्र तक सीमित थी। विकास के साथ-साथ यह आबादी दूर तक फैलती चली गई। मेसोपोटामिया, मिस्र यूनान, रोम, ईरान, भारत और चीन--ये प्राचीन सभ्यताओं के केन्द्र रहे हैं जो अरब के चतुर्दिक फैल हुए हैं। अति प्राचीन काल से ही अरबवासियों का सम्बन्ध बाहरी संसार से रहा है। यह वह भू-भाग है जिसके आस-पास ईश्वर के सबसे अधिक सन्देष्टा (पैग़म्बर) आए। यहाँ से सारी मांनव-जाति के

हमारी पोधी-5

बर का सन्देश पहुँचाया गया। अल्लाह ने अपने अंतिम पैग़म्बर के लिए भी इसी पवित्र भू-भाग का किया। प्राचीनकाल से ही हज़रत इबराहीम द्वारा निर्मित काबा' एक सर्वशक्तिमान ईश्वर के त्तों का केन्द्र था। ईश्वर ने फिर से उसे सारी मानवता का केन्द्र बना दिया।

आज से लगभग डेढ़ हज़ार साल पूर्व अरब में प्यारे नबी (सल्ल.) द्वारा इस्लाम की पुनर्स्थापना हज़रत इबराहीम की इस्लामी शिक्षा को लोग भुला बैठे थे। अल्लाह की इबादत करने के तिरिक्त बहुत-से बुतों को पूजने लगे थे। चारों ओर अज्ञान और अन्याय का राज्य स्थापित हो गया आबादी क़बीलों में बँट गई थी। क़बीलों के सरदार अपनी इच्छा के अनुसार अपने क़बीलों पर सन करते थे। दूसरे क़बीलों से मतभेद होने पर युद्ध होते रहते थे। प्रतिशोध की भावना से बे निरंतर इते रहते थे।.वे अत्यन्त बहादुर और निडर थे। उनमें जनसेवा और अतिथि-सत्कार की प्रबल भावना थी। उनमें पढ़ने-लिखने का रिवाज बहुत कम था। अंतिम पैग़म्बर हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) ने अल्लाह के आदेश से लोगों तक सत्य का सन्देश चाया। इस्लाम का प्रचार किया। आरंभ में थोड़े-से लोगों के सिवा अधिकांश लोगों ने उनका ऐेध किया। उन्हें यातनाएँ दी गईं। प्यारे नबी इन विरोधों और अत्याचारों के बीच सत्य और न्याय * सन्देश लोगों को देते रहे। ईश्वर की कृपा से थोड़े ही दिनों में अरब में इस्लाम फैल गया। इस्लाम द्वारा अरब में सर्वप्रथम क़ानून की सत्ता स्थापित हुई। मानव-अधिकार और नैतिक आचार नेश्चित किए गए। क्रुरआन के द्वारा शिक्षा-दीक्षा का उत्तम प्रबन्ध किया गया। लिखने-पढ़ने का बग्राज आम हो गया। लोगों के रहन-सहन और विचारों में नया बदलाव आया। न्याय, क़ानून, त्रानता, भाईचारा और स्वतंत्रता का स्वर्णिम युग आया। संपूर्ण विश्व पर इसका.व्यापक प्रभाव पड़ा। रे-धीरे इस्लाम संसार के लगभग सभी देशों में फैल गया और अपने विशिष्ट गुणों और सरलता के रण आज भी फैल रहा है। | वर्त्तमान अरब प्रायद्वीप में सऊदी अरब के अतिरिक्त अनेक छोटे-छोटे स्वतंत्र मुस्लिम राज्य हैं। सऊदी अरब सबसे बड़ा है और अरब प्रायद्वीप के 80 प्रतिशत भू-भाग पर फैला हुआ सन्‌ 902 ई. में शाह सऊद परिवार के एक साहसी व्यक्ति अब्दुल अज़ीज़ अल-सऊद ने वर्तमान ए्ब सल्तनत की स्थापना की। सन्‌ 932 ई. में अपने वंश के नाम पर अपनी सल्तनत का नाम मलिकते-सऊदी अरबिया' रखा। - शासन की दृष्टि से आज देश चार प्रांतों में विभाजित है। पश्चिमी भाग 'हिजाज़' है। इसका चीन नाम फ़ारान था। इसी प्रांत में मक्का और मदीना नामक प्रमुख और पवित्र नगर हैं। मध्यवर्ती नज्द' कहलाता है। दक्षिण-पश्चिम भाग का नाम असीर' है। पूर्वी प्रांत 'हस्सा' है। इसके तिरिक्त दक्षिण-पश्चिम में 'नजरान', बिशा' और इमारात तथा उत्तर में उत्तरी सीमांत प्रांत हैं

हमारी पोधी-5

मरुभूमि होने के बावजूद अरब देश का बहुत तेज़ी से विकास हुआ है।

अरब प्राकृतिक सम्पदाओं से सम्पन्न देश है। सन्‌ 940 ई. के ओस-पास 'हस्सा' प्रांत तेल (पेट्रोलियम) के भंडार का पता चला था। बाद में अन्य भागों में भी खनिज तेल के भंडार मिले सऊदी अरब में खनिज तेल और प्राकृतिक गैस के बड़े-बड़े भंडार हैं। इसके अतिरिक्त सोना, चाँ जस्ता, सीस।, ताँबा आदि के भी विशाल भंडार मिले हैं। इन खनिजों के द्वारा बहुत-से पेट्रो-रसा उद्योगों की स्थापना हुई है। देश की आय का बड़ा भाग इन्हीं खनिज-सम्पदाओं के निर्यात से प्राप्त हे है। वहाँ दिन दुना रात चौगुना आर्थिक विकास हो रहा है। वहाँ अब उत्तम कोटि के भवः अस्पतालों, स्कूलों, सड़कों आदि का निर्माण हो गया है। दम्माम, होफुफ़े, हील, जीसरान और 5 विशिष्ट औद्योगिक और व्यापारिक केन्द्रों में से हैं। जद्दा प्राचीन नगर और प्रमुख बन्दरमाह है। दम्मा जुबैल और यम्बूअ भी यहाँ के प्रसिद्ध बन्दरगाह हैं। यहाँ से सारे संसार को तेल और दूसरी वस्तुएँ भे जाती हैं।

सऊदी अरब की राजधानी रियाज़' है। यह एक आधुनिक नगर है। इसका विकास बड़ी ते से हुआ है। यहाँ शिक्षण-प्रशिक्षण केन्द्र और लघु उद्योगों की अनेक इकाइयाँ स्थापित की गई हैं।

मक्का अरब का ग्रमुख नगर है। यहीं प्यारे नबी पैदा हुए थे। इसी नगर में चार हज़ार वर्ष ' हज़रत इबराहीम (अलैहि.) द्वारा निर्मित मसजिंदे-हराम 'काबा' है। यह मुसलमानों का क़रिबूला अर्थात इसीं की और मुँह करके मुसलमान नमाज़ पढ़ते हैं। हज में इसी काबा का तवाफ़ (परिक्रम करते हैं। धार्मिक और पवित्र नगर होने के कारण यहाँ आबादी में तेज़ी से वृद्धि हुई है। मक्का नगर नव निर्माण करके सुख-सुविधाओं के साधनों से सम्पन्न आधुनिक नगर के रूप में इसे विकसित कि गया है। मदीना दूसरा पवित्र नगर है। यहीं प्यारे नबी (सल्ल.) की क़ब्र है। हर वर्ष लाखों हाजी हज पहले या बाद में प्यारे नबी (सल्ल.) के रौज़े की ज़ियारत करने आते हैं।

सन्‌ 970 ई. के बाद सऊदी अरब में कृषि का भी बहुत विकास हुआ है। रासायनिक खा उत्तम बीज, सिंचाई और मिट्टी की जाँच के आधुनिक प्रबंध किए गए हैं। सन्‌ 984 ई. तक देश के उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया। अब वहाँ से गेहूँ, खजूर, दूध, मक्खन, सब्ज़ी, अंडे, मछल आदि का निर्यात किया जाता है। हि

आधुनिक विकास का काम अमरीकी और यूरोपीय कम्पनियों के द्वारा सम्पन्न हुआ इसलिए विदेशी सभ्यता के कुछ दूषित प्रभाव भी वहाँ पड़े हैं। शासन की चौकसी और धर्मपरार मुस्लिम समाज के प्रयासों से बहुत-सी बुराइयों पर प्रतिबंध है। वहाँ की सरकार शराब, जुआ, लॉ और इसी तरह के दूसरे निषिद्ध कामों का ठेका (लाइसेंस) नहीं देती।

अरब समाज में आज भी अनेक प्रकार की विशेषताएँ पाई जाती हैं। चोरी, धोखा, ग़बन 3

हमारी पोधी-5

पम॒ चीज़ों से बचना, सत्य बोलना, पाक-साफ़ रहना, दूसरों की सेवा करना -- ये अरबों की 'क्तिगत तथा जातिगत विशेषताएँ हैं।

सऊदी अरब की पूरी आबादी मुस्लिम है। बाहर से नौकरी के लिए आए कुछ ईसाई, यहूदी, न्यू, सिख और अन्य धर्मो के लोग भी वहाँ रहते हैं। देश का शासन और क़ानून प्राय: इस्लाम धर्म के द्वान्तों पर आधारित है। इस्लाम से पूर्व वहाँ के लोगों में विभिन्‍न प्रकार के गुण और दुर्गुण पाए जाते लेकिन इस्लाम ने अरबों के जीवन की काया पलट दी। आज डेढ़ हज़ार साल बाद भी वहाँ के वन में इस्लाम की शिक्षाएँ संचरित हैं। अल्लाह ने उस भूमि की अपनी विशेष कृपा और बरकत से ,लामाल किया है। |

ब्दार्थ और टिम्पणी दूधारक - मुक्तिदाता . प्रशशोध 5 बदला गीमित - सीमा के अन्दर, थोड़ा. विकास - तरक़्क़ी नर्स्थापित करना 5 फिर से क़ायम करना अतिथि मेहमान चरित जारी उपासना - इबादत पात्मनिर्भर - अपने ऊपर निर्भर गणराज्य + जम्हरियत, लोकतंत्र खला -< सिलसिला, कड़ी जलाशय < तालाब. वेशिष्ट 5 ख़ास कीर्तिमान 5 इज़्ज़त, ऊँचा नाम यापक - फैला हुआ, विस्तृत निर्यात - बाहर भेजना गयद्वीप < वह स्थान जो तीन ओर जल और एक ओर स्थल से जुड़ा हो पर्मपरायर्ण - धर्म में विश्वास करने और उसपर चलनेवाले लोग फर्क रेखा -< काल्पनिक रेखा जो भूमध्य रेखा (0' अक्षांश) से उत्तर की ओर 23॥27 अक्षांश पर है। अभ्यास 'क) उत्तर लिखिए :

. अरब देश किस जगह अवस्थित है और उसकी चौहदूदी क्या है? 2. अरब देश में ऊँट का बड़ा महत्त्व है। क्यों ? __3. काबाकाक्यामहत्व है ?उसेकिसनेबनया/! _ः हैं? उसे किसने बनाया ?

हमारी पोथी-5

4. अखब में कौन-कौन सी प्राकृतिक सम्पदाएँ हैं ? 5. मसुदान किसे कहते हैं? 6. प्यारे नबी (सल्ल॑ं.) से पहले अरब के निवासियों का क्या हाल था ?

(ख) सही उत्तर पर सही (४) का निशान लगाइए :

. हज़रत मुहम्मद (सल्ल.) कहाँ पैदा हुए ? (मक्का, मदीना, बग़दाद 2. हज़रत इबराहीम (अलैहि.) कौन थे ? (राजा, पैग़म्बर, व्यापारी' 3. इस्लाम धर्म में किसकी इबादत की जाती है ? (पैग़म्बर की, अल्लाह की, ख़लीफ़ा की, 4. हज़रत इबराहीम (अलैहि.) का धर्म क्या था? (यहूदियत, ईसाइयत, इस्लाम' 5. अन्तिम पैग़म्बर कौन थे ? (हज़रत मूसा, हज़रत ईसा, हज़रत मुहम्मद (ग) ख़ाली जगहों को कोष्ठक में दिए गए उचित शब्दों से भरिए : . हमारे देश के .......... में अरब देश है। (दक्षिण, पश्चिम) 2. अरब के लगभग सभी भागों की जलवायु .......... है। (शुष्क, आदर) .3. इस्लाम अपने विशिष्ट गुणों और सरलता के कारण आज भी .......... रहा है। (स्थिर, फैल) 4. जद्दा प्राचीन नगर और प्रमुख .......... है। (बन्दरगाह, इबादतगाह) 5. अख देश की राजधानी .......... है। (मक्का, रियाज़) 6. इस्लाम ने अरबों के जीवन की .......... पलट दी। (काया, छाया) भाषा-बोध (क) इन शब्दों के पुल्लिंग रूप लिखिए: माता ल्‍ पिता रानी का कल्‍लन्‍नललन+ बहन ८. -“++--+--- अध्यापिका ८... अआन्‍तत---- शिष्या जी नायिका जी पत्नी दर. नजन्‍न्‍जजन-- 'कवयित्री स्ः - लड़की चर. चअजयज--- नानी चर. चअनयन-र- 2

हमारी पोथी-5 (529

हमीद और मजीद दोनों भाई अपने पिताजी के साथ रेलयात्रा कर रहे थे। रेलगाड़ी सीटी जाती, तेज़ भागती जा रही थी। दोनों भाई हिचकोले खाते, हँसते-खेलते जा रहे थे। वे कभी खिड़की 5 पास जाकर बाहर खड़े बिजली के खम्भों, वृक्षों, मकानों इत्यादि को तेज़ी से पीछे भागते देखते, #भी पिताजी से तरह-तरह के प्रश्न करते। गाड़ी एक बड़े पुल पर से गुज़रने लगी। बच्चे खिड़की से ग़हर झाँककर देखने लगे। पुल के नीचे पानी तेज़ी से बह रहा था।

हमीद ने पूछा, “पिताजी ! नदियों में इतना ढेर सारा पानी कहाँ से आता है? -मजीद भला फब चुप रहनेवाला था। उसमे भी पूछा, “इतना पानी बह जाने के बाद भी नदी का पानी समाप्त क्यों हीं होता ?”' पिताजी ने कहा, “अच्छा, तो ध्यान से सुनो, तुम्हारी समझ में सब कुछ जाएगा।'

हमारी पोथी-5 (939

फिर तो हमें झटपट सुनाइए ना पिताजी ', दोनों भाई उत्सुकता से एक साथ बोले

पिताजी ने कहा, “तुम लोगों ने पढ़ा ही है कि धरती पर पानी का विशाल भंडार समुद्र है। भी जानते हो कि पानी तीन अवस्थाओं में पाया जाता है--ठोस, द्रव और वाष्प | जब वह जमकर ठो रूप ले लेता है तो उसे बर्फ़ कहते हैं। जब बह तरल रहता है-तो पानी कहलाता है और जब वह बहु गर्म होकर गैस बनकर हवा में मिल जाता है तो वाष्प कहलाता है। वाष्प को भाष भी कहते हैं।”'

बच्चों ने सिर हिलाकर हाँ में जवाब दिया। पिताजी अपनी बात आगे बढ़ाते हुए बोले, 'जः सूर्य की तेज़ किरणें समुद्र पर पड़ती हैं तो पानी गर्म होकर भाप बन जाता है। यही भाष वायुमंडल : जाकर बादल बन जाता है। हवा उन बादलों को उड़ाकर दूर पहाड़ों तक ले जाती है। वायुमंडल व॑ ठण्ड के कारण बादल का कुछ पानी तो वर्षा की बूँदों के रूप में धरती पर जाता है। कुछ पहाड़ व॑ चोटियों पर जमकर बर्फ़ बन जाता है। यही बर्फ़ गर्मी से पिघलकर फिर पानी बन जाता है। यह पार झरनों और नदियों के रूप में धरती पर बहने लगता है। अब तुमने समझ लिया होगा कि नदियों में पार वर्षा पड़ने और बर्फ़ पिघलने से आता है।

कुछ छोटी नदियाँ पानी कम होने के कारण गरमी में सूख जाती हैं। बरसात के दिनों में वर्षा पानी से फिर बहने लगती हैं। कुछ बड़ी नदियाँ पूरे साल बहती रहती हैं। नदियों में बहनेवाला पान॑ समुद्र में जाकर मिलता है। सूरज की गर्मी के कारण समुद्र का बाध्पीकरण पुनः शुरू हो जाता है वाष्पीकरण की प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है। भाप पहले की तरह वर्षा और बर्फ़ के रूप में परिवर्तिः होकर नदियों में जाती है। यह प्रक्रिया निरन्तर चलती रहती है। यही कारण है कि नदियों का पान॑ समाप्त नहीं होता।

मजीद ने मुस्कुराते हुए कहा, “तो समुद्र का पानी आकाश मार्ग से यात्रा करके आता है धरती पर नदियों के द्वारा पैदल चलकर समुद्र तक जाता है।'”

“वाह भाई वाह ! उसको तो हवाई जहाज़ की ज़रूरत है, और ही रेलगाड़ी की” , हमीद + हवा में हाथ हिलाते हुए कहा | उसकी बातें सुनकर सब हँस पड़े।

पिता जी ने कहा, “अल्लाह ने हमारे लाभ के लिए कितनी अच्छी व्यवस्था की है यह सब हमारे किसी प्रयास के बिना अपने आप होता रहता है। अच्छा, अब यह बताओ कि नदियों से हम क्या-क्या लाभ होते हैं ?''

बच्चों को चुप देखकर पिताजी स्वयं बताने लगे, “नदियों से हमें अनगिनत लाभ मिलते हैं

हमारी पोधी-5 (949

जल को पीने, कपड़े धोने, खेतों को सींचने इत्यादि कार्मो में लाया जाता है। इनसे हमें मछलियाँ मिलती हैं। नदियों में नावों तथा जलपोतों के द्वारा यात्रा भी की जाती है और सामान भी ढोया जाता नदियों पर बाँध बनाकर उनसे नहँ निकाली जाती हैं। फिर उन नहरों से खेतों की सिंचाई होती है। ते के पानी से बिजली भी तैयार की जाती है | नदियों के किनारे बहुत-से कल-कारखाने हैं।

नदियाँ अपनी तेज़ धाराओं से पहाड़ों की चट्टानों को काटकर बारीक मिट्टी बनाती हैं। फिर उस को मैदानी इलाक़ों में लाकर पाट देती हैं। इससे मैदानी इलाक़ा काफ़ी उपजाऊ हो जाता है।

कितना मेहरबान है हमारा रब! जिसने सूर्य, हवा, पहाड़, ज़मीन इत्यादि को हमारी सेवा में रखा है। फिर क्यों हमारा सिर उसके आगे एहसान से झुक जाए!

पिताजी की बात समाप्त हुई। इतने में गाड़ी सोनपुर स्टेशन पर आकर रुकी। यहीं पर उन्हें रना था। झटपट सबने अपने सामान गिनकर उतारे और घर की राह ली।

ब्दार्थ और टिप्पणी

विशाल - बहुत बड़ा | चोटी पहाड़ का ऊपरी भाग भण्डार -< कोष, ख़ज़ाना व्यवस्था 5 इन्तिज़ाम परिवर्तित. 5 बदला हुआ दयालु_ 5 रहम करनेवाला उत्सुकता + जानने की इच्छा अवस्था 5 हालत

तरल पदार्थ < बहनेवाला पदार्थ प्रयास < कोशिश

'जलपोत - पानी का जहाज़, नाव आदि

अभ्यास क्र) उत्तर लिखिए :

पानी कितनी अवस्थाओं में पाया जाता है? उनके नाम लिखिए

नदियों में पानी कहाँ से आता है और कहाँ जाता है ?

नदियों से हमें कौन-कौन से लाभ होते हैं ? किन्हीं चार लाभों को लिखिए। नदियों को हमारी सेवा में किसने लगाया ?

ईश्वर के प्रति हमारा क्‍या कर्तव्य है ?

+ -+

हमारी पोथी-5

(ख) बताइए किसने कहा :

. “तो समुद्र का पानी आकाश मार्ग से यात्रा कर के आता है और धरती पर नवियों के द्ू

» पैदल चलकर समुद्र तक जाता है।”'

2. “वाह भई वाह | उसको तो हवाई जहाज़ की ज़रूरत है और ही रेलगाड़ी की।””

3. “हमारे प्रयास के बिना यह सब अपने आप होता रहता है।!

(ग) ख़ाली जगहों को कोष्ठक में दिए गए उचित शब्दों से भरिए :

. पुलके .................... पानी तेज़ी से बह रहा था। (ऊपर, नीचे) - धरती पर पानी का विशाल भंडार है। (समुद्र, नदियाँ) 3. नदियों के किनारे बहुत-से- 4. नदियाँ बारीक मिट्टी को

ब्3

भाषा-बोध

हक पल 287 हैं। (पेड़-पौधे, कल-कारखाने) पल इलाक़ों में लाकर पाट देती हैं। (पहाड़ी, मैदानी

(क) शिक्षक छात्रों को दीर्घ ईकार (7) वाले शब्दों के बहुबचन रूप बनाने के नियम बताएँ शब्द के अंत का 'ई” या उसकी मात्रा ( "ै) बहुबचन होने पर 'इ? या उस की मात्रा (0): बदल जाती है तथा ईकारान्त स्त्रीलिंग शब्दों में याँ” लगाकर ईकारान्त ()) को (0):

बदल दिया जाता है। जैसे--- नदी- नदियाँ; गाड़ी-गाड़ियाँ; लड़ाई-लड़ाइयाँ | निम्नलिखित शब्दों के बहुबचन रूप लिखिए :

पहाड़ी ते पाज---- झाड़ी जे अजजजजज--- मछली ते चजअन्‍जजजजज--- शादी ते चजजणत---+--5 स्त्री जे खजजजजज---- लड़की हज चजज-जण--+-- दवाई ते चआजजजजनज--5 बकरी दा चअजजर----

(ख) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए : “पिता जी ने पूछा, “तुम लोग क्या कर रहे हो ?”' हमीद ने कहा, “मैं पढ़ रहा हूँ।'' “अच्छा, तो ध्यान से सुनो।”! ''भाष ऊपर जाकर बादल बन जाती है'', पिताजी ने कहा।

हमारी पोधी-5 (969

उपर्युक्त वाक्यों में “* ”” चिह्न का प्रयोग किया गया है। इन्हें दुहरा उद्धरण-चिह॒न 7५८९१ (१७795) कहते हैं) जहाँ किसी बात और किसी लेखक या पुस्तक के कथन को प्ों-का-त्यों उद्धृत करना हो, यहाँ दुहरे उद्धरण-चिह्‌न (“' “') का प्रयोग किया जाता है।

निम्नलिखित वाक्यों में दुहरे उद्धरण चिह्न का प्रयोग कीजिए :

अल्लाह ! हमें सीधे मार्ग पर चला | (पवित्र कुरआन, :5)

वह बोला, मैं कल घर जाऊँगा।

इन्साफ़ के साथ पूरा-पूरा नापो और तौलो। (पवित्र कुरआन, 6:52)

और कहो, रब ! मुझे और अधिक ज्ञान प्रदान कर | (पवित्र क्रुआन, 20:24)

जो व्यक्ति ज्ञान का मार्ग अपनाएगा, अल्लाह तआला उसके लिए जन्नत का मार्ग सुगम कर देगा। (हज़रत मुहम्मद सल्‍ल.)

१8282

हमारी पोधी-5 (9792

पाठ - 22 “नटखट हाथी

* हाथी स्वभावत: शांत प्रवृत्ति का पशु है। जंगलों में झुण्ड बनाकर रहना. उसे पसन्द है। उसः सहयोग की भावना बहुत होती है। वह झुण्ड में ही चलकर अपने चारे की खोज करता है। कभी-क५ तितर-बितर होकर भी चलता है। वह शाकाहारी होता है। पेड़ों के पत्ते, गन्‍ने और खेतों में उगी हर फ़्सलें बड़े चाव से खाता है। वह-बहुत भारी-भरकम और शक्तिशाली जानवर होता है। कभी-कभ॑ वह शरारत भी करता है। न्‍ |

कल्लू चाचा अपने खेत की रखवाली करते थे। खेतों के निकट एक जंगल था। जंगल

. बहुत-से हिंसक पशु रहते थे। वे रात में चरने के लिए खेतों की ओर निकल आते थे। कल्लू चाचा खेः

. में बने एक टाँड के ऊपर रात में सोते थे, ताकि जंगली पशुओं से अपनी रक्षा तथा खेत की रखवाल॑ कर सकें।

हमारी पोथी-5 (989

रात बड़ी सुहानी थी। पूर्णिमा का चाँद अपने पूर्ण प्रकाश के साथ चमक रहा था। चारों ओर तल चाँदनी की धवल किरणें लहरा रही थीं। आधी रात होते ही कल्‍लू चाचा की आँखें लग गई। तल चाँदनी ने थपकंकर उन्हें गहरी नींद सुला दिया।

दुर्भाग्य से खेत की ओर एक जंगली हाथी निकल आया। हाथी बड़ा मदमत्त और नठ्खट था|.

पने फ़्सलें चर्कर पहले अपनी भूख मिटाई। फिर टाँड को देखकर उसे एक शरारत सूझी। वह टाँड के

डे-बड़े खूँटें के बीच घुस गया। अँगड़ाई लेते हुए ज़ोर से धक्का मारा | टाँड के खूँट उखड़ गए। खूँटे

स-पास थे और काफ़ी मज़बूती से बँधे हुए थे, इसलिए वे हाथी के भारी भरकम शरीर में दोनों ओर अटक गए। वह टाँड को पीठ पर लिए तेज़ी से भागा।

कल्लू चाचा के तो जैसे प्राण ही सूख गए। अब वे कर ही क्या सकते थे | हाथी व्याकुल हो ठा। वह दोनों ओर से मानो शिकंजे में कसा हुआ था। वह तेज़ी से भाग रहा था और कल्‍्लू चाचा को गई उपाय नहीं सूझ रहा था। वे अल्लाह से अपने प्राण की भीख माँगने लगे। अल्लाह ने उनकी तैनती सुन ली। सौभाग्य से हाथी एक पेड़ के नीचे से गुज़रा। कल्‍्लू चाचा ने टाँड से ऊपर उछलकर ड़ की एक मोटी डाल पकड़ ली और पेड़ पर चढ़ गए। हाथी चिंघाड़ता हुआ सरपट दौड़ा जा रहा था। उैंड के ऊपर कल्‍्लू चाचा की खाट थी। खाट पर बिस्तर लगा था। खाट के पास ही एक अंगीठी बँधी गी। अंगीठी में आग की चिगारी दबी थी। हाथी के दौड़ने से अंगीठी हिली और उलट गई) अंगीठी की चैगारी खाट पर गिरी। जल्द ही खाट, बिस्तर और टाँड के छप्पर में आग लग गई।

हाथी बहुत घबराया। वह और तेज़ी से भागने लगा। वह जितना तेज़ भागता, आग उतनी ही अधिक भड़कती। हाथी और अधिक ज़ोरों से विघाड़ता, किन्तु छुटकारे का कोई उपाय था। उसकी चैघाड़ सुनकर जंगल के बहुत-से हाथी उसकी सहायता के लिए लपके। लेकिन धधकती ज्वाला से इक वे दूर ही रहे ! धीरे-धीरे हाथी की पीठ झुलसने लगी। हाथी पूर्णतः विवश था। वह अपनी ही तरारत के जाल में बुरी तरह फैंस चुका था। अब अपने कर्मों का फल उसे भोगना ही था।

सहसा टाँड के खूँटों के बंधन जल गए। जलता हुआ गाँड हाथी की पीठ से नीचे गिर गया। बह बुरी तरह झुलस चुका था। जंगल में पहुँचकर पीझ से कराहता रहा और बहुत दिनों तक अपनी करनी करा फल भुगतता रहा। हु

हमारी पोथी-5

शब्दार्थ और टिप्पणी

प्रवृत्ति श् तितर-बितर होना >

हिंसक 5

मदमत्त ' हम चिंघाड़ 5

पूर्णिमा दुर्भाग्य दे सहसा < विवश चि

(क) उत्तर लिखिए :

हाथी का मुख्य चारा क्‍या है ?

कलल्‍्लू चाचा रात में कहाँ सोते थे और क्यों ? टाँड किस तरह हाथी की पीठ पर अटक गया ? कल्लू चाचा ने अपनी जान कैसे बचाई ?

हाथी की पीठ पर अठके टाँड में आग कैसे लगी ? हाथी को अपनी शरारत का क्या फल मिला ?

"9 + ७० >> «७

स्वभाव झुण्ड इधर-उधर हो जाना, शाकाहारी बिखर जाना निकट

* हिंसा करनेवाला, तकलीफ़ टाँड

पहुंचानेवाला घवल मतवाला, मस्ती में चूर.. व्याकुल हाथी के चिल्‍लाने की. अंगीठी

आवाज़ करनी चाँद का पूरा गोल होना शीतल बदक़िस्मती पूर्णतः अचानक ज्वाला मजबूर

अभ्यास

(ख ) उचित शब्दों का चयन करके वाक्य पूरे कीजिए

(हिंसक, शान्त, टाँड, करनी, विनती) . हाथी स्वभावत: .......... प्रवृत्ति का पशु है। 2. जंगल में बहुत-से ......... पशु रहते थे।

समूह, गरोह सब्जी खानेवाला नज़दीक

मचान

उजला

बेचैन

आग रखने का बर्तन, बोरसी करतूत

ठ्ण्डा

पूरी तरह

आग की लपट

हमारी पोथी-5

3. अब ....... को पीठ पर लिए तेज़ी से भागा। 4. अल्लाहने कल्लू चाचा की ......... सुनली। 5. नटखट हाथी बहुत दिनों तक अपनी ......... का फल भुगतता रहा।

ग़षा-बोध क) निम्नलिखित मुहावरों को वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

'तितर-बितर होना, प्राण की भीख माँगना, जाल में फैंस जाना, चाव से खाना, करनी का फल भुगतना

ख) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :

रात बड़ी सुहानी थी।

यह मेरी किताब है।

खाट पर बिस्तर लगा था।

अज़ान हो रही है।

इस प्रकार के वाक्‍्यों को साधारण वाक्य कहते हैं। यह वाक्य प्रधान वाक्य होता है। इसमें होई आश्रित वाक्य नहीं होता। साधारण वाक्य को सरल वाक्य भी कहते हैं।

पाँच सरल वाक्य अपनी कॉपी में लिखिए और अपने शिक्षक को दिखाइए।

72224

हमारी पोधी-5

पाठ - 23 सब हैं एक समान

इस धरती पर बसनेवाले, हैं जितने इनसान रक्‍त सभी का एक रंग है, सब रखते हैं जान जिसने सबको जन्म दिया है, बड़ी उसी की शान दूजा नहीं महान रे मूरख! दूजा नहीं महान!

हरिजन, पण्डित, शूद्र, ब्राह्मण, सैयद, शैख़, पठान सब हैं एक ईश के बन्दे, आदम की सन्तान रंग, नस्ल, कुल, जाति, वंश तो हैं केवल पहचान सब हैं एक समान रे मूरख ! सब हैं एक समान। एक दिन आख़िर साँसों की, यह डोर जाएगी टूट. धन-दौलत और महल-दुमहले, यहीं जाएँगे छूट तेरा सब कुछ, तेरे ही घरवाले लेंगे लूट काहे पर अभिमान रे मूरख ! 'काहे पर अभिमान।

नफ़रत की दीवार गिरा दें, मिलकर गाएँ गीत आपस के मतभेद मिटाकर, बन जाएँ सब मीत मानव बनकर करें 'मुजाहिद', मानवता से ग्रीत

सब जन हैं इनसान रे मूरख ! सब जन हैं इनसान। सब हैं एक समान॥

-- मुजाहिद लखीमपुर्र

हमारी पोथी-5

ब्दार्थ और टिप्पणी

| रु जा ॥॥

॥!

दूसरा रक्त ईश्वर कुल बिचारों में अंतर ग्रीत गर्व, घम्मंड मीत मूर्ख, बेवक्रूफ़ जन

अभ्यास

'क) केवल एक वाक्य में उत्तर लिखिए;

है ही 3५

प्ख

जा

छछ-

4.

कौन महान है ? रंग, नस्ल, जाति, कुल अल्लाह ने क्यों बनाए ? सब मित्र कैसे बन सकते हैं ?

संक्षेप में उत्त लिखिए ;

सब इनसान एक समान किस प्रकार हैं? आदम की सनन्‍्तान और ईश के बंदे कौन हैं ? साँसों की डोर टूटने पर क्या होगा ?

इस कविता में कवि भे क्या संदेश दिया है ?

(ग) रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ;

|

मा

है <- #. “३४० 9

खून, लहू वंश

प्यार

मित्र व्यक्ति

दिया है, बड़ी उसी की शान। ४0 सा » आदम की संन्तान।

हम / परे ही घरवाले लेंगे लूट!

आपस के मतभेद मिटाकर, बन जाएँ सब .................

हमारी पोथी-5 (६03)

भाषा-बोध

(क) इन वाक्यों को ध्यान से पढ़िए :

सलमा रोटी खाती है।

नदीम किताब पढ़ता है।

इन दोनों वाक्यों में खाती है! और पढ़ता है' सकर्मक क्रियाएँ हैं। जिस क्रिया का फल का पर पड़े उसे 'सकर्मक क्रिया' कहते हैं। ऊपर के वाक्यों में रोटी! और 'किताब' शब्द कर्म हैं और जिर वाक्य में कर्म हो उस वाक्य की क्रिया सकर्मक क्रिया कहलाती है।। उसमें 'क्या', 'किसे' या “कितने लगाकर प्रश्न पूछने पर अगर कुछ उत्तर मिले तो समझना चाहिए कि क्रिया सकर्मक है! जैसे :

सलमा क्या खाती है ? रोटी।

नदीम क्या पढ़ता है ? किताब।

यहाँ सलमा के खाने का फल 'रोटी' और नदीम के पढ़ने का फल “किताब अर्थात कर्म पड़ रहा है। अत: खाना' और 'पढ़ना' क्रियाएँ सकर्मक हैं।

सकर्मक क्रियावाले पाँच वाक्य लिखकर अपने शिक्षक को दिखाइए।

(ख) इन वाक्यों को ध्यान से पढ़िए :

मोहन सोता है। राजा हँस्‍्ता है।

इन दोनों वाक्यों में क्रमश: 'सोना', 'हँसना' अक्रमक क्रियाएँ हैं। पहले वाक्य में मोहन कत्तं है, सोने की क्रिया उसी के द्वारा पूरी होती है अत: क्रिया का फल उसी पर पड़ता है। इसलिए सोन क्रिया अकर्मक है।

निष्कर्ष यह कि जिन क्रियाओं के व्यापार का फल कर्त्ता पर पड़े वे अकर्मक क्रियाएँ कहलार्त हैं। अकर्मक क्रियाओं में 'कर्म' नहीं होता, क्रिया का व्यापार और फल दूसरे पर पड़कर कर्त्ता पर पड़ता है।

१0:80: 4

हमारी पोथी-5 ((04)

पाठ - 24

अन्धी भिखारिन

प्रीष्म ऋतु की दोपहर थी। भीषण गरमी पड़ रही थी। सभी प्राणी व्याकुल थे। सड़क के किनारे विशाल वृक्ष था। बहुत-से लोग गरमी और धूप से बचने के लिए उसकी छाया में बैठे हुए थे। वहाँ ख़ोनचेवाला भी था। लोग उससे खाने की चीज़ें ख़रीद-ख़रीदकर खा रहे थे। एक पुलिसवाला भी मौजूद था।

चिलचिलाती धूप, तपती रेत तथा गरम हवा में एक अंधी बुढ़िया लाठी के सहारे हाँफ़ती, ख़ड़ाती हुई पेड़ की ओर लपकी चली रही थी। उसके शरीर पर फटे-पुराने कपड़ों की धज्जियाँ रही थीं। बाल-बिखरे हुए थे। कानों में नीम के डण्ठल पड़े हुए थे। वह गरमी और धूप की ब्राह किए बिना पेट की आग बुझाने के लिए इधर-उधर मारी-मारी फिरती थी।

हमारी पोथी-5

वह वृक्ष के नीचे बचती-बचाती, टटोल-ट्टोलकर अपना मार्ग खोजती धीरे-धीरे आगे उसे डर था कि किसी से टकरा जाए। अत: वह लाठी को इधर-उधर टेकती, आगे बढ़ती, रु तथा एक ही र॒ट लगाए जाती , ' दे ख़ुदा के नाम पर, दिलवा ख़ुदा के नाम पर [””

अब वह थक चुकी थी। अत: सड़क के किनारे उसी वृक्ष के नीचे एक ख़ाली स्थान टटोल बैठ गई।

ह॒ अभी वह सुस्ता भी पाई थी कि एक सिपाही ने चिल्लाते हुए कहा, “ऐ बुढ़िया ! यह सः -है, तेरा घर नहीं है जो तू यहाँ जमकर बैठ गई।”

यह आवाज़ सुनकर बुढ़िया विचलित हो गई और मन-ही-मन सोचने लगी, “आह, कितनी अभागिन हूँ! मेरा सड़क के किनारे बैठना भी लोगों को सहन नहीं। काश, मेरा भी सहायक होता जो मेरी सहायता करता !”!

वहीं उसके निकट ही खड़ा एक युवक दुकानदार से कह रहा था, “देखो ! ये पुलिसवाले दीन-दुखियों को किस प्रकार अपमानित करते हैं। यहाँ सभी बैठे हैं तो कोई बात नहीं, बुढ़िया बैठ तो आफ़त टूट पड़ी | बढ़िया की विवशता का भी इन्हें ख़्याल नहीं। कैसा ज़माना है।''

बुढ़िया ने युवक की बातें सुनकर अनुमान लगा लिया कि उसे डाँटमेवाला एक सिपाही अतः वह अपनी लाठी टेककर कराहते हुए उठ खड़ी हुई और बोली, “सिपाही जी ! क्षमा कीजिए अभी जाती हूँ। अब आपके रास्ते पर नहीं बैदूँगी। अपना गुस्सा थूक दीजिए। मैं तो एक अर्भा भिखारिन हूँ!!!

: भिखारिन अपनी लाठी से ट्टोलते हुए आगे बढ़ी। बच-बचाकर चलने का प्रयास करने बावजूद उसका पैर फिसल गया। वह. लड़खड़ाई और ख़ोनचे से टकराकर गिर गई।

झनझनाहट की आवाज़ के साथ ख़ोनचा नीचे गिरा। साथ ही दही-बड़े, आलू, सोंठ का पाः नमक, मिर्च इत्यादि सारी चीज़ें धरती पर बिखर गईं। ख़ोनचेवाला हक्‍्का-बक्का रह गया और ज़ोर से चिल्लाया, . हाय, मेरा ख़ोनचा ! मेरी सारी पूँजी धूल में मिल गई। अंधी ! तूने यह किया ?” (हाथ मलते हुए) “अब मैं क्या करूँ ?”'

ख़ोनचेवाले की गुहार सुनकर लोग उसकी ओर दौड़ पड़े और क्षणभर में भीड़ लग गई। कोई खेल-तमाशा हो रहा हो। लोग तरह-तरह की बातें कर रहे थे। कोई अंधी भिखारिन के प्र

हमारी पोथी-5 _ (406)

गजुभूति प्रकट कर रहा था तो कोई ख़ोनचेवाले के प्रति। कोई कह रहा था कि इस ख़ोनचेवाले का नुक़सान हो गया, तो कोई कह रहा था कि इस अंधी का क्या दोष है। |

भिखारिन की दशा बड़ी दयनीय थी। वह भय से थर-थर काँप रही थी। कुछ कहते बन रहा

इतने में पुलिसवाला निकट आया।

ख़ोनचेवाले ने सारी बात कह सुनाई। घबराहट के कारण वह अटक-अटककर बोल रहा था। की सारी चीज़ें यथावत बिखरी पड़ी थीं। उसका नुक़सान सबके सामने था।

ख़ोनचेवाले की दशा देखकर सिपाही आपे से बाहर हो गया और अपनी विशेष भाषा में लियाँ देने लगा। युवक विनग्रतापूर्वक बोला, ' सिपाही जी ! इस बूढ़ी का क्या दोष है ? यह तो अंधी है।”

सिपाही (बड़े घमण्ड के साथ) बोला , “हम पुलिसवाले हैं। हमें सब मालूम है। यह भिखारिन हे को है, यह तो पक्की कुलटा है। दिन भर भीख माँगती है, रात को नशा करती है।

यह कहते हुए पुलिसवाले ने डंडा सँभाला और अंधी भिखारिन पर बरसाना शुरू कर दिया। ब्रारी बुढ़िया धरती पर मछली के समान तड़पने लगी। बिलखते हुए गुहार कर रही थी, ''मैं अंधी हूँ, ख़ुद से नहीं गिराया | हाय ! मुझपर दया करो।

युवक से रहा गया। उसने आगे बढ़कर पुलिसवाले से बड़े दुःखी स्वर में कहा, ' सिपाही [यह अंधी निर्दोष है। इसे छोड़ दीजिए। क्या आपके हृदय में दया नहीं है ?

यह कहकर युवक बुढ़िया और सिपाही के बीच में गया। सिपाही जी ने हाथ रोक लिया। इसके बाद युवक बोला, भाइयो, मैं आप लोगों से कुछ बातें कहना चाहता हूँ। * ““कहिए, कहिए ! ज़रूर कहिए।”' एक साथ अनेक लोगों की आवाज़ें आईं।

युवक बोलने लगा, “आज डंडे और डॉलर का ज़माना है। लोग डंडे से डरते और डॉलर पर ते हैं। संसार की सत्ता इन्हीं दो ध्रुवों के बीच चक्कर काट रही है और निरीह जनता इन्हीं दो पार्टो के पिस रही है, कराह रही है। अन्याय, अत्याचार और असमानता के चक्र में फँसी जनता त्राहिमाम

हमारी पोधी-5

त्राहिमाम कर रही है। कोई उसका करुण-चीत्कार सुननेवाला नहीं।”'

युवक फिर बोला, “शासक और शासित, राजा और प्रजा तथा धनी और निर्धन के बीच बढ़ेती जा रही है, सम्पन्नता की कोख से विपन्नता जन्म ले रही है, चिराग तले अंधेरा फैल रहा क्या आपने इस पर कभी विचार किया है कि ऐसा क्यों हो रहा है?”'

युवक ने स्वयं उत्तर देते हुए कहा, “यह ईश्वरविहीन सत्ता की देन हैं। इस व्यवस्था में मजब कमज़ोरों, दीन-दुखियों की यही दुर्दशा होती है।''

युवक अंधी भिखारिन के पास गया जो दर्द से कराह रही थी। फिर लोगों का ध्यान अपनी आकृष्ट करते हुए बोला, “हमें शोभा नहीं देता कि इन जैसों का अपमान करें। बल्कि हमारा फ़र्ज़ बः है कि ग़रीबों, लाचारों, बेसहारा लोगों और अनाथों की सहायता करें।

एक दिन हम सबको ईश्वर के पास जाना और हर एक को अपने कर्मों का हिसाब देना हो अत: हमें किसी पर अन्याय नहीं करना चाहिए और हर समय ईश्वर से डरते रहना चाहिए।””

युवक की बात सुनकर सभी ने अत्याचार से लड़ने और जनकल्याण के कामों में सहायता और योगदान देने का संकल्प लिया।

शब्दार्थ और टिप्पणी अपमानित < बेइज़्ज़त अनुमान + अंदाज़ा प्रयास + कोशिश सहानुभूति < हमवर्दी निर्दोष 5 बेक़सूर निर्दता - बेरहमी दुर्गति - बुरा हाल निस्सहाय. - बेसहारा व्याकुल - बेचैन ख़ोनचा - फेरी लगाने का पात्र निरन्तर -< लगातार विचलित 5 भटक जाना अभागिन_- बुरे भाग्यवाली, बदक़िस्मत क्षणभरमें < पल भर में, जल्द ही दयनीय - दया के योग्य यथावत्‌ - पहले जैसा नम्नतापूर्वक्क < नरमी से

हमारी पोथी-5 (4089

अभ्यास 3) उत्तर लिखिए :

लोग कहाँ और क्यों बैठे थे ?

बुढ़िया ने वृक्ष के नीचे पहुँचते ही क्या आवाज़ लगाई ? भिखारिन कैसे गिरी ?

भिखारिन मछली के समान क्‍यों तड़पने लगी ?

अन्याय और असमानता किसकी देन है ?

इस कहानी से क्या शिक्षा मिलती है?

7) उचित शब्दों का चयन करके रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए ' (सहायक, अन्याय, दशा, दया, अपमानित, भिखारिन)

काश, मेरा भी कोई ........... होता!

ये पुलिसवाले दीन-दुखियों को किस प्रकार .......... करते हैं। यह तो बड़ा ४४२३) ७४ ०००४

मैं तो एक अभागिन भिखारिन की ...........

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के एप # &++

षा-बोध

') प्रस्तुत पाठ में अन्याय, असमानता आदि शब्द आए हैं। इन शब्दों में अ' उपसर्ग जुड़ा हुआ है। उपसर्ग उस शब्दांश को कहते हैं, जो मूल-(रूढ़) शब्दों (संज्ञा, विशेषण आदि) के पहले जुड़कर शब्दों के अर्थ में विशेषता या परिवर्तन उत्पन्न कर देता है।

हमारी पोथी-5

“अ' उपसर्ग से बने कुछ और शब्द देखिए :

उपसर्ग शब्द उपसर्गयुक्त शब्द ६८८ | अभाव तथा + ज्ञान - अज्ञान नकारात्मक भाव + थाह - अथाह काघोतक + न्याय -< अन्याय + समानता < असमानता

“अ' उपसर्गवाले पाँच शब्द लिखिए और अपने शिक्षक को दिखाइए।

कुछ और काम

अपने शिक्षक के मार्गदर्शन में एक बाल-समिति का गठन कीजिए और स्कूल की सफ़ खेल-कूद आदि के बारे में चर्चा कीजिए।

पट

हमारी पोथी-5

पाठ - 25

जीवन के अंधियारे पथ में

सत्य धर्म अपनाओ बन्धु, सत्य धर्म अपनाओ। मानवता के प्रेमी बनकर, मानव तुम कहलाओ॥

भूले-भटके इनसानों को, सत्य मार्ग दिखलाओ। जीवन के अंधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ॥

एक ईश्वर की करो वन्दना, उसके ही गुण गाओ। उसके ही मार्ग पर चलकर, जीवन सफल बनाओ॥

जन-जन की सेवा करके, अपना जीवन सफल बनाओ | जीवन के अंधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ॥

चहुँदिश हाहाकार मचा है, पीड़ित है जनता सारी। सबको है मतलब से यारी, क्या नौकर क्या व्यापारी

अत्याचार मिटाओ जग से, एक सभी हो जाओ। जीवन के अंधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ॥

उठो मुजाहिद', मिल-जुलकर, अब ऐसा चक्र चलाओ। नव निर्माण करो, पृथ्वी को स्वर्ग बनाओ॥

ईश्वर का सन्देश, जगत्‌ के घर-घर में पहुँचाओ। जीवन के अंधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ।-

- संकलित

हमारी पोथी-5 (9

शब्दार्थ और टिप्पणी

. बन्‍्दना

(क)

(ख

्ज्ट

भाई, दोस्त मानवता सच्चा रास्ता मार्गदीप इबादत पफ्थ दुनिया चहुँदिश चकका, गोल पहिया नव निर्माण

बन्धु सत्य मार्ग

हित है हा को:

जग चक्र

अभ्यास उत्तर लिखिए :

हमें किसकी वन्दना करनी चाहिए ?

हमें ईश्वर का सन्देश कहाँ पहुँचाना है ?

कवि ने कौन-सा धर्म अपनामे के लिए कहा है ? मानव को किसका प्रेमी बनना चाहिए ?

कबि ने किसकी सेवा करने के लिए कहा है ?

खाली जगहों को भरिए :

0) 3 अप उसके ही गुण गाओ। उसके ही मार्ग पर चलकर, जीवन सफल बनाओ॥ (0058४ 872 75४02 » एक सभी हो जाओ। जीवन के अँधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ॥ (॥0) ईश्वर का सन्देश जगत्‌ के .......... में पहुँचाओ। जीवन के अंधियारे पथ में, मार्गगीप बन जाओ

न्यू ४७ + ७०७ +-

ह्त्फ्रत्अर

है ॥ा | का.

इस कविता में पृथ्वी को क्या बनाने के लिए कहा गया है ?

इनसानियत

रास्ते का चिराग रास्ता

चारों ओर

नई तामीर, नई रचना

हम्‌ जीवन की अँधेरी राह-में रौशनी का चिराग़ कैसे बन सकते हैं ?

हमारी पोथी-5 (429

पाठ - 26

हिमालय से परे

हमारे देश के उत्तर में हिमालय पर्वत है। हिमालय का अर्थ है--बर्फ़ का घर। इस पर्वत की: एनचुम्बी चोटियाँ सदैव बर्फ़ से ढकी रहती हैं, इसी लिए इसका नाम हिमालय पड़ा। इसकी अनेक ची-ऊँची चोटियाँ हैं। माउंट एवरेस्ट' संसार की सबसे ऊँची चोटी है। हिमालय हमारे देश की उत्तरी मरा पर दूर-दूर तक फैला हुआ है। हिमालय के उस पार चीन है। चीन बहुत विशाल देश है। यहाँ सार की सर्वाधिक जनसंख्या रहती है। हिमालय के उत्तरी ढलान-पर चीन का एक प्रांत है, तिब्बत! ब्बत पहले एक स्वतंत्र देश था। बाद में उसे चीन में सम्मिलित कर दिया गया। तिब्बत के निवासी पने देश को बोदयुल' कहते हैं। - * ;

तिब्बत संसार का सबसे

'चा प्रदेश है। वहाँ तक पहुँचना 7 च्चों का खेल नहीं; लोहे के चने ___ कि बाने पड़ते हैं। बड़ी कठिन चढ़ाई. ्ऊ्ः पहाड़ों पर चढ़ने के मार्ग अत्यन्त गम हैं। कहीं ऊँचाई, तो कहीं गहरी >-- है ॥ई। टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों से उन्हें 22222 222 य्र्् करना होता है। वहाँ की सड़कें अज७&&६८2:/ " पा लीड़ी-चौड़ी नहीं हैं। रेल, मोटर, . का गंगा इत्यादि सवारियों का वहाँ गुज़र - आर ता अल हीं। अत: तिब्बती लोग सारे संसार - | | प्राय: अलग-थलग रहते हैं। पर्वत पर बसे इस प्रदेश तक पहुँचने का मार्ग कंठिन ही नहीं, भयावह है। यात्री यदि तनिक भी असावधान हो जाए तो फिसलकर गहरे गड्ढे में जा गिरे।. ये गड्ढे इतने-

हैं कि गिरनेवालों की हड्डी-पसली का. भी-पता नहीं चलता | कठिन चढ़ाई में यात्रियों की साँसें जलने लगती हैं। कान बजने का रोग हो जाता है। अत: 'यहाँ के निवासी प्राय: कहीं बाहर नहीं जाते तौर ही दूसरे लोग उनके पास जाने का साहस करें हैं। *

तिब्बत की भूमि बंजर और पथरीली है। वर्षा भी नाम-मात्र को होती है। उपयुक्त मिट्टी और

हमारी पोधी-5 (33)

: वर्षा के अभाव तथा अनुकूल मौसम होने के कारण यहाँ अन्न की उपज बहुत कम होती है। कु पौधे उपये भी हैं तो बर्फ़ीली हवा के कारण मुरझा जाते हैं। कहीं-कहीं थोड़ा जौ, ज्वार, बाजरा इर्त्या उगाए जाते हैं। लोगों को पर्याप्त अन्न नहीं मिलता। पेट पालने के लिए बड़ा कष्ट उठाना पड़ता है अधिकतर लोग पशु पालते हैं! पानी, चारे की खोज में इधर-उधर घूमते रहते हैं। याक, भेड़, बकरी ख़च्चर इत्यादि यहाँ के प्रमुख पशु हैं। तिब्बती लोग प्राय: ख़ेमों में रहते हैं। दूध, दही, मक्खन, पनी तथा पशुओं का मांस उनका मुख्य भोजन है। भूख से पीड़ित लोग कई-कई दिन का बासी मांस करू खा जाते हैं।. *

याक यहाँ का सबसे महत्त्वपूर्ण पशु है। यह बैल के सदृश होता है। इसके शरीर पर बड़े-बः बाल होते हैं। तिब्बत के निवासियों के लिए याक बहुत उपयोगी है। वे इसका दूध पीते, मांस खाते खाल से ख़ेमे और ऊन से वस्त्र बनाते हैं। सामान ढोने और पहाड़ी मार्ग पर यातायात का साधन भ॑ यही है। इसके बड़े-बड़े घने बाल इसे पहाड़ी सर्दी से सुरक्षित रखते हैं।

यहाँ के निवासी चाय बहुत अधिक पीते हैं। वे चाय में दूध, मक्खन तथा जौ का आट मिलाकर बहुत गाढ़ी- कर लेते हैं।

यहाँ शिशिर ऋतु अत्यन्त भीषण होती है। बर्फ़ीली हवाओं के झोंके चलते हैं। यहाँ के निवार्स ख़ेप्मों में आग जलाकर रहते हैं और ऊनी वस्त्र पहनकर सर्दियों से बचते हैं। ख़ेमों से बाहर याक और भेड़ें प्राय: ठंडक से ठिठुएकर मर जाती हैं। ये चरवाहे जिनकी सारी संपत्ति ये पशु ही होते हैं, क्षण भर रे दरिद्र बन जाते हैं।

तिब्बत में योगी तथा संन्यासी बहुत अधिक हैं | ये लोग 'लामा' कहलाते हैं और मठों में रहरे हैं। पूरे प्रदेश में इन्हीं का राज्य है। ग्रामीण लोग प्राय: इन्हीं के कहने पर चलते तथा इन्हीं -आज्ञोपालन करते हैं। प्रत्येक क्षेत्र में इनके मठ होते हैं। ये आम तौर पर बौद्ध धर्मावलम्बी होते हैं। लेकिन इनका धर्म दूसरे देशों के बौद्धों से भिन्‍न और निराला है। अधिकांश लोग अनपढ़ होते हैं। अतः लामा जिम्न मार्ग पर चाहते हैं, उन्हें ले जाते हैं! अज्ञानता के कारण वे अंधविश्वास में जकड़े हुए हैं। ये लामाओं के जंत्र-मंत्र और टोने-टोटके से बहुत डरते हैं। इनकी भाषा 'भोट' कहलाती है। इस भाषा में बौद्ध धर्म के ग्रंथ सुरक्षित हैं। प्राचीन काल में भारत में बौद्धों की बड़ी संख्या थी। भारत से ही भोट भाषा में अनूदित बौद्ध धर्मग्रंथ तिब्बत पहुँचे। कुछ वर्षों पहले बौद्ध धर्म के ग्रंथों को तिब्बत से ख़च्चरों पर लादकर भारत लाया गया। महापंडित राहुल सांकृत्यायन का इसमें बड़ा योगदान रहा। उन्होंने अथके परिश्रम से उन पहाड़ी दुर्गम मार्गों को पार किया उन्होंने उन ग्रंथों का पालि और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया।

हमारी पोथी-5 (६4)

तिब्बत की राजधानी ल्हासा नगर है। यहाँ का शासक 'दलाई लामा' कहलाता था। उसके हने के लिए ल्हासा नगर में पहाड़ी पर सुन्दर भवन होते थे। वहाँ के निवासी दलाई लामा को ईश्वर का प्रवतार और उसी को शासन का अधिकारी मानते थे। जब एक दलाई लामा की मृत्यु हो जाती है तो सके स्थान पर दूसरे का चुनाव बड़े रोचक ढंग से होता है उनका विश्वास है कि दलाई लामा कभी हीं मरता है। वह केवल शरीर बदलता है। उसकी आत्मा एक शरीर से निकलकर दूसरे शरीर में प्रवेश फए जाती है। वही आत्मा नवजात शिशु के रूप में पुनः जन्म लेती है। अतर्व ऐसे शिशु के कुछ नक्षण सुनिश्चित कर लिए गए। दलाई लामा की मुत्यु के पश्चात लामाओं का एक समूह उसे ढूँढने नेकलता है। तत्काल जन्मे किसी बच्चे में अपने निर्धारित लक्षण देखकर उसे दलाई लामा घोषित कर ता है। महल में रखकर उसका विशेष ढंग से पालन-पोषण किया जाता है। द्वितीय विश्व-युद्ध के आरंभ से कुछ पहले तत्कालीन दलाई लामा की मूत्यु हो गई तो उसकी गद्दी पर बिठाने के लिए तीन त्र्ष की निरंतर खोज के बाद अभीष्ट शिशु मिला था, जिसे दलाई लामा घोषित किया गया! यह परम्परा अब भी जारी है।

अब तिब्बत पर चीन का अधिकार हो जाने से स्थिति बदल गई है। वहाँ लामाओं पर बंड़े अत्याचार हुए। लामाओं के शासन का अंत हो गया। अतः दलाई लामा. और उनके बहुत-से साथी भारत में निर्वासित जीवन बिता रहे हैं। वहाँ के नागरिक इस परिवर्तित परिस्थिति में भी शिक्षा प्राप्त करके आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं। अन्य क्षेत्रों में विकास कर रहे हैं। उनपर अब प्राचीनता का प्रभाव बहुत कम है। धार्मिक प्रवृति के लोग अपने निजी जीवन में धर्म का अनुकरण करते हैं।

शब्दार्थ और टिप्पणी

गगनचुम्बी 5: बहुत ऊँची सदैव. + हमेशा

दुर्गम > जहाँ जाना कठिन हो. भयावह 5८ ख़ौफ़नाक, डरावना अभाव 5 कमी पर्याप काफ़ी, यशथेष्ट

दुर्गध रू बदबू भीषण. 5 सख्त, भयानक, डरावना धर्मावलम्बी - धर्म को मानवाला रोचक +- दिलचस्प

आत्मा - रूह , लक्षण 5 अलामत, संकेत घोषित . - एलानकिया हुआ अभीष्ट + मतलूब, इच्छित लोहे के चने चचाना कड़ी मेहतत करना सदृश < समान

हमारी पोधी-5 (॥352

दरिद्र. - ग़रीबः *. वमठ - साधुओं के रहने का स्थान . नवजांतं” * ' + नया जन्मा हुआ निर्वासित देश निकाला

अभ्यास

(क) इन प्रश्नों के उत्तर एक-एक वाक्य में लिखिए

!. हिमालय शब्द का क्या अर्थ है? . लि

2. संसार की सबसे ऊँची चोटी का क्या नाम है ?

3. तिब्बत के.निवासी अपने देश को क्या कहते हैं? - 4. कठिन चढ़ाई में क्या होता है? |

5, तिब्बत में कौन-कौन-से पशु पाए जाते हैं ?

(ख) संक्षेप में उत्तर लिखिए :

. तिब्बत कहाँ है? तिब्बत के निवासी सारे संसांर से अलग-धलग क्यों हैं ? . 2. याक तिब्बत का सबसे महत्त्वपूर्ण पशु क्यों माना जाता है ?'

3. तिब्बत में अन्न की उपज बहुत कम क्यों होती है? *

4. दलाई'लामा किसे कहते हैं? उसका चुनांव कैसे होता है ?

5. तिब्बत के चरवाहे वरिद्र कैसे हो जाते हैं ?

(ग) कोष्ठक में (दिए गए सही शब्दों पर सही (४) का निशान लगाइए; :

!. संसार का सबसे ऊँचा प्रदेश कौन-सा है। (चीन, तिब्बत, लद्दाख़) 2, तिब्बत के निवासी सबसे अधिक क्‍या पीते हैं ? (दूध, शरबत, चाय,) | 3. तिब्बत के लोग किस धर्म को मानते हैं? (ईसाई धर्म, इस्लाम धर्म, बौद्ध धर्म) 4. तिब्बत के लोगों की भाषा क्या कहलाती है ? (नेपाली, चीनी, भोट) 5. कौन-सा नगर तिब्बत की राजधानी है? (शिलांग, काठमांडू, ल्हासा)

हमारी पोधी-5

षा-बोध

5) इन मुहावरों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए : . ... बच्चों का खेल, लोहे के चने चबाना, साँस फूलना, गाल बजाना, हवा से बातें करना।

थ्र) निम्नलिखित वाक्यों को ध्यानपूर्वक पढ़िए :

बादल घिर आए और मयूर नाचने लगे। तिब्बत के धर्मगुरु 'लामा' कहलाते हैं और बे मठठों में रहते हैं।

उपर्युक्त दोनों वाक्य संयुक्त वाक्य हैं। जिस वाक्य में दो या दो से अधिक साधारण वाक्य यय से जुड़े हों, उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं| जैसे, बादल घिर आए। मयूर नाचने लगे। ये दोनों यू साधारण वाक्य हैं और इन्हें 'और' अव्यय जोड़कर संयुक्त वाक्य बना दिया गया है। इसी प्रकार खत के धर्मगुरु 'लामा' कहलाते हैं। वे मठठों में रहते हैं। ये दोनों वाक्य भी साधारण वाक्य हैं। इनमें गैर अव्यय जोड़ने पर संयुक्त वाक्य बन गया।

पाँच संयुक्त वाक्य अपनी कॉपी पर लिखकर अपने शिक्षक को दिखाइए।

और काम

भारत में छह ऋतुएँ होती हैं। हर ऋतु दो माह की होती है। इन्हें याद कर लो -- . चैन्र-वैशाख ल्म्+ वसन्त ऋतु

2. ज्येष्ट-आषाढ़.. ऋयाण ग्रीष्म ऋतु

3. सावन-भादो जया: वर्षा ऋतु

4. आश्विन-कार्तिक +-+ शरद ऋतु

5. अगहन-पूस नल हेमन्त ऋतु

6. माघ-फाल्गुन जया: शिशिर ऋतु

अपने शिक्षक से मालूम कीजिए कि प्रत्येक ऋतु में मौसम कैसा होता है।

हट

* हमारी पोधी-5 (7)

पाठ - 27

मौलाना मुहम्मद अली 'जौहर'

संसार में जीने के लिए तो सभी आते हैं। मगर कुछ लोग अपने जीवन में सत्य और निष्ठा की प्रति मूर्ति बनकर मानवता की सेवा करते हैं। असत्य के सामने कभी नहीं झुकते। अपने मूल सिद्धान्तों से कभी समझौता नहीं करते। समय आने पर अपने प्राणों की आहुति देने से भी नहीं चूकते। ऐसे लोग मरकर भी अमर हो जाते हैं। इतिहास में इनके नाम स्वर्णक्षरों में लिखे जाते हैं। ऐसे ही व्यक्तियों में मौलाना मुहम्मद अली 'जौहर' का नाम अग्रगण्य है।

हमारा देश भारत उस समय अंग्रेज़ों की गुलामी की ज़ंजीरों में जकड़ा हुआ' था। देशवासी अपमानित जीवन व्यतीत करने को विवश थे देश की सारी सम्पत्ति लूटकर विदेश पहुँचाई जाती. थी। देश की जनता अभाव की ज़िन्दगी जीने को विः कर दी गई थी। अत: देशवासियों ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ी। स्वतंत्रता की लः तो अंग्रेज़ों के आने के बाद ही शुरू हो चुकी थी। लेकिन समय बीतने के साथ उसमें और औरधि * तीव्रता आती गई। स्वतंत्रता के इस महासमर में गाँधी जी के आगमन से पूर्व पूरे देश में दो व्यक्रि की तूती बोलती थी। बे थे--शौकत अली और मुहम्मद अली। दोनों सगे भाई थे, इसलिए “अली बिरादरान' या अली ब्रदर्स' कहा जाता था।

मुहम्मद अली का जन्म रामपुर के एक प्रतिष्ठित परिवार में 0 दिसम्बर 878 ई. को हुउ उनके पिता अब्दुल अली ख़ाँ रियासत रामपुर के एक फ़ौजी रिसाले के जमादार थे। 20 अगर 880 ई. को हैज़ा रोग से उनका आकस्मिक निधन हो गया। मुहम्मद अली अपने पाँच भाइयों < एक बहन में सबसे छोटे थे। अभी दो साल के भी नहीं हुए थे कि पिता का साया सर से उठ गया और अनाथ हो गए।

उनकी माँ का नाम आबादी बेगम था। आदर से लोग उन्हें “बी अम्माँ' कहते थे। अद्ठा

हमारी पोथी-5 -

या इस विधवा माँ ने बड़े धैर्य और यंत्न से छह बच्चों के लालन-पालन का बोझ अपने कंधों पर लिया उन्होंने बच्चों की शिक्षा-दीक्षा के लिए आभूषण भी बेच डाले। उन्होंने स्वतंत्रता संघर्ष में अपने बेटों के साथ बड़ा सहयोग किया। देश के सारे महान नेता उन्हें 'राष्ट्रमाता' के रूप में आदर थे।

प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान जब मुहम्मद अली जेल में थे तो उनकी माँ ने उनकी पत्नी को साथ पूरे देश में भ्रमण किया और चालीस लाख रुपये आन्दोलन के लिए एकत्र किए। वे बड़ी-बड़ी ।ओं में जाकर भाषण भी देती थीं। उनसे बड़े-बड़े नेताओं को भी हौसला मिलता था।

पंडित सुन्दरलाल ने अपने एक लेख में लिखा है-

*]99 ई. में मुरादाबाद में सूबे की पोलिटिकल कांफ्रेंस डॉ. भगवान दास की अध्यक्षता में आयोजित हुई। मैंने असहयोग' का प्रस्ताव रखा। गाँधी जी मौजूद थे। पुराने नेताओं ने विरोध किया। बी अम्माँ आईं। उन्होंने तक़रीर की और प्रस्ताव पास हो गया। डॉ. भगवान दास ने कहा कि जब स्वयं भारत माता' समर्थन कर रही हैं तो मैं भी समर्थन करता हूँ।''

ऐसी माँ की गोद में पलकर मुहम्मद अली जवान हुए थे। बे स्वयं गवाही देते हैं कि मैंने जो $ पाया है अपनी माँ से पायां है। बी अम्माँ एक निष्ठावान मुसलिम महिला थीं। उन्होंने हज भी किया माँ ने अपने बेटे का चरित्र-निर्माण इस तरह किया था कि वे जनता के दिलों के बादशाह और जाम के सच्चे सिपाही बन गए थे।

मुहम्मद अली की प्राथमिक शिक्षा रामपुर के स्कूल में हुईं। कुरआन मजीद और मकतब की एसी तालीम पूरी होने के बाद रामपुर के एक अंग्रेज़ी स्कूल में उनका नाम लिखवाया गया। कुछ ने उसमें पढ़ने के बाद उसी वर्ष 888 ई. में अपने भाई शौकत अली के पास बरेली चले गए। तराई 888 ई. से बरेली हाई स्कूल में उनकी शिक्षा शुरू हुई। बरेली में दो साल पढ़ने के बाद वे नीगढ़ के 'मदरसतुल-उलूम में पढ़ने चले गए। वहाँ अंग्रेज़ी शिक्षा का उत्तम प्रबन्ध था। यही लेज आगे चलकर “अलीगढ़ मुसलिम विश्वविद्यालय” बना। अलीगढ़ में उनके बड़े भाई पफ़िक़ार अली खाँ पहले से मौजूद थे। 890 ई. में मुहम्मद अली, शौकत अली और नवाज़िश ती -- ये तीनों भाई भी अलीगढ़ में दाखिल हो गए।

मुहम्मद अली 898 ई. में अलीगढ़ से बी. ए. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुए और विश्वविद्यालय प्रथम स्थान प्राप्त किया। उस समय अलीगढ़ कॉलेज इलाहाबाद विश्वविद्यालय में था। इसलिए

हमारी पोथी-5

इलाहाबाद विश्वविद्यालय ने उन्हें 899 ई. में बी. ए. की डिग्री प्रदान की। अलीगढ़ से बी.ए. के बाद 899 ई. में ही उनके भाई ने क़र्ज़ लेकर उच्च शिक्षा के लिए उन्हें लन्दन भेज विया। समय 'बीं अम्माँ ने मुहम्मद अली को गंले लगायां और नसीहत की - “बेटा | इस्लाम और ख़ानः की इज़्ज़त पर धब्बा लगाना | जाओ, ख़ुदा हाफ़िज़ !””

नवम्बर 899 ई. में उन्होंने ऑक्सफ़ोर्ड में प्रवेश पाकर सिविल सर्विस की तैयारी शुरू लेकिन इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली। ऑक्सफ़ोर्ड में रहते हुए उन्होंने लैटिन, जर्मम और अरबी सीखी। मुहम्मद अली ऑक्सफ़ोर्ड (लन्दन) में भी तुर्की टोपी पहनते और रमज़ान शरीफ़ के पूरेरे रखते और नियमित रूप से नमाज़ भी पढ़ते थे।

मुहम्मद अली 2 दिसम्बर 90] ई. में स्वदेश लौट आए। रियासत्त रामपुर में 4 जनः 902 ई. में शिक्षा विभाग में स्कूल इंस्पेक्टः के पद पर 300 रुपये मासिक वेतन के साथ उन नियुक्ति हुई। 5 फ़रवरी 902 ई. में रामपुर में ही अमजदी बेगम से उनका विवाह हुआ। कुछ सः बाद सेवा से छुट्टी लेकर बी. ए. ऑनर्स की परीक्षा देने वे लन्दन चले गए मॉड्न हिस्ट्री से 902 ऑनर्स किया और 28 जुलाई 902 में स्वदेश लौट गए। रामपुर की सेवा में आंतरिक बाधा उत्प होने के कारण 903 ई. में वहाँ से सेवानिवृत्त होकर इटावा में शौकत अली के साथ रहने लगे 3 वहीं वकालत की परीक्षा की तैयारी शुरू की। बहुत कम समय की तैयारी के कारण वे उत्तीर्ण सके | वे नौकरी की तलाश में लगे रहे।

कुँवर फ़त्‌ह सिंह--बड़ौदा रियासत के युवराज--से लन्दन में मौलाना के गहरे सम्बन्ध उनकी सिफ़ारिश पर महाराजा गायकवाड़ बड़ौदा ने उनको सिविल सर्विस में उच्च पद पर नियुः किया। उनकी योग्यता और कर्मठता से महाराजा को बड़ा लाभ पहुँचा। मौलाना को अन्य रियासतों से भी उच्च पद के लिए आमंत्रण मिले। लेकिन देश-विदेश की तत्कालीन राजनीति परिस्थिति को देखते हुए देश-सेवा हेतु उन्होंने नीकरी करने का निश्चय किया और 90 ई. अन्त में उन्होंने बड़ौदा की नौकरी छोड़ दी।

90 से 93 तक यूरोपीय देश मुसलिम देशों पर लगातार आक्रमण कर रहे थे। मौलाना इस अन्याय का खुलकर विरोध किया और इंगलैण्ड की सरकार पर दबाव डालते रहे कि वह ऐसा करे उन्होंने अपनी आवाज़ जनता तक पहुँचाने के लिए भारत की तत्कालीन राजधानी कलकत्ता एक अंग्रेज़ी साप्ताहिक पत्र 'कॉमरेड' निकाला। 'कॉमरेड', का पहला अंक 4 जनवरी 9] प्रकाशित हुआ। शीघ्र ही देशभर में उनकी धूम मच गई। राजधानी दिल्‍ली स्थानांतरित होने के 93 ई. में कॉमरेड का दफ़्तर भी दिल्‍ली गया और उसी वर्ष से उर्दू में भी दैनिक 'हमद

हमारी पोथी-5 -

क्रालना शुरू किया। उनकी अंग्रेज़ी भाषा इतनी अच्छी थी कि अंग्रेज़ भी अपना सिर धुनते थे। मरेड की फाइलें वे अपने पास सुरक्षित रखते थे। उर्दू में लेख लिखने के अतिरिक्त बड़ी उम्दा शायरी करते थे।

उनके वक्‍तव्यों, भाषणों और लेखों से जनता में नई चेतना का संचार होता था। इसलिए उनको (-बार नज़रबन्द किया गया और जेलों में डाला गया। कॉमरेड की ज़मानत भी ज़ब्त की गई। फिर झुके बिना वे सारी कठिनाइयाँ झेलते रहे।

तुर्की की ख़िलाफ़त मुसलमानों की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक और राजनीतिक संस्था थी। अंग्रेज़ों ने समाप्त करने की योजना बनाई | मुसलमानों में बड़ी बेचैनी पैदा हुई। ख़िलाफ़त की रक्षा के लिए बलाफ़त कमेटी' बनाई गई। ख़िलाफ़त कमेटी ने अंग्रेज़ों के विरुद्ध ज़ोरदार आन्दोलन चलाया। सन '9 ई. में जेल से रिहा होते ही मुहम्मद अली घर जाकर सीधे अमृतसर गए। वहाँ कांग्रेस का चैबेशन चल रहा था। वहीं पहली बार कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की | ख़िलाफ़त आन्दोलन से देश अंग्रेज़ों के विरुद्ध एक नई जागृति पैदा हुई। अंग्रेज़ी सरकार के विरुद्ध असहयोग का आन्दोलन भी वा। देश की युवा पीढ़ी को आत्मनिर्भरता की शिक्षा देने के लिए जामिआ मिल्लिया कॉलेज की, पपना 920 ई. में की गई। मुहम्मद अली ने उसमें महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वहाँ उन्होंने एक नई क्षा-नीति की बुनियाद रखी।

923 ई. के बाद दोनों आन्दोलन असफल हो चुके थे। अंग्रेज़ों ने हिन्दू-मुसलिम एकता भंग ने का षढ़यंत्र रचा। शुद्धि-संगठन और कुछ अन्य संगठनों ने मुसलिम-विरोधी कार्रवाइयाँ तेज़ कर निराशा के घटाटोप अंधेरे में उन्होंने देशवासियों का मार्गदर्शन किया। हिन्दू-मुंसलिम एकता को उन गों बड़ा आघात पहुँचा था। उन्होंने एकता पैदा करने का अथक प्रयास किया। लगातार बीमार रंहने कारण उनका स्वास्थ्य बहुत गिर चुका था। वे जेल में थे कि उनकी बेटी आमिना बहुत बीमार हो

बचने की उम्मीद भी कम हो गई। जेल में होने के कारण वे विवश थे। उन्होंने अल्लाह पर भरोज्ता या और दुआ की | उनकी दुआ का अंतिम पद (शेर) यह है - ; “तेरी सेहत हमें मतलूब है लेकिन उसको, नहीं मंज़ूर तो फिर हमको भी मंज़ूर नहीं।

भारतीय नेताओं की माँगों पर विचार करने के लिए अंग्रेज़ी सरकार ने लन्दन में 930 ई. में ज़मेज़ कांफ्रेंस बुलाई। मौलाना मुहम्मद अली बीमार होने के बावजूद उसमें भाग लेने के लिए तैयार गए। अपने एक मित्र को उन्होंने पत्र लिखा- गोलमेज़ कांफ्रेंस में साम्प्रदायिक समझौते की शिश करूँगा और चाहूँगा कि भारत के मुसलमानों की जायज़ माँगें क़ानूनी तौर पर स्वीकार कर ली

हमारी पोथी-5 (६292

जाएँ। अगर इसमें सफलता मिल गई तो आज़ादी की मंज़िल ठक पहुँचने के लिए जो संघर्ष होगा उर सबसे पहला व्यक्ति मैं होऊँगा। मैं मुसलमानों को और अपने आपको जंगे-आज़ादी में आगे-अ रखूँगा।'' वे आज़ादी को मौलिक अधिकार समझते थे।

मौलाना मुहम्मद अली ने-गोलमेज़ कांफ्रेंस में भाग लिया। उन्होंने अपने अंतिम भाषण कहा- *

' मैं इस समय एक उद्देश्य से यहाँ आया हूँ। मैं अपने देश सिर्फ़ उसी हालत में वापस जाऊँ जबकि आज़ादी का परवाना मेरे हाथ में हो। मैं एक गैर मुल्क में मरने को प्राथमिकता दूँ. जबतक कि वह स्वतंत्र देश है। अगर आप मुझे आज़ादी नहीं देंगे तो फिर आपको यहाँ क़ब्र के लिए जगह देनी होगी।”'

उनकी यह बात सत्य सिद्ध हुई। 4 जनवरी 93 ई. को लंदम ही में उनका देहांत हो गय अरब नेताओं के आग्रह पर उनके शव को फ़िलस्तीन में दफ़नाया गया। देश-विदेश के बड़े-ढ राजनेताओं ने उनको श्रद्धांजलियाँ अर्पित की

शब्दार्थ और टिप्पणी निष्ठा - श्रद्धा, विश्वास प्रतिमूर्ति - प्रतिमा आहुति - कुरबानी, बलिदान अग्रगण्य प्रधान, श्रेष्ठ सम्पदा - दौलत जागृत -< जागा हुआ "साम्प्रदायिक - फ़िरक्ावाराना तीब्रता - तेज़ी समर > युद्ध आकस्मिक -< अचानक उत्तीर्ण - कामयाब, पास॒ दयनीय - क़ाबिले-रहम, दया के योग्य अधिवेशन 5 इजलास यत्न - कोशिश आभूषण. > ज़ेवर प्रस्ताव - क़रारदाद, इच्छा प्रकट करन निष्ठावान_ < मुख़लिस नियमित रूप से + नियम के मुताबिक़ बाज़ाब्ता सेवानिदृत्त + नौकरी से छुट्टी. कर्मठता - काम में लगन और दक्षता तत्कालीन 5 उस समय का 'योजना > मंसूबा आघात -< चोट मौलिक 5 बुनियादी तरजीह + प्राथमिकता श्रद्धांजलि अर्पित करना <> श्रद्धा प्रकट करना

हमारी पोथी-5 ([229

अभ्यास

ऋक) निम्नलिखित प्रश्नों का एक-एक वाक्य में उत्तर लिखिए :

एक के ०७

ख़

जल

. स्वतंत्रता के महासमर में गाँधी जी के आगमन से पूर्व किन दो व्यक्तियों की तूती बोलती थी ? . मुहम्मद अली जौहर का जन्म कब और कहाँ हुआ ? *

, लोग बी अम्मा' और राष्ट्रमाता' किसे कहते थे ?

, अंग्रेज़ों के विरुद्ध देश में नई जागृति किस आन्दोलन से पैदा हुई ?

. हिन्दू-मुस्लिम एकता के लिए मुहम्मद अली जौहर ने क्या किया ?

संक्षेप में उत्तर लिखिए :

. मुहम्मद अली जौहर की प्रारंभिक शिक्षा कहाँ हुई ? . उनकी माँ का उनकी शिक्षा-दीक्षा में क्या योगदान रहा ?

मुहम्मद अली जौहर ने अंग्रेज़ी भाषा में कौन-सा अख़बार निकाला और क्‍यों ? मौलाना जौहर का देहान्त कब और कहाँ हुआ ? मुहम्मद अली को कहाँ और किसके आग्रह पर दफ़नाया गया ?

ग) कोष्ठक में दिए गए शब्दों में से सही शब्द चुनकर ख़ाली जगहों को भरिए

(हमर्दद, धब्बा, अंग्रेज़, नेता, आज़ादी, क़ब्र, भारतमाता, साम्प्रदायिक, परवाना)

जब स्वयं .......... सर्मथन कर रही हैं, तो मैं भी समर्थन करता हूँ।

. देश के सारे महान ............ उन्हें राष्ट्रमाता के रूप में आदर देते थे।

इस्लाम और ख़ानदान की इज़्ज़त पर ......... लगाना।

- मुहम्मद अली जौहर ने उर्दू में भी एक दैनिक ....... निकाला।

. मुहम्मद अली जौहर की अंग्रेज़ी भाषा इतनी अच्छी थी कि ......... भी अपना सिर धुनते थे।

. गोलमेज़ कांफ्रेंस में ........... समझौते की कोशिश करूँगा।

. अगर इसमें सफलता मिल गई तो ........ की मंजिल तक पहुँचने के लिए जो संघर्ष

होगा उसमें सबसे पहला व्यक्ति मैं होऊँगा।

हमारी पोथी-5 ((332

8. मैं अपने देश सिर्फ़ उसी हालत में वापस जाऊँगा, जबकि आज़ादी का ............. डे हाथ में हो।

9. अगर आप मुझे आज़ादी नहीं देंगे तो फिर आपको यहाँ मुझे .......... के लिए जः देनी होगी। |

भाषा-बोध

(क) निम्नलिखित मुहावरों को अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए : ग्राों की आहूति देना, तूती बोलना, स्वर्णक्षरों में लिखा जाना, सिर से साया उठ जाना, इज़्ज़त पर धब्बा लगना।

(ख) निम्नलिखित वाक्यों में से सकर्मक और अकर्मक क्रियाएँ छाँटकर अपन कॉपी में लिखिए

सलीम आम खाता है। रज़िया आती है।

नईमा कुरआन पढ़ती है। अब्दुर-रहीम क्रिकेट खेलता है। सलीम ने मस्जिद की सफ़ाई की। ताहिरा नमाज़ पढ़ती है।

नबील लिख रहा है। साबिरा खाना पकाती है।

१020:24

हमारी पोथी-5